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धरती से 8 अरब Light Years दूर अंतरिक्ष में मिला एक खास सिग्नल, वैज्ञानिकों की खुली रह गई आंखें!

धरती से करीब 8 अरब Light Years दूर वैज्ञानिकों ने एक बेहद ताकतवर माइक्रोवेव सिग्नल खोजा है, जिसे ‘Gigamaser’ नाम दिया गया है। यह खोज इतनी खास है कि वैज्ञानिक भी हैरान रह गए, माना जा रहा है कि यह सिग्नल दो विशाल आकाशगंगाओं की टक्कर से बना और ब्रह्मांड के पुराने रहस्यों को समझने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं...

Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 12, 2026, 05:50 PM (IST)

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वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक ऐसी चीज खोजी है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है, उन्होंने धरती से करीब 8 अरब Light Years दूर एक बहुत ही तेज और ताकतवर माइक्रोवेव सिग्नल खोजा है। इसे ‘Maser’ कहा जाता है, जो लेजर की तरह काम करता है। यह अब तक मिला सबसे दूर और सबसे ताकतवर Maser माना जा रहा है। इसकी रोशनी इतनी ज्यादा तेज है कि वैज्ञानिकों को इसके लिए ‘Gigamaser’ नाम की नई कैटेगरी बनानी पड़ी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिग्नल एक सामान्य तारे से करीब 1 लाख गुना ज्यादा चमकदार है। यह खोज दक्षिण अफ्रीका के शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप MeerKAT Radio Telescope की मदद से हुई। news और पढें: अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं बड़े-बड़े ब्लैक होल? वैज्ञानिकों ने खोला नया रहस्य

‘Gigamaser’ क्या होता है और यह कैसे बनता है?

असल में ‘Maser’ एक खास तरह का लेजर होता है, लेकिन यह रोशनी की जगह रेडियो तरंगें छोड़ता है। इन तरंगों को इंसानी आंखों से देखा नहीं जा सकता। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे खास Maser तब बनते हैं जब अंतरिक्ष में दो बहुत बड़ी आकाशगंगाएं आपस में टकराती हैं। टक्कर के दौरान गैसें बहुत ज्यादा दब जाती हैं और कुछ खास Molecule बेहद एक्टिव हो जाते हैं। इसके बाद वे बहुत ताकतवर रेडियो सिग्नल अंतरिक्ष में भेजते हैं। यह नया ‘Gigamaser’ HATLAS J142935.3–002836 नाम की गैलेक्सी में मिला है, जहां दो बड़ी आकाशगंगाएं जोरदार तरीके से टकरा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में हमारी Milky Way गैलेक्सी भी दूसरी गैलेक्सी से टकरा सकती है, लेकिन उसका असर इतना खतरनाक नहीं होगा।

Gigamaser discovery

किस्मत ने इस रिकॉर्ड तोड़ स्पेस लेजर की खोज में कैसे मदद की?

इस खोज की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें किस्मत का भी बड़ा हाथ रहा। इतनी दूर से आने वाले इस कमजोर सिग्नल को पकड़ना लगभग नामुमकिन था, लेकिन पृथ्वी और उस गैलेक्सी के बीच एक दूसरी गैलेक्सी बिल्कुल सही जगह पर आ गई। उस गैलेक्सी की बहुत ज्यादा गुरुत्वाकर्षण शक्ति ने स्पेस को मोड़ दिया, जिससे यह सिग्नल पहले से कई गुना ज्यादा ताकतवर दिखाई देने लगा। इसे ‘Gravitational Lensing’ कहा जाता है। इसी वजह से यह कमजोर सिग्नल दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT Radio Telescope तक पहुंच सका। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह खास कॉस्मिक संयोग नहीं होता, तो शायद यह रिकॉर्ड तोड़ ‘स्पेस लेजर’ कभी दिखाई ही नहीं देता, सबसे दिलचस्प बात यह है कि हम इस सिग्नल को आज वैसे देख रहे हैं जैसा यह अरबों साल पहले था, जब पृथ्वी भी मौजूद नहीं थी।

यह खोज ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के बारे में क्या बता सकती है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज हमें ब्रह्मांड को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है। दक्षिण अफ्रीका का MeerKAT Radio Telescope दुनिया के सबसे ताकतवर रेडियो टेलीस्कोप में से एक है। यह हर घंटे बहुत बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा करता है। इस डेटा को समझने के लिए वैज्ञानिक तेज कंप्यूटर और खास सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे कई और ‘Gigamaser’ खोजे जा सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे मेसर अक्सर वहां बनते हैं जहां दो आकाशगंगाएं टकराती हैं। इस टक्कर से नए तारों का बनना तेज हो जाता है और बड़े ब्लैक होल भी ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। इन खोजों से वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि अरबों साल पहले आकाशगंगाएं कैसे बनीं और समय के साथ उनमें क्या बदलाव आए।

FAQ

‘Gigamaser’ आखिर क्या होता है?

‘Gigamaser’ एक बेहद ताकतवर माइक्रोवेव सिग्नल होता है, जो लेजर की तरह काम करता है लेकिन रोशनी की जगह रेडियो तरंगें छोड़ता है। यह सामान्य Maser से कई गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।

यह खास सिग्नल कितनी दूर मिला है?

वैज्ञानिकों को यह सिग्नल धरती से करीब 8 अरब Light Years दूर मिला है, जो अब तक खोजे गए सबसे दूर और ताकतवर Maser में से एक माना जा रहा है।

यह Gigamaser कैसे बना?

वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिग्नल दो विशाल आकाशगंगाओं की टक्कर के दौरान बना। टक्कर से गैसें दब गईं और कुछ खास Molecule बहुत ज्यादा एक्टिव होकर ताकतवर रेडियो तरंगें छोड़ने लगे।

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इस खोज से वैज्ञानिकों को क्या फायदा होगा?

इस खोज से वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि अरबों साल पहले आकाशगंगाएं कैसे बनीं, ब्लैक होल कैसे एक्टिव हुए और ब्रह्मांड समय के साथ कैसे बदलता गया।