Written By Ajay Verma
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Edited by Ajay Verma |Published: Jul 01, 2026, 04:19 PM (IST)
FIFA World Cup 2026 अपने रोमांचक मुकाबलों, स्टार खिलाड़ियों और नई टेक्नोलॉजी की वजह से लगातार खबरों में बना हुआ है। इस बार टूर्नामेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), स्मार्ट स्टेडियम और कनेक्टेड बॉल जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इन सब के साथ Ref-Cam टेक की भी चर्चा हो रही है, जिससे फैंस को मैच रेफरी की नजर से देखने का अवसर मिला है। आइए इस खबर में जानते हैं रैफ-कैम तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है… और पढें: FIFA World Cup 2026: Jio फुटबॉल लवर्स के लिए लाया नया प्लान, कॉलिंग के साथ मिलेगा 40GB सुपरफास्ट डेटा
अब तक रेफरी मैच के दौरान केवल माइक्रोफोन और ईयरपीस के जरिए असिस्टेंट रेफरी, चौथे अधिकारी और VAR टीम से संपर्क में रहते थे। हालांकि, इस बार वर्ल्ड कप में रेफरी के हेडगियर पर छोटा-सा कैमरा देखने को मिला है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। और पढें: FIFA World Cup 2026 में दिखी क्रिकेट वाली Snicko जैसी टेक्नोलॉजी, जानें कैसे करती है काम
यह Ref-Cam है। इससे रेफरी को यह समझने में भी मदद मिलती है कि मैच के दौरान फाउल या अन्य फैसले लेने में आसानी होती है। यही नहीं दर्शकों को रेफरी की नजर से मैच देखने का भी अनुभव मिलता है। और पढें: FIFA World Cup 2026: AR से Connected Ball तक, इन 5 हाईटेक तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल
फीफा के रेफरी कमेटी के चेयरमैन Pierluigi Collina का कहना है कि Ref-Cam का मकसद रेफरी की ट्रेनिंग एनालाइज करने के लिए किया जाता है। इससे उसकी परफॉर्मेंस में भी सुधार होता है। साथ ही, यह भी पता चलता है कि रेफरी ने मैदान में क्या देखा और किस आधार पर फैसला लिया।
रेफ-कैम एक छोटा-सा कैमरा होता है, जिसे रेफरी में अपने सिर पर हेट में लगाकर रखते हैं। इस कैमरे की खासियत है कि यह कैमरा रेफरी की नजर से पूरे मैच का लाइव ‘फर्स्ट-पर्सन व्यू’ (POV) कैप्चर करता है। इसमें AI से लैस स्टेबलाइजेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रेफरी के भागने पर भी वीडियो स्टेबल रहती है।
इस कैमरे के जरिए एचडी वीडियो शूट करने के साथ ऑडियो रिकॉर्ड की जा सकती है। वहीं, 5जी कनेक्टिविटी के माध्यम से मैच की लाइव स्ट्रीम को टीवी पर टेलीकास्ट किया जाता है, जिससे फैन्स रेफरी की नजर से मैच के अहम पल देख सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Ref-Cam का उपयोग पहली बार साल 2024 में Jarred Gillett ने Crystal Palace और Manchester United के बीच खेले गए Premier League मैच में किया गया था। इसके बाद साल 2025 में इस टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग की गई। अब इसका इस्तेमाल फीफा वर्ल्ड कप में किया जा रहा है।