Written By Ashutosh Ojha
Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Feb 17, 2026, 12:34 PM (IST)
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच भारत अब AI का सहारा लेकर आपदा प्रबंधन को बेहतर किया जा रहा है। इसी दिशा में 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में India-AI Impact Summit 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसे ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा वैश्विक AI सम्मेलन बताया जा रहा है। इस समिट का मुख्य फोकस तीन स्तंभों People, Planet और Progress पर है। सरकार और वैज्ञानिक संस्थान मिलकर AI की मदद से मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात की सटीक जानकारी, खेती से जुड़ी सलाह और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला रहे हैं। और पढें: India AI Impact Summit 2026: PM Modi ने AI पर दिया अपना MANAV Vision, कहा AI में भारत को भय नहीं भाग्य दिखता है
भारत में अब मौसम की जानकारी और आपदा से पहले चेतावनी देने के लिए AI का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। India Meteorological Department (IMD) ने चक्रवात (तूफान) की ताकत और दिशा को समझने के लिए एडवांस्ड ड्वोराक टेक्नोलॉजी जैसे AI से जुड़े टूल अपनाए हैं। इससे तूफान कितनी तेजी से बढ़ रहा है, यह जल्दी पता चल जाता है। Ministry of Earth Sciences ने 22 पेटाफ्लॉप्स क्षमता वाले बहुत तेज सुपरकंप्यूटर लगाए हैं। इन कंप्यूटरों का लगभग 10% हिस्सा खासतौर पर AI के काम के लिए रखा गया है। इससे तूफान का रास्ता और मानसून का अनुमान पहले से ज्यादा सही हो गया है। पुणे में स्थित Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) ने AI पर काम करने के लिए एक वर्चुअल सेंटर भी शुरू किया है। IMD, IIT, NIT, Indian Space Research Organisation (ISRO) और Defence Research and Development Organisation (DRDO) मिलकर रिसर्च और ट्रेनिंग को आगे बढ़ा रहे हैं। इन सब प्रयासों से देश में मौसम की भविष्यवाणी ज्यादा सटीक और भरोसेमंद हो रही है, जिससे लोगों को समय पर चेतावनी मिल सके। और पढें: 19 फरवरी को जनता के लिए बंद रहेगा AI Impact Summit 2026, डेट हुई एक्सटेंड
हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए भी AI आधारित सिस्टम लगाए गए हैं। हिमाचल प्रदेश में 60 से अधिक स्थानों पर स्वदेशी AI लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम काम कर रहा है, जो जमीन की हलचल को मिलीमीटर स्तर तक पहचान कर लगभग तीन घंटे पहले चेतावनी देता है। बाढ़ पूर्वानुमान के लिए इंडियन लैंड डेटा असिमिलेशन सिस्टम (ILDAS) को Indian Space Research Organisation (ISRO) का सहयोग मिला है। गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन में AI मॉडल नदी प्रबंधन को बेहतर बना रहे हैं। गांवों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लोकल फोरकास्टिंग शुरू की गई है। 2025 में शुरू हुआ भारत फोरकास्टिंग सिस्टम (BharatFS) 6 किलोमीटर रिजॉल्यूशन पर 10 दिन पहले तक बारिश का अनुमान दे सकता है, जिससे किसानों को बोआई और सिंचाई की सही योजना बनाने में मदद मिलती है। और पढें: India AI Impact Summit 2026: Qualcomm और Mihup.ai ने BFSI Sector के लिए पेश की On-Device Voice AI टेक्नोलॉजी
AI का यूज अब जंगलों और शहरों की सुरक्षा में भी हो रहा है। AI आधारित कैमरा सिस्टम जंगल की आग, अवैध कटाई और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर नजर रख रहे हैं। ड्रोन और सैटेलाइट नेटवर्क से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल रही है, शहरी इलाकों में वायु क्वालिटी निगरानी के लिए IIT कानपुर और IIT दिल्ली मिलकर AI सेंसर डेवलप कर रहे हैं। वहीं Indian Institute of Technology Kharagpur ने गंगा बेसिन में भूजल में आर्सेनिक की पहचान के लिए AI मॉडल तैयार किया है। भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और AI इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।