Written By Ashutosh Ojha
Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jul 08, 2026, 12:56 PM (IST)
Meta's new Muse Image AI tool: Why users are worried about Instagram photos
Meta ने Muse Image लॉन्च किया है। ये एक AI इमेज जनरेटर है। अभी ये फीचर Meta AI ऐप, इंस्टाग्राम स्टोरी और व्हाट्सएप पर मुफ्त मिलेगा। इसकी मदद से यूजर्स टेक्स्ट से इमेज बनाना और अलग-अलग AI इफेक्ट्स से साथ फोटो भी एडिट कर सकेंगे। कंपनी ने कहा कि इस टूल को क्रिएटिव कामों के लिए बनाया गया है, लेकिर इसका एक फीचर विवादों में आ गया है। लोगों का मानना है कि इससे उनकी प्राइवेसी पर असर पड़ेगा। और पढें: Meta AI ऐप में आया नया Vibes फीचर, आसानी से बना पाएंगे AI वीडियो
Muse Image के फोटो टैगिंग फीचर की मदद से आप किसी भी पब्लिक इंस्टाग्राम अकाउंट में जाकर फोटो का AI से बदल सकते है और नई इमेज बना सकते है। इसी वजह से ये फीचर विवादों में आ गाय है। यूजर्स ने इसे प्राइवेसी को लेकर खतरा बताया है। अगर कोई दूसरा व्यक्ति आपकी फोटो से AI इमेज बनाता है, तो इसकी कोई नोटिफिकेशन आपको नहीं मिलेगा। लोग बोल रहे है कि किसी की बिना अनुमति के फोटो से छेड़छाड़ करना या उसे बदलना सही नहीं है और लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। Meta ने इसको लेकर कहा कि यूजर्स के पास इस फीचर को बंद करने का विकल्प होगा। यानी इसके लिए खुद अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स बदलनी होगी। और पढें: Meta लाया एडवांस फीचर्स वाला AI ऐप, मिलेगी ChatGPT को जोरदार टक्कर
Muse Image की बाकी AI इमेज जनरेटर के जैसा ही हैं… और पढें: Meta AI में Voice Chat सपोर्ट लॉन्च, आपके पसंदीदा सेलेब्रिटी की आवाज में मिलेगा सवाल का जवाब
Muse Image बिजनेस और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी काफी काम का है। इससे कंपनियां AI के जरिए विज्ञापन बना सकती हैं। अगर आपको कोई चीज खरीदनी है तो इस फीचर की मदद से आप देख सकते हो कि वो आपके घर में कैसा लगेगा। इसके अलावा, इंस्टाग्राम स्टोरी के लिए नए AI फिल्टर भी मिलेंगे। आपको बता दें ये फीचर्स अभी बिल्कुल फ्री है, लेकिन एक दिन में ज्यादा यूज कर लिया तो सब्सक्रिप्शन लेना होगा।
Meta के फीचर्स पहले भी विवादों मे रह चुके हैं। साल 2019 Cambridge Analytica मामले में कंपनी पर 5 अरब डॉलर का जुर्माना लगा था क्योंकि यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल किया गाय था। इसके बाद 2021 में लोगों की बायोमेट्रिक जानकारी इकट्ठा करने के आरोप लगा था, जिसकी वजह से कंपनी ने अपना फेस रिकॉग्निशन सिस्टम भी बंद कर दिया था।