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13 अरब प्रकाश वर्ष दूर ब्रह्मांड में मिली खास चीज, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा

ब्रह्मांड की शुरुआत के सिर्फ 70 करोड़ साल बाद मौजूद एक दूर की आकाशगंगा में वैज्ञानिकों ने तारों को बनाने वाली गैस का विशाल भंडार खोजा है। यह आकाशगंगा पृथ्वी से करीब 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर है। इस खोज से शुरुआती ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के तेजी से बनने के रहस्य समझने में मदद मिलेगी। आइए जानते हैं...

Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 15, 2026, 01:02 PM (IST)

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ब्रह्मांड की शुरुआत के केवल 70 करोड़ साल बाद मौजूद एक बेहद दूर की आकाशगंगा में वैज्ञानिकों ने तारों के निर्माण के लिए जरूरी गैस का विशाल भंडार खोजा है। इस आकाशगंगा का नाम REBELS-25 है और यह पृथ्वी से करीब 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज यह समझने में मदद करेगी कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में आकाशगंगाएं इतनी तेजी से कैसे डेवलप हुईं। अब तक इतनी दूर स्थित आकाशगंगाओं में इस तरह की गैस का केवल अनुमान लगाया जाता था, लेकिन पहली बार इसे सीधे तौर पर देखा गया है।

वैज्ञानिकों ने यह खोज कैसे की?

यह अध्ययन जर्नल Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च का नेतृत्व नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी की Astronomer Karin Öberg ने किया। उनकी टीम ने अमेरिका के NSF Very Large Array (VLA) और चिली स्थित ALMA Observatory का इस्तेमाल करते हुए लगभग 40 घंटे तक REBELS-25 से आने वाले बेहद कमजोर संकेतों की खोज की। वैज्ञानिकों ने Carbon Monoxide Gas के CO(3-2) सिग्नल का पता लगाया, जो अब तक की सबसे दूर स्थित और सबसे पुराने समय की ऐसी खोज मानी जा रही है। इन आंकड़ों के आधार पर रिसर्चर्स ने अनुमान लगाया कि इस आकाशगंगा में लगभग 100 अरब सूर्यों के बराबर Molecular gas मौजूद है।

95% गैस होने का क्या मतलब है?

रिसर्च के अनुसार REBELS-25 का लगभग 95% Mass अभी भी गैस के रूप में मौजूद है। इसका मतलब है कि उस समय यह आकाशगंगा नए तारों के निर्माण के लिए भरपूर ईंधन से भरी हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही वजह हो सकती है कि शुरुआती ब्रह्मांड की कुछ आकाशगंगाएं बहुत कम समय में तेजी से डेवलप हो गईं। यह खोज इस धारणा को मजबूत करती है कि कई नई आकाशगंगाएं अपने शुरुआती दौर में ही विशाल गैस भंडार के साथ मौजूद थीं और लगातार नए तारों का निर्माण कर रही थीं।

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यह खोज विज्ञान के लिए क्यों खास है?

हालांकि इतनी दूर स्थित गैस का पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसकी वजह Cosmic Microwave Background (CMB) है, जो बिग बैंग के बाद बची हुई Radiation है और दूर की गैस के संकेतों को कमजोर कर देती है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक इन संकेतों को रिकॉर्ड किया। आने वाले वर्षों में प्रस्तावित Next-Generation Very Large Array (ngVLA) टेलीस्कोप इस तरह की खोजों को और आसान बनाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में वे ब्रह्मांड की शुरुआती आकाशगंगाओं का और विस्तार से अध्ययन कर पाएंगे और यह जान सकेंगे कि उन्होंने इतनी तेज गति से डेवलप कैसे किया।