Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 10, 2026, 12:30 PM (IST)
AI AI cyber threat IMF AI warning
(AI Image)
दुनियाभर में AI को लेकर तेजी से चर्चा बढ़ रही है और अब इसकी ताकत को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं, हाल ही में International Monetary Fund (IMF) ने चेतावनी दी है कि एडवांस AI मॉडल ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। IMF ने खासतौर पर Anthropic के नए AI मॉडल Claude Mythos का जिक्र किया है, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली साइबर सिक्योरिटी AI मॉडल माना जा रहा है। IMF का कहना है कि अगर ऐसे AI सिस्टम गलत हाथों में चले गए, तो बैंकिंग, पेमेंट और दूसरे जरूरी नेटवर्क बड़े साइबर हमलों का शिकार हो सकते हैं। यही वजह है कि IMF ने सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील की है। और पढें: Anthropic का नया AI मॉडल लॉन्च, जानें क्या है Claude Opus 4.7 और क्यों है खास?
दरअसल, 7 अप्रैल 2026 को Anthropic ने Claude Mythos को पेश किया था। कंपनी के मुताबिक यह AI मॉडल साइबर सिक्योरिटी के मामले में इंसानों से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर है। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए लॉन्च नहीं किया। Anthropic का कहना था कि यह AI इतना एडवांस है कि इसका गलत इस्तेमाल इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। कंपनी के अनुसार Claude Mythos हजारों ऐसे साइबर सिक्योरिटी खामियों को खोज सकता है जिन्हें इंसानी एक्सपर्ट्स भी नहीं पकड़ पाए। यही वजह है कि इसे फिलहाल केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रखा गया है। और पढें: Claude Mythos: Anthropic ने नया AI मॉडल किया लॉन्च, जानें क्या है इसकी खासियत
IMF ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि इस तरह के AI मॉडल साइबर हमलों को बेहद आसान और तेज बना सकते हैं, पहले किसी सिस्टम की कमजोरी ढूंढने और उसे हैक करने में काफी समय और पैसा लगता था, लेकिन अब AI कुछ ही समय में यह काम कर सकता है। अगर किसी बैंक, पेमेंट सिस्टम या बड़े नेटवर्क में कोई कमी मिलती है, तो साइबर अपराधी उसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कई संस्थानों पर एक साथ हमला करने के लिए कर सकते हैं। IMF ने इसे ‘Correlated Failures’ का खतरा बताया है, यानी एक जैसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाली कई संस्थाएं एक साथ प्रभावित हो सकती हैं। और पढें: AI ने खुद पकड़ लिया कि उसका टेस्ट हो रहा है, Anthropic के Claude Opus 4.6 ने किया सबको हैरान
IMF का मानना है कि AI की वजह से साइबर अटैक अब ‘Machine Speed’ पर हो सकते हैं, यानी इंसानों के मुकाबले AI कहीं ज्यादा तेजी से कमजोरियों को खोजकर हमला कर सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसी सिस्टम को ठीक करने या सुरक्षा पैच लगाने से पहले ही हमलावर उसका फायदा उठा सकते हैं। IMF ने यह भी कहा कि आने वाले समय में मौजूदा साइबर सिक्योरिटी सिस्टम ऐसे एडवांस AI मॉडल्स के सामने कमजोर पड़ सकते हैं। इसका असर सिर्फ बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली, टेलीकॉम, पब्लिक सर्विस और दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी खतरे में आ सकते हैं।
इसी बीच दुनियाभर की सरकारें भी Claude Mythos को लेकर सतर्क हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Donald Trump की सरकार अमेरिका में एक खास AI ओवरसाइट कमेटी बनाने पर विचार कर रही है, जो शक्तिशाली AI मॉडल्स की निगरानी करेगी, वहीं भारत, यूरोपियन यूनियन और कनाडा जैसे देश भी Claude Mythos का एक्सेस पाना चाहते हैं ताकि अपने साइबर डिफेंस को मजबूत कर सकें, हालांकि माना जा रहा है कि अमेरिकी सरकार फिलहाल इस AI मॉडल की पूरी पहुंच दूसरे देशों को देने के पक्ष में नहीं है।
फिलहाल Claude Mythos को केवल लगभग 40 बड़ी कंपनियों तक सीमित रखा गया है। Amazon, Google और Apple जैसी कंपनियां Anthropic के ‘Project Glasswing’ का हिस्सा हैं और उन्हें इस AI मॉडल का खास एक्सेस मिला हुआ है। IMF का कहना है कि इससे कुछ कंपनियों को ज्यादा सुरक्षा और तेज पैच मिल रहे हैं, जबकि कई गैर-अमेरिकी बैंक और संस्थाएं पीछे छूट रही हैं। IMF ने साफ कहा है कि अगर दुनिया को AI-Based साइबर खतरों से बचाना है, तो सभी देशों को मिलकर काम करना होगा, जानकारी शेयर करनी होगी और AI का इस्तेमाल सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना होगा।
Anthropic का Claude Mythos एक एडवांस AI साइबर सिक्योरिटी मॉडल बताया जा रहा है। दावा है कि यह सिस्टम की खामियों को इंसानों से कहीं ज्यादा तेजी से खोज सकता है। इसी वजह से डर है कि गलत हाथों में जाने पर इसका इस्तेमाल बड़े साइबर हमलों के लिए हो सकता है।
IMF ने कहा है कि एडवांस AI मॉडल्स बैंकिंग, पेमेंट सिस्टम और जरूरी नेटवर्क्स के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। IMF के मुताबिक AI की मदद से साइबर हमले पहले से ज्यादा तेज और खतरनाक हो सकते हैं।
AI बहुत तेजी से सिस्टम की कमजोरियां ढूंढ सकता है। अगर हैकर्स को किसी बैंक या पेमेंट नेटवर्क में कमी मिल जाती है, तो वे एक साथ कई संस्थानों पर हमला कर सकते हैं। इससे बड़े स्तर पर डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल इसे आम यूजर्स के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मॉडल सिर्फ चुनिंदा बड़ी कंपनियों और पार्टनर्स तक सीमित रखा गया है ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके।
IMF का मानना है कि AI आधारित साइबर खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेंगे। इसलिए देशों को जानकारी शेयर करनी होगी, सिक्योरिटी सिस्टम मजबूत करने होंगे और AI का इस्तेमाल साइबर डिफेंस के लिए करना होगा, ताकि बड़े हमलों से बचा जा सके।