Written By Ashutosh Ojha
Written By Ashutosh Ojha
Edited by Ashutosh Ojha |Published: Jul 13, 2026, 11:14 AM (IST)
OpenAI Anthropic
भारत सरकार ने मंत्रालयों को OpenAI और Anthropic जैसी विदेशी AI कंपनियों के साइबर सिक्योरिटी मॉडल को इस्तेमाल करने के लिए मना कर दिया है। हालांकि, इसे स्थायी प्रतिबंध नहीं माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के अंदर आने वाले एक विभाग ने सभी मेमोरेंडम भेजा। जिसमें कहा गया कि इस सब AI मॉडल्स को फिलहाल मंत्रालयों में यूज न किया जाए। सूत्रों के अनुसार, ओपनएआई और एंथ्रोपिक के प्रतिनिधियों ने हाल ही में कई मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात की थी। जहां उन्होंने ये प्रस्ताव दिया कि इन AI मॉडल्स को साइबर सिक्योरिटी और बाकी सरकारी कामों में इस्तेमाल किया जाए। लेकिन सरकार का कहना है कि पहले इन टेक्नोलॉजी की सुरक्षा जांच की जाएगी, फिर सरकारी जरूरतों के हिसाब से ही कोई फैसला लिया जाएगा।
इन AI कंपनियों के अलावा वित्त मंत्रालय ने भी एक प्रस्ताव भेजा था। जिसमें कहा गया था कि Agentic AI और OpenAI के GPT-5.5 मॉडल का इस्तेमाल सरकारी कामों में किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि इसकी मदद से कई सरकार के कई काम आसानी से हो सकते हैं। जेसै…
लेकिन MeitY ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। सरकार का कहना है कि AI को सरकारी कामों में अपनाने से पहले उसकी सुरक्षा और सभी संभावित जोखिमों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
लेकिन MeitY का मानना है कि अगर ये टेक्नोलॉजी गलत हाथों में चली जाए तो इसका इस्तेमाल सरकारी सिस्टम की खामी पता लगाने और साइबर हमलों हो सकते हैं। इसी वजह से इन्हें Dual-Use Technology माना जाता है। यानी ऐसी टेक्नोलॉजी जिसका इस्तेमाल अच्छे और गलत दोनों कामों के लिए हो सकता है।
सरकार का कहना है कि मंत्रालय और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में विदेशी AI मॉडल्स पर निर्भरता कम होनी चाहिए। इसलिए भारत अपने Sovereign AI पर तैजी से काम रहा है। आपको बता दें, मार्च 2024 में शुरू किए गए IndiaAI Mission के लिए करीब 10,372 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इस मिशन का मकसद खुद के AI बनाना, जरूरी कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार करना और डेटा सेंटर बनाना है। देश में Sarvam AI और BharatGen जैसे AI प्रोजेक्ट्स पर भी तैजी से काम हो रहा है।
भारत में AI सिस्टम की खरीद और इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। डेटा लोकलाइजेशन, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी डेटा की सुरक्षा से जुड़े नियम तो मौजूद हैं, लेकिन अभी AI मॉडल का डेटा कहां प्रोसेस होगा, कंपनी कितने समय तक लॉग सुरक्षित रखेगी और मॉडल का डेटा या वेट्स भारत से बाहर स्टोर होंगे या नहीं, इसका कोई सिस्टम नहीं है। इसलिए MeitY का यह फैसला यह संकेत देता है कि सरकार पहले AI के लिए मजबूत नियम और सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहती है। इसके बाद ही OpenAI, Anthropic या किसी बाकी विदेशी AI कंपनी के मॉडल्स को सरकारी साइबर सिक्योरिटी सिस्टम में इस्तेमाल करने का फैसला लिया जाएगा।