Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 21, 2026, 11:38 AM (IST)
Bank double OTP system
गुरुग्राम और फरीदाबाद में वरिष्ठ नागरिकों के बैंक खातों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक नई सुरक्षा व्यवस्था शुरू की गई है। HDFC Bank ने ‘Double OTP System’ लागू किया है, जिसमें पैसे ट्रांसफर करने के लिए सिर्फ एक नहीं बल्कि दो OTP की जरूरत होगी, पहला OTP खाताधारक के मोबाइल पर आएगा और दूसरा OTP उसके द्वारा चुने गए किसी विश्वसनीय व्यक्ति या परिवार के सदस्य के मोबाइल पर जाएगा। दोनों की पुष्टि के बाद ही ट्रांजेक्शन पूरा होगा, नहीं तो पैसा ट्रांसफर नहीं होगा।
इस सिस्टम में बैंकिंग ट्रांजेक्शन को एक अतिरिक्त सुरक्षा परत दी गई है। सामान्य स्थिति में केवल एक OTP से लेन-देन पूरा हो जाता है, लेकिन अब वरिष्ठ नागरिकों के लिए दूसरा OTP उनके ‘Trusted Contact’ को भी भेजा जाएगा। इसका मतलब है कि अगर कोई साइबर अपराधी किसी बुजुर्ग को डराकर या भ्रमित करके OTP ले भी ले, तब भी बिना दूसरे OTP के ट्रांजेक्शन पूरा नहीं होगा। यह व्यवस्था पूरी तरह वैकल्पिक (voluntary) है और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए बनाई गई है ताकि वे साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रह सकें।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम खासकर ‘Digital Arrest’ जैसे फ्रॉड से बचाव में बहुत मददगार हो सकता है। इस तरह के घोटालों में अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे में दूसरा OTP एक सुरक्षा दीवार की तरह काम करेगा, जिससे लेन-देन में एक रुकावट आएगी। Haryana Police की SP Upasana ने भी बताया कि यह पहल वरिष्ठ नागरिकों को मानसिक दबाव और धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक जरूरी कदम है।
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक अहम पहल — “डबल OTP प्रणाली”।
अब बैंकिंग ट्रांजैक्शन के दौरान खाताधारक के साथ-साथ उनके Trusted Contact/परिवारजन के मोबाइल पर भी Authentication OTP भेजा जाएगा। दोनों OTP की पुष्टि के बाद ही राशि ट्रांसफर होगी।
यह सुविधा 60 वर्ष से अधिक आयु के… pic.twitter.com/YqIyfgNWAo
— Haryana Police (@police_haryana) May 19, 2026
रिपोर्ट्स के अनुसार इस योजना पर अप्रैल 2026 से काम शुरू किया गया था और अब इसे गुरुग्राम और पंचकूला की कई शाखाओं में लागू किया जा रहा है। Haryana Police के अधिकारियों का मानना है कि यह सिस्टम धीरे-धीरे और शहरों में भी लागू किया जा सकता है। बैंक और पुलिस मिलकर इसे तकनीकी रूप से और मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं। इससे वरिष्ठ नागरिकों का बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा और साइबर अपराधों में कमी आने की उम्मीद है।