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Sanchar Saathi App: सरकार ने वापस लिया फोन में ऐप के अनिवार्य होने का फैसला, जानें वजह

Sanchar Saathi ऐप फोन में अनिवार्य करने वाला फैसला अब भारत सरकार ने वापस ले लिया है। 24 घंटे में इस ऐप के डाउनलोड में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। यहां जानें डिटेल्स।

Published By: Manisha | Published: Dec 03, 2025, 07:44 PM (IST)

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Sanchar Saathi ऐप को सभी मोबाइल फोन में प्री-इंस्टॉल अनिवार्य करने के बाद से ही सरकार विवादों में घिरी हुई थी। वहीं, अब सरकार ने इस संबंध में यूटर्न ले लिया है। आज 3 दिसंबर को भारत सरकार ने फैसला बदलते हुए कहा कि अब संचार साथी ऐप को मोबाइल फोन में प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं होगा। आपको बता दें, 1 दिसंबर को Department of Telecommunications (DoT) ने सभी स्मार्टफोन कंपनियों को निर्देश दिए थे कि अब से नए मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। इसके लिए सरकार ने सभी कंपनियों को 90 दिन का वक्त दिया था। यहां जानें डिटेल्स। news और पढें: आपके नाम पर कितने SIM हैं एक्टिव? 1 मिनट में कर लें चेक

आज 3 दिसंबर बुधवार को सरकार ने अपने ही फैसले पर यूटर्न ले लिया। नया अपडेट जारी करते हुए कहा गया कि अब फोन में Sanchar Saathi ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं होगा। news और पढें: सेकंड हैंड मोबाइल लेते वक्त भूलकर भी न करें ये गलती, बस 2 मिनट में जानें फोन चोरी का है या नहीं


अपडेट में लिखा गया है कि इस नए नियम को लाने का उद्देश्य भारतीय नागरिकों को साइबर सिक्योरिटी प्रोवाइड करना है। सरकार ने इस ऐप को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है और इस ऐप के जरिए साइबर वर्ल्ड में मौजूद धोखेबाजों से नागरिकों की मदद करता है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए न केवल नागरिक धोखेबाजों को रिपोर्ट कर सकते हैं बल्कि खुद का बचाव भी उनसे कर सकते हैं।

इसी अपडेट के जरिए सरकार ने बताया कि अब तक 1.4 करोड़ लोग इस ऐप को अपने फोन में डाउनलोड कर चुके हैं। 24 घंटे के अंदर इस ऐप को 6 लाख लोगों ने डाउनलोड किया, जो कि इसके इस्तेमाल में 10 गुना बढ़ोतरी साबित हुई है। इस उपलब्धि के बाद सरकार ने फोन में ऐप के प्री-इंस्टॉल होने के आदेश की जरूरत को खत्म कर दिया है।

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क्या था आदेश?

Department of Telecommunications (DoT) ने 1 दिसंबर को सभी स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि वह अब से अपने सभी नए फोन में Sanchar Saathi ऐप को प्री-इंस्टॉल करेंगे। इसके लिए सरकार ने कंपनियों को 90 दिन का वक्त दिया था। हालांकि, सरकार के इस तरह के आदेश पर विपक्ष ने हमला बोल दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह के ऐप को फोन में अनिवार्य करके सरकार जनता की जासूसी करने की कोशिश में है। इस तरह के आरोपों पर सरकार ने अपना पक्ष रखा और ऐप को पूरी तरह से सुरक्षित बताया। साथ ही कहा कि ऐप को फोन में रखना पूरा यूजर पर निर्भर करता है। अगर वो नहीं चाहते कि संचार साथी ऐप उनके फोन में रहे, तो वो ऐप को डिलीट भी कर सकते हैं।