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सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास बन सकते हैं विशाल ग्रह, वैज्ञानिकों की नई खोज ने चौंकाया

ब्रह्मांड में ग्रहों के बनने को लेकर वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली संभावना पेश की है। नए अध्ययन के अनुसार, सिर्फ तारों के आसपास ही नहीं बल्कि सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास भी विशाल ग्रह बन सकते हैं। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 18, 2026, 12:07 PM (IST)

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ब्रह्मांड में ग्रहों के बनने की प्रक्रिया को लेकर वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाली संभावना पेश की है। अब तक माना जाता था कि ग्रह आमतौर पर तारों के आसपास मौजूद गैस और धूल के बादलों से बनते हैं, लेकिन नए अध्ययन में दावा किया गया है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास भी विशाल ग्रह बन सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद बेहद चमकदार और Active Area, जिन्हें Active Galactic Nuclei (AGN) कहा जाता है, ग्रहों के बनने की जगह बन सकते हैं। ये क्षेत्र इतने चमकीले होते हैं कि कई बार अपनी पूरी आकाशगंगा के सभी तारों की रोशनी को भी पीछे छोड़ देते हैं। ब्लैक होल के आसपास मौजूद गैस और धूल के बीच होने वाला घर्षण इतनी ज्याजा एनर्जी पैदा करता है कि पूरा इलाका तेज रोशनी से चमकने लगता है। news और पढें: अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं बड़े-बड़े ब्लैक होल? वैज्ञानिकों ने खोला नया रहस्य

AGN क्या होता है और इसमें ग्रह कैसे बन सकते हैं?

वैज्ञानिकों के मुताबिक AGN तब बनते हैं जब किसी सुपरमैसिव ब्लैक होल के चारों ओर बड़ी मात्रा में गैस और धूल जमा हो जाती है। यह पदार्थ एक चपटी डिस्क के रूप में ब्लैक होल के चारों ओर घूमता रहता है और धीरे-धीरे उसका हिस्सा ब्लैक होल में समा जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में एनर्जी निकलती है, जिससे AGN बेहद चमकीले दिखाई देते हैं। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि इन क्षेत्रों का वातावरण बहुत अशांत और उथल-पुथल भरा होता है, इसलिए यहां ग्रह बनना लगभग असंभव है, लेकिन नई रिसर्च से संकेत मिले हैं कि AGN डिस्क के बाहरी हिस्सों में तापमान और परिस्थितियां ग्रहों के निर्माण के लिए अनुकूल हो सकती हैं।

ये नए ग्रह कितने बड़े और अलग हो सकते हैं?

अध्ययन के मुताबिक, ब्लैक होल के आसपास बनने वाले ग्रह आम ग्रहों से काफी अलग हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के Researcher Bhupendra Mishra के अनुसार, इनमें से कुछ ग्रह आकार और वजन में बृहस्पति ग्रह (Jupiter Planet) जितने बड़े या उससे भी बड़े हो सकते हैं। ये ज्यादातर गैस से बने विशाल ग्रह होंगे, इनका तापमान काफी ज्यादा होने की वजह से ये किसी आग के गोले या पिघले हुए लावे जैसी दुनिया की तरह दिखाई दे सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि एक Active Galactic Nuclei (AGN) के आसपास लाखों से लेकर करोड़ों तक ग्रह बन सकते हैं। अगर भविष्य में यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो ग्रहों के बनने की हमारी मौजूदा समझ पूरी तरह बदल सकती है।

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वैज्ञानिक इन छिपे हुए ग्रहों को कैसे खोजेंगे?

हालांकि इन ग्रहों को सीधे देख पाना आसान नहीं होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन्हें खोजने के लिए ग्रैविटेशनल लेंसिंग नाम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस टेक्नोलॉजी में किसी बहुत भारी चीज, जैसे ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण उसके पीछे से आने वाली रोशनी को मोड़ देता है। इससे ऐसी चीजों का पता लगाने में मदद मिलती है जो सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देतीं। Researcher Bhupendra Mishra का कहना है कि इन ग्रहों को ढूंढ़ना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। इसके लिए और ज्यादा रिसर्च और बेहतर टेक्नोलॉजी की जरूरत होगी। अगर भविष्य में ऐसे ग्रहों के सबूत मिल जाते हैं, तो इससे ब्लैक होल और ग्रहों के बनने से जुड़े कई बड़े रहस्यों को समझने में मदद मिल सकती है।