Written By Ajay Verma
Written By Ajay Verma
Edited by Ajay Verma |Published: Jun 18, 2026, 04:05 PM (IST)
FIFA World Cup 2026 का आगाज हो चुका है। इस बार टूर्नामेंट सिर्फ खिलाड़ियों और टीमों के परफॉर्मेंस की वजह से नहीं बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी के कारण भी चर्चा में बना है। फुलबॉल मैचों को अधिक सटीक और रोमांचक बनाने के लिए AR (Augmented Reality), AI (Artificial intelligence) और सेंसर लैस बॉल जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि इस बार फुटबॉल में क्रिकेट की लोकप्रिय Snicko टेक से मिलती-जुलती तकनीक को भी यूज किया गया है, जिसकी झलक सोमवार को Sweden और Tunisia के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिली। और पढें: FIFA World Cup 2026: Jio फुटबॉल लवर्स के लिए लाया नया प्लान, कॉलिंग के साथ मिलेगा 40GB सुपरफास्ट डेटा
Snicko टेक्नोलॉजी बहुत लोकप्रिय है। इसका इस्तेमाल क्रिकेट (Cricket) में किया जाता है। इसे Snickometer मशीन से नाम मिला है। इसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि क्या बॉल बेट या फिर दस्तानों को छूकर निकली है या नहीं। इसके लिए स्टंप के पास बेहद ही संवेदनशील माइक्रोफोन लगाए जाते हैं, जो हल्की सी आवाज को भी रिकॉर्ड कर लेते हैं। और पढें: FIFA World Cup 2026 में दिखा Ref-Cam, जानें क्या है और कैसे करता है काम
जब बॉल बल्ले के संपर्क में आती है, तो मीटर में दिखाई देने वाली वेवफॉर्म तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इससे थर्ड अंपायर को यह समझने में आ जाता है कि बॉल बैट या फिर ग्लव से टच हुई है। इससे निर्णय लेने में आसानी होती है। और पढें: FIFA World Cup 2026: AR से Connected Ball तक, इन 5 हाईटेक तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इस हफ्ते सोमवार को Sweden और Tunisia के बीच खेले गए मैच में Snicko जैसी टेक्नोलॉजी देखने को मिली। इस मुकाबले के 84वें मिनट में Sweden के खिलाड़ी Mattias Svanberg ने गोल किया, लेकिन शुरुआत में इसे ऑफसाइड मानकर रद्द किया गया। हालांकि, बहस के बाद इसकी जांच की जिम्मा VAR अधिकारियों को सौंपा गया।
इसके लिए आधिकारियों ने मैच में इस्तेमाल हो रही Adidas Trionda स्मार्ट बॉल के डेटा को मॉनिटर किया, जिसमें खास माइक्रोचिप लगी हैं। इनकी खूबी है कि ये किसी खिलाड़ी से टकराते ही उसके सिग्नल रिकॉर्ड कर लेती हैं और उसे वेवफॉर्म के रूप में दर्शाती है। इस ही वेवफॉर्म से पुष्टि हुई कि Isak ने गेंद को हल्का सा टच किया था। इसके बाद ऑफसाइड के फैसले को बदला गया और उस गोल को मान्य माना गया।
फुलबॉल में इस्तेमाल किए जाने वाली टेक्नोलॉजी क्रिकेट की Snicko जैसी नहीं है। दोनों के काम करने का तरीका अलग है। क्रिकेट में माइक्रोफोन स्टंप के पास होते हैं, जबकि फुटबॉल में IMU सेंसर बॉल में लगा होता है, जो बॉल और खिलाड़ी के संपर्क में आने पर वेवफॉर्म में रूप में रिकॉर्ड कर लेता है। हालांकि, इन दोनों तकनीक का परिणाम दिखना तरीका लगभग एक जैसा है।
स्क्रीन पर वेवफॉर्म देखने को मिलती है, जिससे पता चल जाता है कि बॉल प्लेयर को छूकर निकली है या नहीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फीफा इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पिछले पांच साल से कर रही है। इसका उपयोग सबसे पहले 2022 वर्ल्ड कप में किया गया था।