comscore

Doomscrolling & Dopamine Explainer: कैसे सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत धीरे-धीरे खराब कर रही है आपकी हेल्थ

आजकल लोग फोन पर लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं, इस आदत को Doomscrolling कहते हैं। यह हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर डालता है, लगातार डर या नेगेटिव खबरें पढ़ने से दिमाग थक जाता है, तनाव बढ़ता है और हमारी Cravings यानी इच्छाएं बढ़ने लगती हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में सब कुछ...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Mar 28, 2026, 10:38 PM (IST)

  • whatsapp
  • twitter
  • facebook
  • whatsapp
  • twitter
  • facebook

आजकल स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन गए हैं लेकिन अगर आप लगातार सोशल मीडिया या नेगेटिव खबरें पढ़ते या ‘Doomscrolling’ करते रहते हैं, तो आप मानसिक और शारीरिक रूप से थका हुआ महसूस कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि लगातार स्क्रॉल करने से दिमाग बेचैन हो जाता है, शरीर में तनाव बढ़ जाता है। दरअसल Doomscrolling की वजह से हमें ज्यादा खाने, सोने या किसी चीज की इच्छा काफी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं कैसे… news और पढें: #HumFitTohIndiaHit: Smartwatch सिर्फ स्टाइल नहीं, आपकी हेल्थ का अलार्म सिस्टम! ये 5 फीचर्स समय से पहले गंभीर बीमारी के देते हैं संकेत

Doomscrolling हमारे दिमाग को क्यों थका देता है?

डूमस्क्रोलिंग दिमाग को बहुत ज्यादा एक्टिव कर देता है। हमारा दिमाग विकास के दौरान यह सीखता है कि थोड़ी-थोड़ी जानकारी मिले और फिर आराम मिले लेकिन डूमस्क्रोलिंग इसका उल्टा करता है। हर नया पोस्ट, वीडियो या खबर दिमाग में नई भावनाएं और जानकारी डालती है, भले ही आप बैठे हों और शरीर शांत हो, आपका दिमाग लगातार ध्यान बदलता रहता है, खतरे को आंकता है और तनाव वाली खबरों को समझता है। इसका असर यह होता है कि दिमाग का खतरा पहचानने वाला सिस्टम हमेशा एक्टिव रहता है और भावनाओं को प्रोसेस करना कभी पूरी तरह रुकता नहीं है, समय के साथ दिमाग जानकारी से ज्यादा भरा हुआ महसूस करता है। news और पढें: क्या आपको भी Gemini से लगातार चैट करने आदत है? Google ऐसे ही लोगों के लिए ला सकता है ये खास फीचर्स

Doomscrolling से दिमाग कैसा हो जाता है?

एक और जरूरी बात यह है कि दिमाग असली खतरे और डिजिटल खतरे में फर्क नहीं कर पाता। जब आप डरावनी या तनाव वाली खबर या Reels देखते हैं, तो दिमाग प्रतिक्रिया करता है जैसे खतरा सच में आपके पास है। दिमाग का एक हिस्सा, जिसे अमिगडाला कहते हैं, हॉर्मोन भेजता है जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ जाते हैं। इसका मतलब यह है कि शारीरिक रूप से आप सुरक्षित होते हैं, लेकिन आपका nervous system हमेशा सतर्क रहता है। news और पढें: YouTube ने लॉन्च किया Shorts Timer फीचर, अब घंटों स्क्रॉलिंग की आदत होगी खत्म

Doomscrolling कैसे असर डालता है Dopamine पर?

