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सौर मंडल से जुड़े सबसे बड़े राज का हुआ खुलासा, वैज्ञानिकों की इन नई रिचर्स ने सबको चौंकाया!

सौर मंडल की शुरुआत को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। नई रिसर्च के मुताबिक, Jupiter ग्रह के बाहर मौजूद धूल और गैस की विशाल रिंग कभी ‘Planet Factory’ की तरह काम करती थी। यहीं से छोटे अंतरिक्षीय पिंड बने, जिन्होंने बाद में ग्रहों और Asteroids की नींव रखी। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 27, 2026, 11:43 AM (IST)

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वैज्ञानिकों ने Solar System की शुरुआत से जुड़ा एक बड़ा रहस्य समझने का दावा किया है। जर्मनी के Max Planck Institute for Solar System Research के वैज्ञानिकों के मुताबिक, Jupiter ग्रह के बाहर धूल और गैस की एक बहुत बड़ी रिंग मौजूद थी, जो अरबों साल पहले ‘Planet Factory’ की तरह काम कर रही थी। इसी जगह पर छोटे-छोटे अंतरिक्षीय पत्थर बने, जिन्हें प्लैनेटेसिमल्स कहा जाता है, बाद में यही पत्थर मिलकर ग्रहों और Asteroids की नींव बने। वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 4.6 अरब साल पहले जब Solar System बन रहा था, तब युवा सूर्य के चारों ओर गैस और धूल का एक विशाल घेरा फैला हुआ था। इस घेरे में मौजूद छोटे कण आपस में टकराते रहे और धीरे-धीरे बड़े होते गए। समय के साथ यही कण ग्रहों में बदलने लगे। नई स्टडी के अनुसार, ग्रह बनने की यह प्रक्रिया पूरे सौर मंडल में एक जैसी नहीं थी। अलग-अलग जगहों पर हालात अलग थे, इसलिए कहीं ग्रह तेजी से बने तो कहीं उनकी बनावट अलग तरीके से हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बृहस्पति के बाहर वाला इलाका ग्रह बनाने के लिए सबसे खास और एक्टिव जगहों में से एक था। news और पढें: ब्लैक होल के अंदर क्या होता है? नई रिसर्च में बड़ा दावा

कैसे बना Jupiter के पास धूल और गैस का विशाल ‘Dust Trap’?

शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से पता लगाया कि Jupiter ग्रह के बाहर मौजूद यह ‘Dust Trap’ लाखों सालों तक नए-नए अंतरिक्षीय पिंड बनाता रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब Jupiter ने अपने आसपास की ज्यादातर गैस और धूल को अपनी ओर खींच लिया, तब उसके बाहर एक बहुत घना और दबाव वाला इलाका बन गया। इस इलाके में बड़ी मात्रा में धूल जमा होने लगी। धीरे-धीरे छोटे-छोटे कण, जो कंकड़ जैसे दिखते थे, आपस में जुड़कर बड़े पत्थरों और पिंडों में बदलने लगे। बाद में यही पिंड ग्रहों और क्षुद्रग्रहों की नींव बने। रिसर्च टीम की प्रमुख Joanna Drążkowska ने बताया कि एक ही जगह पर अलग-अलग समय में अलग तरह के प्लैनेटेसिमल्स बने। यही वजह हो सकती है कि आज Solar System में Planets, Meteorites और Asteroids एक-दूसरे से इतने अलग दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ‘Planet Factory’ करीब 20 लाख साल तक लगातार काम करती रही और इस दौरान अंतरिक्ष में नए-नए पिंड बनते रहे। news और पढें: SpaceX का Dragon Capsule पहुंचा ISS, साथ ले गया 6,500 पाउंड जरूरी सामान

Meteorites में कैसे छिपे हैं सौर मंडल के जन्म के पुराने राज?

इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के उल्कापिंडों का अध्ययन किया, जिन्हें ‘Carbonaceous Chondrite’ कहा जाता है। इन उल्कापिंडों में कार्बन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये सौर मंडल की शुरुआत के समय से लगभग वैसे ही बचे हुए हैं और इनमें ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। पृथ्वी पर मिलने वाले ये उल्कापिंड वैज्ञानिकों के लिए किसी ‘Time Capsule’ की तरह हैं क्योंकि इनके जरिए सौर मंडल के पुराने समय की जानकारी मिलती है। लैब में जांच करने पर पता चला कि इनकी उम्र और बनावट उसी इलाके से मिलती है, जिसे वैज्ञानिकों ने अपने कंप्यूटर सिमुलेशन में खोजा था। कुछ उल्कापिंड बहुत नरम और धूल जैसी चीजों से बने, जबकि कुछ में बड़े और मजबूत कण पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत पहले, जब सौर मंडल बन रहा था, तब अंतरिक्ष में दो तरह की चीजें थीं। एक बिल्कुल बारीक धूल जैसी थी, जबकि दूसरी सख्त और मजबूत टुकड़ों जैसी थी, जो बहुत ज्यादा गर्म जगहों पर बनी थीं। समय के साथ ये छोटी-छोटी चीजें आपस में चिपकती गईं और धीरे-धीरे बड़ी होती गईं, बाद में इन्हीं से ग्रह, उल्कापिंड और अंतरिक्ष के दूसरे बड़े-बड़े पिंड बन गए। news और पढें: एलियन खोजने की आई नई टेक्नोलॉजी, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा दावा

क्या इस खोज से अब ग्रहों के बनने की पूरी कहानी समझ आएगी?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज सिर्फ Meteorites के बनने की कहानी नहीं बताती, बल्कि इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि पूरा सौर मंडल कैसे बना था। रिसर्च टीम ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से बहुत छोटे धूल के कणों की टक्कर से लेकर अंतरिक्ष में गैस और धूल की बड़ी हलचल तक सबकुछ समझने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने देखा कि Jupiter बड़े और भारी कणों को अपनी तरफ रोक लेता था, जबकि छोटे और हल्के धूल के कण आगे निकल जाते थे। धीरे-धीरे अंतरिक्ष में इन कणों की मात्रा बदलती गई और अलग-अलग समय पर नए-नए अंतरिक्षीय पिंड बनने लगे। बाद में इन्हीं से ग्रह, Meteorites और दूसरे बड़े पिंड बने। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे होने वाली नई रिसर्च से यह भी पता चल सकेगा कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह आखिर कैसे बने थे। यह खोज इस बात का मजबूत सबूत भी देती है कि धूल से भरे ऐसे इलाके ही अंतरिक्ष में ग्रह बनाने की सबसे बड़ी फैक्ट्रियां थे।

FAQ

आखिर वैज्ञानिकों ने सौर मंडल को लेकर क्या नई खोज की है?

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि Jupiter ग्रह के बाहर धूल और गैस की एक विशाल रिंग मौजूद थी, जो अरबों साल पहले ‘Planet Factory’ की तरह काम करती थी। इसी जगह छोटे-छोटे अंतरिक्षीय पिंड बने, जिनसे बाद में Planets और Asteroids तैयार हुए।

‘Dust Trap’ क्या होता है?

‘Dust Trap’ अंतरिक्ष का ऐसा इलाका होता है जहां धूल और गैस बड़ी मात्रा में जमा हो जाती है। Jupiter के आसपास बने इस क्षेत्र में छोटे कण आपस में जुड़ते गए और धीरे-धीरे बड़े पत्थरों व प्लैनेटेसिमल्स में बदल गए।

Carbonaceous Chondrite उल्कापिंड इतने खास क्यों हैं?

ये उल्कापिंड सौर मंडल के शुरुआती समय के सबसे पुराने अवशेष माने जाते हैं। इनमें करोड़ों साल पुरानी जानकारी सुरक्षित है, इसलिए वैज्ञानिक इन्हें ‘Time Capsule’ की तरह इस्तेमाल करते हैं।

क्या Jupiter ने ग्रह बनने की प्रक्रिया को प्रभावित किया था?

वैज्ञानिकों के अनुसार Jupiter ने अपने Gravity से बड़े और भारी कणों को रोक लिया, जबकि हल्के कण आगे बढ़ते रहे। इसी वजह से अलग-अलग जगहों पर अलग तरह के ग्रह और अंतरिक्षीय पिंड बने।

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इस रिसर्च से भविष्य में क्या फायदा होगा?

इस खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह आखिर कैसे बने थे। साथ ही इससे पूरे Solar System की शुरुआती कहानी को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।