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वैज्ञानिकों ने सुलझाया ब्रह्मांड का बड़ा रहस्य, आखिर क्यों खत्म हो गईं शुरुआती समय की बड़ी-बड़ी Galaxies?

ब्रह्मांड के शुरुआती दौर की कई विशाल आकाशगंगाएं बहुत जल्दी Inactive क्यों हो गईं, यह लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य था। अब वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 14, 2026, 12:11 PM (IST)

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Astronomers ने ब्रह्मांड के शुरुआती समय से जुड़े एक बड़े रहस्य का जवाब खोजने का दावा किया है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह जानना चाहते थे कि बिग बैंग के बाद बनी कुछ विशाल आकाशगंगाएं इतनी जल्दी Inactive क्यों हो गईं। आमतौर पर शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं में बड़ी संख्या में नए तारे बनने चाहिए थे, लेकिन कई बड़ी आकाशगंगाओं में यह प्रक्रिया दो अरब साल से भी कम समय में लगभग रुक गई। अब वैज्ञानिकों को लगता है कि उन्हें इसकी वजह मिल गई है। James Webb Space Telescope (JWST) और Atacama Large Millimeter/submillimeter Array (ALMA) की मदद से रिसर्चर्स ने एक बेहद शक्तिशाली गैसीय हवा का पता लगाया है, जिसे ‘Galaxy Killer Wind’ कहा जा रहा है। यह आकाशगंगा के भीतर मौजूद गैस को बाहर निकाल देती है और नए तारों के बनने की प्रक्रिया को रोक देती है। news और पढें: NASA के James Webb Space Telescope ने खोजा 10 अरब प्रकाश वर्ष दूर छिपा Black Hole, वैज्ञानिक भी हैरान!

CRISTAL-02 में वैज्ञानिकों ने कौन-सी बड़ी खोज की?

यह रिसर्च 10 जून को Monthly Notices of the Royal Astronomical Society जर्नल में प्रकाशित हुआ है। Swinburne University of Technology की वैज्ञानिक रेबेका डेविस और उनकी टीम ने CRISTAL-02 नाम की एक Milky Way System का अध्ययन किया। यह सिस्टम हमें उस समय की दिखाई देती है जब बिग बैंग के सिर्फ 1.1 अरब साल ही बीते थे। दरअसल, यह दो आकाशगंगाओं के आपस में टकराकर एक बनने की प्रक्रिया में है। JWST और ALMA से मिले डेटा के एनालिसिस में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस आकाशगंगा से ठंडी गैस का एक बहुत बड़ा बादल तेजी से बाहर निकल रहा है। यह गैस करीब 640 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बाहर जा रही है, जो वहां नए तारों के बनने की गति से लगभग दोगुनी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर गैस इसी तरह बाहर निकलती रही, तो नए तारे बनाने के लिए जरूरी ईंधन 10 करोड़ साल से भी कम समय में खत्म हो सकता है। इसके बाद आकाशगंगा में नए तारों का बनना लगभग रुक जाएगा। news और पढें: क्या Uranus के बाहरी रिंग्स में छिपे हैं रहस्यमयी चंद्रमा? वैज्ञानिकों ने किया ये बड़ा दावा

आकाशगंगा से गैस बाहर निकालने के लिए कौन जिम्मेदार है?

रिसर्च में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि इस तेज गैसीय हवा के पीछे कोई विशाल ब्लैक होल नहीं, बल्कि सुपरनोवा विस्फोट हैं। सुपरनोवा तब होता है जब किसी बड़े तारे का जीवन खत्म होने पर उसमें जोरदार विस्फोट होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब दो आकाशगंगाएं आपस में टकराती हैं तो वहां बहुत तेजी से नए तारे बनने लगते हैं। CRISTAL-02 में भी सामान्य से लगभग तीन गुना ज्यादा तेजी से तारे बन रहे थे। इन नए बने बड़े तारों के जीवन के अंत में हुए शक्तिशाली सुपरनोवा विस्फोटों ने इतनी एनर्जी पैदा की कि उन्होंने आकाशगंगा के अंदर मौजूद गैस को बाहर धकेलना शुरू कर दिया। यही गैस नए तारों के बनने के लिए जरूरी होती है। जब गैस कम होने लगती है, तो नए तारे बनना भी रुक जाता है और धीरे-धीरे पूरी आकाशगंगा Inactive हो जाती है।

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क्या यही प्रक्रिया इन सब का कारण बनी?

वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में ऐसी घटनाएं काफी आम रही होंगी। रिसर्च के मुताबिक उस समय मौजूद लगभग आधी बड़ी आकाशगंगाएं किसी न किसी दूसरी आकाशगंगा के साथ टकराने या विलय होने की प्रक्रिया से गुजर रही थीं। अगर ऐसी तेज गैसीय हवाएं दूसरी आकाशगंगाओं में भी मौजूद थीं, तो यही वजह हो सकती है कि कई विशाल आकाशगंगाओं में नए तारे बहुत जल्दी बनना बंद हो गए और वे समय से पहले Inactive हो गईं। यह खोज वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगी कि आकाशगंगाएं समय के साथ कैसे डेवलप होती हैं और शुरुआती ब्रह्मांड में तारे बनने और खत्म होने की प्रक्रिया कैसे काम करती थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में JWST और ALMA जैसे शक्तिशाली टेलीस्कोप की मदद से ऐसे और उदाहरण खोजे जा सकते हैं। इससे ब्रह्मांड के शुरुआती इतिहास और उसके विकास को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।