Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 09, 2026, 01:32 PM (IST)
Atlantic Cold Blob Explained
दुनियाभर में तापमान लगातार बढ़ रहा है, महासागर गर्म हो रहे हैं और गर्मी के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं लेकिन इस बीच वैज्ञानिकों ने अटलांटिक महासागर में एक अजीब बदलाव देखा है। ग्रीनलैंड और आइसलैंड के दक्षिण में उत्तरी अटलांटिक महासागर का एक बड़ा हिस्सा पिछले कई सालों से ठंडा होता जा रहा है। वैज्ञानिक इस इलाके को ‘Cold Blob’ या ‘Warming hole’ कहते हैं। तापमान के नक्शों में जहां दुनिया का ज्यादातर हिस्सा लाल यानी गर्म दिखाई देता है, वहीं यह क्षेत्र नीले यानी ठंडे रंग में नजर आता है। लंबे समय तक वैज्ञानिक यह समझ नहीं पाए कि यह सिर्फ मौसम का सामान्य उतार-चढ़ाव है या किसी बड़े बदलाव का संकेत। अब नई रिसर्च बताती है कि यह पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में हो रहे गंभीर बदलाव की चेतावनी हो सकता है।
हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च ‘Geophysical Research Letters’ के मुताबिक, इस ठंडे इलाके के पीछे AMOC (Atlantic Meridional Overturning Circulation) नाम की एक बड़ी समुद्री धारा का कमजोर होना वजह हो सकता है। इसे समुद्र का एक विशाल कन्वेयर बेल्ट माना जाता है, जो गर्म और खारे पानी को भूमध्य रेखा के पास के इलाकों से उत्तरी अटलांटिक तक पहुंचाती है। वहां पहुंचकर यह पानी ठंडा और भारी हो जाता है, फिर समुद्र की गहराई में डूबकर वापस दक्षिण की ओर लौटता है। यह प्रक्रिया यूरोप के कई देशों को सामान्य से ज्यादा गर्म बनाए रखने में मदद करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह धारा कमजोर होती है, तो उत्तरी अटलांटिक तक कम गर्म पानी पहुंचेगा। इससे वहां का तापमान घट सकता है और ‘Cold Blob’ जैसा ठंडा क्षेत्र बनने लगता है।
इस नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सिर्फ कंप्यूटर मॉडल पर भरोसा नहीं किया, बल्कि समुद्र से जुड़े वास्तविक आंकड़ों का भी अध्ययन किया। शोध में पता चला कि इस इलाके का ठंडा होना मुख्य रूप से महासागर के अंदर हो रहे बदलावों की वजह से है, न कि वायुमंडल द्वारा ज्यादा गर्मी खींच लेने के कारण। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रीनलैंड की तेजी से पिघल रही बर्फ भी इस समस्या को बढ़ा रही है। बर्फ पिघलने से बड़ी मात्रा में मीठा पानी उत्तरी अटलांटिक महासागर में पहुंच रहा है, जिससे समुद्री पानी कम खारा और हल्का हो जाता है। इससे पानी के नीचे डूबने की नेचुरल प्रक्रिया कमजोर पड़ती है और AMOC की रफ्तार धीमी हो सकती है। विशेषज्ञों को चिंता है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो AMOC एक ऐसे मोड़ (टिपिंग पॉइंट) पर पहुंच सकता है, जहां इसके काम करने के तरीके में अचानक और लंबे समय तक रहने वाला बड़ा बदलाव आ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AMOC बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती है या लगभग रुक जाती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है। इससे कई Tropical Countries में बारिश का पैटर्न बदल सकता है, मानसून कमजोर या अनियमित हो सकता है और अमेरिका के पूर्वी तट पर समुद्र का स्तर बढ़ सकता है। इसका असर समुद्री जीवों, मछली उद्योग और खेती पर भी पड़ सकता है। वहीं उत्तरी यूरोप के कुछ हिस्से ठंडे हो सकते हैं, जबकि दुनिया के बाकी इलाके लगातार गर्म होते रहेंगे। वैज्ञानिक अभी यह नहीं बता सकते कि यह खतरा कब गंभीर रूप लेगा, लेकिन ज्यादातर शोध मानते हैं कि AMOC पहले की तुलना में कमजोर हो रही है। इसी वजह से अटलांटिक महासागर का रहस्यमयी ‘Cold Blob’ जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा चेतावनी संकेत माना जा रहा है।
Cold Blob उत्तरी अटलांटिक महासागर का एक ऐसा हिस्सा है, जो दुनिया के बाकी महासागरों के गर्म होने के बावजूद ठंडा हो रहा है। यह क्षेत्र ग्रीनलैंड और आइसलैंड के दक्षिण में स्थित है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह AMOC (Atlantic Meridional Overturning Circulation) नाम की समुद्री धारा का कमजोर होना है। इसके कारण इस क्षेत्र तक कम गर्म पानी पहुंच रहा है।
ग्रीनलैंड की बर्फ पिघलने से बड़ी मात्रा में मीठा पानी समुद्र में मिल रहा है। इससे समुद्री पानी की खारापन और घनत्व कम हो जाएगा, जिससे AMOC की गति धीमी पड़ सकती है।
इससे दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और मौसम का पैटर्न बदल सकता है। मानसून प्रभावित हो सकता है, समुद्र का स्तर बढ़ सकता है और समुद्री जीवन व खेती पर भी असर पड़ सकता है।