Edited By: Harshit Harsh | Published By: Harshit Harsh | Published: Jun 01, 2023, 09:31 PM (IST)
Meta ने धमकी दी है कि वो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook से सभी न्यूज कॉन्टेंट को हटा देगा। मेटा की यह धमकी अमेरिकी राज्य कैलिफॉर्निया द्वारा लाए जाने वाले एक कानून के विरोध में है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज पब्लिश करने के लिए न्यूज पब्लिकेशन को भुगतान करना होगा। कैलिफॉर्निया ने इस नियम को कैलिफॉर्निया जर्नलिज्म प्रिजर्वेशन एक्ट का नाम दिया है। और पढें: Meta का बड़ा फैसला, 8000 लोगों की नौकरियों पर खतरा, जानें क्या है वजह
इस बिुल मुताबिक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को न्यूज पब्लिशर्स को जर्नलिज्म यूसेज फी का भुगतान करना होगा। इस बिल का मकसद लोकल न्यूज सेक्टर को बढ़ावा देना है। इस बिल के विरोध में Facebook की पैरेंट कंपनी Meta ने कहा कि वो अपने प्लेटफॉर्म से कैलिफॉर्निया के सभी न्यूज कॉन्टेंट को हटा देगा। और पढें: Threads लेकर आया खास Live Chats फीचर, ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर कर सकेंगे चर्चा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनी राज्य सरकार द्वारा कानून पारित होने पर यह सख्त कदम उठा सकती है। Meta के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इस पेमेंट स्ट्रक्चर को स्लश फंड बताया है। साथ ही, यह भी कहा है कि यह बिल बड़ी मीडिया कंपनियों को शुरुआत में फायदा पहुंचाएगा। यह बिल पहला कैलिफॉर्निया स्पेसिफिक बिल है। हालांकि, कंपनी को अमेरिका से बाहर भी इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। और पढें: WhatsApp जल्द ला सकता है ये कमाल का फीचर, स्पैम मैसेज से मिलेगा छुटकारा
Meta statement on the California Journalism Preservation Act. pic.twitter.com/ssgk1vSryB
— Andy Stone (@andymstone) May 31, 2023
पिछले साल दिसंबर 2022 में एंडी स्टोन ने कहा था कि अगर अमेरिकी कांग्रेस यह बिल पास करती है तो वो अपने प्लेटफॉर्म से न्यूज को हटा देगा। मेटा ने इससे पहले अन्य देशों में भी अपने प्लेटफॉर्म से न्यूज कंटेंट रीमूव किया है। अमेरिका के साथ-साथ मेटा ने कनाडा में भी धमकी दी है कि वो अपने प्लेटफॉर्म से न्यूज कॉन्टेंट हटा लेगा।
कनाडा की सरकार भी इस तरह का कानून लाने की तैयारी में है। वहीं, Alphabet की कंपनी Google ने भी कहा है वो कनाडा में सर्च रिजल्ट से न्यूज आर्टिकल के लिंक को हटा लेगा। अमेरिका से पहले ऑस्ट्रेलिया में भी साल 2021 में इस तरह का कानून पास किया गया था, जिसके बाद फेसबुक और गूगल ने वहां अपनी सर्विसेज को सीमित कर दी थी।