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Google की सिक्योरिटी में सेंध, Gmail वेरिफाइड ब्लू टिक के जरिए हो रही ठगी

Google के सिक्योरिटी सिस्टम में साइबर अपराधी सेंध लगा रहे हैं। साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि इसके जरिए ऑनलाइन ठग यूजर्स को टारगेट कर सकते हैं।

techlusive.in Written By article news

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Edited by |Published: Jun 03, 2023, 03:59 PM (IST)

Highlights

  • गूगल के सिक्योरिटी सिस्टम में सेंध लग गया है।
  • जीमेल के लिए लाए जाने वाले ब्लू टिक वेरिफिकेशन में खामी का पता चला है।
  • एक साइबर एक्सपर्ट ने इसे गूगल को रिपोर्ट भी किया है।

Google ने हाल ही में Gmail के लिए वेरिफाइड ब्लूट चेकमार्क फीचर रिलीज किया है। इस फीचर को लाने का मकसद ऑनलाइन ठगी करने वालों से यूजर्स को बचाना था। यह फीचर ब्लू टिक वेरिफाइड यूजर्स को लेजिटिमेट सेंडर के तौर पर पेश करता है। सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के इस सिक्योरिटी फीचर्स में ऑनलाइन ठगी करने वालों ने सेंध लगा दी है। साइबर अपराधी इन दिनों ब्लू टिक वेरिफाइड सेंडर बनके लोगों को फर्जी मेल भेज रहे हैं। news और पढें: Google Wallet को मिला Gmail का सपोर्ट, एक जगह मिलेगी ऑर्डर से जुड़ी पूरी जानकारी

क्या है नया सिस्टम?

गूगल ने Gmail के लिए यह फीचर खास तौर पर कंपनियों, ऑर्गेनाइजेशन यानी संस्थानों के लिए पेश किया था, ताकि वो ब्रांड इंडिकेटर्स फॉर मैसेज आइडेंटिफिकेशन (BIMI) का इस्तेमाल कर सके। साथ ही, डोमेन बेस्ड ऑथेंटिकेशन, रिपोर्टिंग एंड कंफर्मेंस (DMARC) का इस्तेमाल कर सके। news और पढें: Google के Gmail और Keep में आने वाला है बड़ा AI फीचर, अब टाइप नहीं बोलकर कर सकेंगे काम

गूगल का यह सिस्टम किसी भी बल्क में भेजे जाने वाले मैसेज को वेरिफाइड बनाकर रिसीवर के पास भेजता है। हालांकि, कंपनी को इसके लिए गूगल के नियमों का पालन करना पड़ता है, जिसके बाद उन्हें ब्लू टिक वेरिफिकेशन स्टेटस मिलता है। मैसेज प्राप्त करने वाले सेंडर को इसके बाद कंपनी या ऑर्गेनाइजेशन का लोगो भी मेल के साथ रिसीव होता है।

सिक्योरिटी सिस्टम में लगा रहे सेंध

हालांकि, गूगल के इस सिस्टम में कई साइबर क्रिमिनल सेंध लगा रहे हैं। एक साइबर एक्सपर्ट क्रिस प्लमर ने साइबर ठगों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीके का पता लगाया है। एक्सपर्ट ने ट्वीट करके बताया कि स्कैमर्स ने इसमें एक लूप-होल ढूंढ लिया है और यूजर्स को टारगेट कर रहे हैं। यूजर्स के लिए लेजिटिमेट और साइबर ठगों द्वारा किए जाने वाले ई-मेल में अंतर पता लगाना बेहद मुश्किल हो सकता है।

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साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने गूगल के सिस्टम में आई इस खामी को रिपोर्ट किया है। हालांकि, गूगल ने इसे फिक्स नहीं किया है, जिसपर एक्सपर्ट ने ट्विटर हैंडल पर अपना गु्स्सा दिखाया है और गूगल द्वारा किए जाने वाले आलस का जिक्र भी किया है।