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Chandrayaan 3 के लैंडर और रोवर से कैसे कनेक्ट करता है ISRO? जानें क्या है यह टेक्नोलॉजी

Chandryaan 3 की लैंडिंग को आज लाइव देख पाएंगे। चंद्रयान 3 चांद की सतह पर पहुंचकर ISRO तक लैंडर और रोवर के जरिए वहां की जानकारी पहुंचाएगा।

Edited by Mona Dixit |Published: Aug 23, 2023, 10:28 AM (IST)

Highlights

  • Chandryaan 3 आज शाम 6:04 पर चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा।
  • इसकी लैंडिंग को लाइव ISRO के यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकेगा।
  • ISRO चंद्रयान 3 के लैंडर और रोवर से कनेक्ट करता है।

Chandrayaan 3 आज चंद्रमा पर उतरने वाला है। 23 अगस्त, 2023 भारत के लिए बहुत बड़ा दिन है। Chandrayaan 2 की विफलता के बाद अब सबकी नजरें इस बड़े चंद्रयान मिशन 3 पर टिकी हुई हैं। अगर चंद्रयान 3 सफलता पूर्वक चंद्रमा की सतह पर लैंड कर गया तो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बन जाएगा। news और पढें: Vikram-1: अंतरिक्ष में भारत के 'आगमन' की तैयारी पूरी, आज पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट होगा लॉन्च, रहें तैयार

Chandrayaan 3 landing को लाइव देखा जा सकेगा। ISRO की ऑफिशिय वेबसाइट, YouTube चैनल और फेसबुक पेज पर लैंडिंग की लाइव स्ट्रीमिंग होगी। इसके अलावा, DD National टीवी पर भी लैंडिंग देख पाएंगे। ISRO के मुताबिक, आज शाम 6:04 पर चंद्रयान-3 चंद्रमा पर लैंड कर जाएगा। news और पढें: ISRO ने Gaganyaan मिशन की 3 जरूरी टेस्टिंग की पूरी, जानिए कैसे सुरक्षित लौटेंगे भारतीय अंतरिक्ष यात्री

हालांकि, इसकी लैंडिंग टाली भी जा सकती है। अगर इसरो को लगेगा कि लैंडिंग में कोई दिक्कत है तो वह 27 अगस्त को होगी। यह फैसला लैंडिंग से 15-20 मिनट पहले लिया जाएगा। ये सब जानकार आपके मन में यह बात तो आ रही होगी कि ISRO धरती से 3.84 लाख किलोमीटर दूर चांद पर गए चंद्रयान से किस तरह लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और हम उसके द्वारा भेजे गए फोटो और वीडियो देख पा रहा है। आज हम इस आर्किटल में इसका पूरा प्रोसेस बताएंगे। आइये, जानें। news और पढें: दो बार फेल होने के बाद फिर उड़ान भरेगा PSLV, ISRO ने किया बड़ा ऐलान

Chandrayaan 3 की पूरी जानकारी

आज यानी 23 अगस्त को चंद्रयान 3 का लैंडर शाम 6:04 के आसपास चंद्रमा पर लैंड करेगा। बता दें कि लैंडर फुली ऑटोमैटिक है। इस कारण वह खुद पहले जगह खोजेगा फिर लैंड करेगा। इसमें थोड़ा समय लग सकता है। इस लैंडर का नाम Vikram Lander रखा गया है। ISRO के चीफ डॉ एस सोमनाथ ने बताया है कि जब विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा, तब वहां सुबह हो चुकी है।

विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे सूरज से उर्जा लेकर चंद्रमा पर एक दिन बिता सकते हैं। बता दें कि वहां का एक दिन 14 दिनों के बराबर है।

चंद्रयान लैंड करने के बाद विक्रम से प्रज्ञान रोवर बाहर निकलकर वहां की जानकारियां इकट्ठा करना शुरू कर देगा। यह लैंडर के आस-पास रहकर ही काम करेगा ताकि विक्रम लैंडर उससे संपर्क कर सके।

ISRO कैसे करता है कम्युनिकेट?

अब बात करते हैं कि इसरो विक्रम लैंडर से किस प्रकार संपर्क करता है? इसरो ने चंद्रयान 3 के साथ इस बार ऑर्बिटर नहीं भेजा है। उसकी जगह  प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module) भेजा गया है, जिसका उद्देश्य Chandrayaan 3 के लैंडर मॉड्यूल को चांद के पास पहुंचाना था। चंद्रयान-3 का लैंडर प्रोपल्शन मॉड्यूल और IDSN (Indian Deep Space Network) के जरिए इसरो से कॉन्टैक्ट करता है। IDSN बेंगलुरु में स्थित है, जहां से चंद्रयान-3 से संपर्क स्थापित किया जाता है।

वहीं, लैंडर मॉड्यूल की बात करें तो यह IDSN और रोवर दोनों से कम्युनिकेट करता है। 2019 में भेजे गए चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर अभी भी चंद्रमा की कक्षा में घूम रहा है। इसरो ने पिछले दिनों बताया है कि चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर से चंद्रयान 3 का लैंडर कनेक्ट हो गया है, जिसकी वजह से अब इसरो के पास लैंडर से कनेक्ट करने का एक अल्टर्नेटिव रास्ता भी मिल गया है।

वहीं, चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला प्रज्ञान रोवर केवल विक्रम लैंडर से कम्युनिकेट कर सकता है और वहां की जानकारियां धरती पर इसरो तक पहुंचा सकता है। इस तरह धरती बैठे-बैठे पर चंद्रयान 3 के जरिए चांद की जानकारी मिल रही है।

क्या है IDSN?

भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क यानी IDSN बड़े एंटेना और संचार सुविधा वाला नेटवर्क है, जो लंबी दूरी तक कम्युनिकेट करने में सक्षम है। इसके जरिए अंतरिक्षयान से कम्युनिकेशन स्थापित हो सकता है। हर अंतरिक्ष मिशन में ISRO IDSN की मदद से ही धरती से बाहर संपर्क स्थापित कर सकता है। बेंगलुरू स्तिथ इसके कमांड सेंटर में पर 31mm, 18mm और 11 मीटर के बड़े एंटीना लगे हैं, जो ग्रहों पर गए देश के अंतरितक्षयान से संपर्क स्थापित करके इसरो तक उसकी जानकारी पहुंचाते हैं।

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