Published By: Harshit Harsh | Published: May 01, 2023, 06:16 PM (IST)
Apple यूजर्स के लिए साइबर अपराधियों ने एक नया मेलवेयर यानी वायरस तैयार किया है। यह वायरस macOS से यूजर्स की जरूरी जानकारियां इकट्ठा कर लेता है। साइबर अपराधी इस वायरस को Telegram पर खुलेआम बेच रहे हैं। इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर मौजूद एक चैनल पर बेचे जाने वाला यह वायरस macOS इस्तेमाल को टारगेट करेगा और यूजर के सिस्टम में मौजूद Autofill जानकारियां जैसे कि पासवर्ड, वॉलेट आदि का डेटा कलेक्ट करेगा। और पढें: क्या iPhone 15 और iPhone 16 जैसे पुराने आईफोन हो जाएंगे महंगे ? जानिए यहां
साइबर रिसर्च फर्म CRIL (Cyber Research and Intelligence Labs) की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी Apple डिवाइसेज के लिए macOS Stealer (AMOS) नाम का मेलवेयर बेच रहे हैं। यह मेलवेयर यूजर के एप्पल सिस्टम से निजी जानकारियां, जैसे कि पासवर्ड, वॉलेट आदि को चुरा रहे हैं। साइबर रिसर्चर्स ने बताया कि हैकर्स एक टेलीग्राम चैनल के माध्यम इस वायरस को बेच रहे हैं। यही नहीं, इस वायरस को हैकर्स अपग्रेड भी कर रहे हैं ताकि यह यूजर्स को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सके। और पढें: iPhone यूजर्स के लिए खुशखबरी, Apple टेस्ट कर रहा 200MP कैमरा सेंसर, लीक में हुआ खुलासा
इस वायरस के लेटेस्ट अपडेटेड वर्जन को 25 अप्रैल को किए गए एक टेलीग्राम पोस्ट में देखा गया है, जिसमें इसके फीचर्स को हाईलाइट किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, Atomic macOS Stealer यूजर्स के मशीन से कई तरह की जानकारियां प्राप्त कर सकता है। इनमें की-चेन पासवर्ड, कंप्लीट सिस्टम इंफॉर्मेशन, डेस्कटॉप के डॉक्यूमेंट फोल्डर्स की फाइल्स और macOS का पासवर्ड शामिल है। यह एटमिक मेलवेयर कई वेब ब्राउजर्स को टारगेट कर सकता है और ऑटो-फिल, पासवर्ड, कूकीज, वॉलेट और क्रेडिट कार्ड की जानकारियां भी चुरा सकता है। और पढें: iOS 26.4 Update हुआ रिलीज, अब iPhone में मिलेंगे ये जबरदस्त फीचर्स
साइबर रिसर्चर फर्म का दावा है कि AMOS क्रिप्टो वॉलेट जैसे कि इसेक्ट्रम, बिनांस, एक्सोडस, एटमिक और कॉइनोमी को भी टारगेट कर सकता है। यही नहीं, यह यूजर को कई तरह की सर्विसेज भी ऑफर कर सकता है। हैकर्स इस खतरनाक वायरस को टेलीग्राम पर 1,000 डॉलर यानी करीब 82,000 रुपये प्रति महीने पर बेच रहे हैं। साइबर फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स द्वारा बनाया गया यह AMOS वायरस सिस्टम में .dmg फाइल को इंस्टॉल कर देता है और जानकारियां चुराने लगता है।
इस मेलवेयर को इंस्टॉल करने के बाद हैकर्स इसे यूजर पासवर्ड के जरिए ऑथेंटिकेट कर देता है। इस फाइल के इंस्टॉल होने के बाद यूजर्स के सिस्टम से सेंसेटिव जानकारियां इकट्ठा होनी शुरू हो जाती है और रिमोट सर्वर पर भेजे जानी लगती है।