Written By Manisha
Google Doodle Today: गूगल अक्सर अहम दिनों को अपने डूडल के जरिए और भी खास बनाने का काम करता है। आज रविवार 15 जनवरी को भी गूगल ने एक खास डूडल बनाकर पूर्व भारतीय स्पोर्ट्समेट K. D. Jadhav (खशाबा दादासाहेब जाधव) को श्रद्धांजलि दी। आज के.डी जाधव की 97वीं जयंती है, इस खास मौके पर गूगल ने के.डी जाधव को समर्पित क्रिएटिव डूडल बनाया है। और पढें: Valentine's Day पर Google ने बनाया स्पेशल Doodle, दुनिया को दिया प्यार का संदेश
आज (15 जनवरी 2023) सुबह जैसे ही आप कुछ सर्च करने के लिए Google ओपन करेंगे, तो आपको गूगल का खास Doodle देखने को मिलेगा। जैसे कि हमने बताया आज का डूडल पूर्व भारतीय स्पोर्ट्समेट K. D. Jadhav (खशाबा दादासाहेब जाधव) को समर्पित है। और पढें: New Year 2026: Google ने नए साल की खुशी में बनाया स्पेशल रंग-बिरंगा डूडल
इस डूडल में उनकी दो छवि देखी जा सकती है। एक में वह मैदान में कुश्ती करते देखे जा सकते हैं, तो दूसरी छवि में वह इंडियन जर्सी पहने हुए दिख रहे हैं। जैसे ही आप इस डूडल पर क्लिक करें, तो आपको के.डी जाधव से जुड़ी सभी जानकारी के लिंक्स अगली विंडो पर पढ़ने को मिल जाएंगे। और पढें: Google 27th Birthday: गूगल आज मना रहा 27वां जन्मदिन, खास अवसर पर बनाया Nostalgic डूडल
खशाबा दादासाहेब जाधव भारत के स्वतंत्रता के बाद ओलंपिक में इंडिविजुअल मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट थे। उनका जन्म 15 जनवरी 1926 को महाराष्ट्र के गोलेश्वर गांव में हुआ। उनके पिता खुद एक पहलवान थे। केडी जाधव की यूं तो बचपन से पहलवानी में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, उन्हें स्विमिंग काफी पसंद थी। लेकिन पहलवान के बेटे होने के नाते उन्होंने 10 साल की उम्र से कुश्ती भी सीखनी शुरू कर दी थी।
भारत के नाम कांस्य पदक जीतने के बाद उनका अगला कदम गोल्ड मेडल था, जिसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी। लेकिन ओलंपिक मैच से पहले एक दुर्घटना के दौरान वह चोटिल हो गए और उनका घुटना टूट गया। इस घटना ने उनकी ओलंपिक की दौड़ पर विराम लगा दिया और उनका स्पोर्ट्स करियर पूरी तरह से खत्म हो गया। पहलवानी में जी-जान लगाने के बाद उन्होंने भले ही भारत के नाम पहला इंडिविजुअल मेडल किया हो, लेकिन उन्हें कभी पद्म पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया।
स्पोर्ट्स करियर खत्म होने के बाद उन्हें पुलिस में सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिली और फिर उन्होंने असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर पद पर भी संभाला। साल 1984 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।