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PM मोदी ने 3300 करोड़ रुपये से बनी सेमीकंडक्टर यूनिट का किया उद्घाटन, अब भारत बनेगा सेमीकंडक्टर का हब

Narendra Modi ने गुजरात में 3300 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर यूनिट का उद्घाटन किया, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस प्लांट से चिप मैन्युफैक्चरिंग बेहतर होगी, रोजगार बढ़ेगा और भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। आइए जानते हैं...

Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Mar 31, 2026, 05:31 PM (IST)

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Narendra Modi ने 31 मार्च को गुजरात में एक बड़ी उपलब्धि की शुरुआत करते हुए Kaynes Semicon की 3300 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर यूनिट का उद्घाटन किया। यह प्लांट Sanand GIDC में स्थित है और भारत के लिए चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस फैसिलिटी के शुरू होने से भारत अब सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत दुनिया के लिए चिप सप्लायर बनेगा और ‘Make in India, Make for the World’ का लक्ष्य और मजबूत होगा। news और पढें: PM Modi का इंस्टाग्राम पर जलवा, ट्रंप-पुतिन को पीछे छोड़ बने सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वाले नेता

इस प्लांट में क्या काम होगा और IPM क्या होते हैं?

यह नया प्लांट OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly And Test) फैसिलिटी है, जहां चिप्स की असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग का काम किया जाएगा, हालांकि इसमें वेफर मैन्युफैक्चरिंग नहीं होता, लेकिन यह सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का बेहद जरूरी हिस्सा है। इस यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, जिसमें सबसे पहले Intelligent Power Modules (IPMs) बनाए जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, इंडस्ट्रियल मशीनों और एनर्जी बचाने वाले इक्विपमेंट में होता है। यह मॉड्यूल कई चिप्स को एक साथ जोड़कर बेहतर परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी देगा। news और पढें: AI Summit 2026 Day 3 LIVE Updates: दिल्ली में PM Modi से मिले Google के CEO सुंदर पिचाई

India Semiconductor Mission के तहत इस प्लांट की क्या अहमियत है?

यह यूनिट India Semiconductor Mission के तहत डेवलप की गई है और देश की दूसरी ऑपरेशनल सेमीकंडक्टर फैसिलिटी बन गई है। इससे पहले Micron Technology ने भी भारत में अपनी यूनिट शुरू की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस प्लांट के जरिए सैनंद और सिलिकॉन वैली के बीच एक नई कड़ी जुड़ी है और यहां बनने वाले प्रोडक्ट्स का बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट के लिए पहले से बुक हो चुका है। इससे भारत की ग्लोबल मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। news और पढें: India AI Impact Summit 2026: दिल्ली में PM Modi से मिले Google के CEO सुंदर पिचाई

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इस प्रोजेक्ट से भारत को क्या फायदे मिलेंगे और आगे का लक्ष्य क्या है?

पूरी क्षमता पर काम करने के बाद यह प्लांट रोजाना करीब 63 लाख यूनिट प्रोडक्शन करने में सक्षम होगा, जिससे घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मांग भी पूरी की जा सकेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत की सेमीकंडक्टर इंपोर्ट पर निर्भरता कम करेगा और देश में वैल्यू एडिशन बढ़ाएगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 400 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट और 103 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर बाजार बनाना है और ऐसे प्रोजेक्ट्स इस दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे।