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फोटो असली है या AI? अब ऐसे चलेगा पता, ChatGPT और Gemini बताएगा तस्वीर का सच

आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है क्योंकि AI से बनी फोटो बिल्कुल असली जैसी दिखती हैं। अब लोग ChatGPT, Gemini और बाकी टूल्स की मदद से पता लगा सकते हैं कि तस्वीर असली है या AI से बनाई गई है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 24, 2026, 02:16 PM (IST)

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आजकल सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों पर भरोसा करना पहले जितना आसान नहीं रहा। AI की मदद से अब ऐसी तस्वीरें बनाई जा रही हैं जो देखने में बिल्कुल असली लगती हैं। कुछ महीने पहले तक AI से बनी फोटो को पहचानना आसान था क्योंकि उनमें चेहरों की बनावट अजीब दिखती थी या बैकग्राउंड में गड़बड़ी नजर आती थी, लेकिन अब नए AI टूल्स इतने एडवांस हो चुके हैं कि असली और नकली तस्वीर में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। यही वजह है कि लोग कई बार फेक फोटो को सच मानकर शेयर कर देते हैं।

AI फोटो में कौन-कौन सी गलतियां हो सकती हैं?

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली फर्जी सेलिब्रिटी फोटो, हादसों की नकली तस्वीरें और राजनीतिक पोस्टर तेजी से फैल रहे हैं। कई बार लोग बिना जांच किए इन्हें आगे भेज देते हैं। ऐसे में Google और OpenAI जैसी कंपनियां अब ऐसे टूल्स दे रही हैं जिनकी मदद से AI से बनी तस्वीरों की पहचान की जा सकती है, हालांकि AI इमेज अब काफी बेहतर हो गई हैं, लेकिन उनमें अभी भी कुछ गलतियां रह जाती हैं। तस्वीर को जूम करके देखने पर हाथ, उंगलियां, दांत, चश्मा, कान की बालियां या बैकग्राउंड में लिखा टेक्स्ट अजीब लग सकता है। कई बार बोर्ड पर लिखे शब्द समझ नहीं आते या भीड़ में लोगों के चेहरे एक जैसे दिखाई देते हैं। इसके अलावा लाइट और शैडो भी कई बार सही तरीके से मैच नहीं करते।

ChatGPT और Gemini कैसे बताते हैं कि फोटो असली है या नकली?

OpenAI ने अपनी तरफ से एक इमेज वेरिफिकेशन सिस्टम देना शुरू किया है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि कोई तस्वीर AI से बनाई गई है या एडिट की गई है। इसके लिए यूजर को अपने फोन या कंप्यूटर में ब्राउजर खोलकर OpenAI का इमेज वेरिफिकेशन टूल सर्च करना होगा। इसके बाद जिस फोटो की जांच करनी है उसे अपलोड करना होगा। सिस्टम उस तस्वीर को स्कैन करके उसमें मौजूद AI से जुड़े मुश्किल मार्कर और पहचान को चेक करता है। जांच पूरी होने के बाद यह बताया जाता है कि फोटो AI टूल्स से बनाई गई है या नहीं। इसी तरह Google Gemini भी अब SynthID टेक्नोलॉजी के जरिए AI इमेज पहचानने में मदद कर रहा है। यूजर Gemini ऐप में फोटो अपलोड करके पूछ सकते हैं कि तस्वीर AI से बनी है या नहीं।

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इस तरीके का भी कर सकते हैं इस्तेमाल?

इसके अलावा रिवर्स इमेज सर्च भी आज के समय में काफी काम का तरीका माना जाता है। किसी तस्वीर को सर्च इंजन पर अपलोड करके यह पता लगाया जा सकता है कि वह पहली बार कहां दिखाई दी थी। अगर एक ही फोटो अलग-अलग कहानियों के साथ वायरल हो रही हो या किसी भरोसेमंद न्यूज सोर्स पर मौजूद न हो, तो उसके फेक होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI कंटेंट और ज्यादा एडवांस होगा, इसलिए इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर वायरल तस्वीर पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी जांच करना बेहद जरूरी हो गया है।