Written By Ajay Verma
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Edited by Ajay Verma |Published: Jun 26, 2026, 10:22 AM (IST)
Apple iPad MacBook Price Hike: अमेरिकन कंपनी एप्पल ने ग्राहकों को बड़ा झटका देते हुए अपने सबसे पॉपुलर आईपैड और मैकबुक की कीमत में बढ़ोतरी की है। अब इन प्रोडक्ट्स को खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इस प्राइस हाइक के पीछे की वजह मेमोरी और स्टोरेज की बढ़ती कीमतों को माना गया है। आइए जानते हैं डिवाइस की नई कीमत के बारे में विस्तार से… और पढें: Apple ने फिर यूजर्स को दिया झटका, एक-साथ 2 सर्विस हुई महंगी... अब देने होंगे इतने रुपये
एप्पल के अनुसार, MacBook Air 13 इंच (M5) को 1,19,900 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया था, लेकिन अब प्राइस हाइक के बाद यह 1,49,900 रुपये में अवेलेबल है। MacBook Air 15 इंच के दाम में भी 35000 रुपये का इजाफा किया गया है। यह अब 1,44,900 रुपये की जगह 1,79,900 रुपये में मिलेगा। और पढें: Mac और iPad के बाद अब Apple Music और Apple One भी हुए महंगे, जानें भारत में कितनी बढ़ी कीमतें
MacBook Pro की बात करें, तो इस लैपटॉप की कीमत को 70,000 रुपये तक बढ़ाया जा गया है। यह अब 1,69,900 रुपये की बजाय 2,39,900 रुपये में मिलेगा। वहीं, MacBook Neo की कीमत 69,900 रुपये से बढ़कर 79,900 रुपये हो गई है। और पढें: आपके iPhone में छिपे ये 5 कमाल के फीचर्स, आज ही करें ट्राई
प्राइस हाइक के बाद iPad Air का 11 इंच वाला मॉडल 64,900 रुपये की जगह 89,900 रुपये में मिल रहा है। इसकी कीमत में 25000 रुपये की बढ़ोतरी आई है। iPad Pro की कीमत भी 1,39,900 रुपये हो गई है। इसे 99,990 रुपये में लॉन्च किया गया था।
मैकबुक और आईपैड की नई कीमतें ऑफिशियल वेबसाइट और स्टोर पर अपडेट हो चुकी हैं। अब ग्राहकों को इन डिवाइस को खरीदने के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। आपको बता दें कि आईफोन मेकर एप्पल पिछली दो तिमाही से मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों का सामना कर रहा था। हालांकि, अब प्रोडक्ट्स के दाम को बढ़ा दिया गया है।
मैकबुक और आईपैड की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर टिम कुक का कहना है कि यह बढ़ोतरी 100 साल में एक बार आने वाली बाढ़ की तरह है। उन्होंने बताया कि पिछले 40 साल में उन्होंने पार्ट्स की कीमत में इस तरह का उछाल नहीं देखा।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो इस वक्त कंपनियां एआई डेटा सेंटर बनाने के लिए कंपोनेंट तैयार कर रही हैं। इस कारण कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइस के लिए चिप प्रोवाइड नहीं कर पा रही हैं, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई है। इस कारण चिप्स की कीमत बढ़ी है।