Doomscrolling हमारे दिमाग के खास सिस्टम यानी Dopamine को भी प्रभावित करता है। Dopamine एक केमिकल है जो हमें प्रेरित करता है और नए अनुभव की उम्मीद में उत्साहित करता है। जब हम स्क्रॉल करते हैं, तो हर नए पोस्ट, वीडियो या जानकारी में हमें कुछ नया देखने की उम्मीद होती है। इससे थोड़ा Dopamine रिलीज होता है और हम और स्क्रॉल करने के लिए प्रेरित होते हैं। समस्या यह है कि यह नया कंटेंट हमारे तनाव को कम नहीं करता। दिमाग राहत पाने की कोशिश करता रहता है, लेकिन असली समाधान नहीं मिलता।

Dopamine और Doomscrolling में क्या संबंध है?

ऐसी आदत हमारे दिमाग को हमेशा नई चीजें पाने के लिए सीखने पर मजबूर कर देती है। धीरे-धीरे दिमाग शांत रहने या बोरियत सहने में कमजोर हो जाता है, जब नई चीजें नहीं मिलतीं, तो हम बेचैन, खाली या चिड़चिड़े महसूस करते हैं। इसी वजह से हमें कुछ खाने, सोने या किसी चीज की बहुत इच्छा होती है, यह हमारी कमजोर इच्छा की वजह से नहीं होता, बल्कि दिमाग की आदत है, जो तुरंत संतुलन पाने की कोशिश करता है।

Cravings क्यों बढ़ जाती हैं?

जब लोग लंबे समय तक डूमस्क्रोलिंग करते हैं, तो उनका दिमाग बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है, भावनाओं में अस्थिरता आती है और डोपामाइन कम हो जाता है। दिमाग आराम या राहत पाने की कोशिश करता है। इससे cravings यानी किसी चीज की इच्छा बढ़ जाती है, हालांकि कभी-कभी यह चीज कंट्रोल से बाहर लगती है लेकिन जागरूक होने से इसे बदला जा सकता है।

क्या Doomscrolling की आदत को ठीक किया जा सकता है?

cravings सिर्फ सिग्नल हैं, मतलब आपकी कमजोरी नहीं। अगर Doomscrolling Cravings बढ़ाता है, तो इसका मतलब है कि आपका दिमाग बहुत एक्टिव है और आराम चाहता है। सही जानकारी और थोड़ी मदद से, आप खबरें पढ़ते हुए भी अपने दिमाग को थकाए बिना cravings को कंट्रोल कर सकते हैं।

FAQ

Doomscrolling क्या होता है?

Doomscrolling का मतलब है लगातार सोशल मीडिया या नेगेटिव खबरें पढ़ना। इस आदत में हम घंटों तक स्क्रॉल करते रहते हैं, जिससे दिमाग और शरीर दोनों थक जाते हैं।

Doomscrolling से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

Doomscrolling दिमाग को लगातार एक्टिव रखता है, इस वजह से दिमाग असली खतरे और डिजिटल खतरे में फर्क नहीं कर पाता। अमिगडाला नाम का दिमाग हिस्सा स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ा देता है, जिससे आप मानसिक और शारीरिक रूप से हमेशा सतर्क रहते हैं।

Dopamine और Doomscrolling का क्या संबंध है?

हर नया पोस्ट या वीडियो देखने पर दिमाग में Dopamine रिलीज होता है। यह हमें खुश और उत्साहित करता है और धीरे-धीरे दिमाग हमेशा नई चीजों के लिए निर्भर हो जाता है।

Add Techlusive as a Preferred SourceAddTechlusiveasaPreferredSource

Doomscrolling से cravings क्यों बढ़ती हैं?

जब दिमाग overstimulated हो जाता है और Dopamine कम हो जाता है, तो दिमाग आराम पाने के लिए Cravings बढ़ाता है। इसका मतलब यह नहीं कि आपकी इच्छा कमजोर है, बल्कि दिमाग तुरंत आराम पाने की कोशिश कर रहा है।

Doomscrolling की आदत को कैसे कम किया जा सकता है?

  • सोशल मीडिया टाइम लिमिट करें
  • नेगेटिव न्यूज सोशल मीडिया पर कम देखें
  • ब्रेक लें और ध्यान/योग करें