Written By Ashutosh Ojha
Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jan 12, 2026, 11:47 AM (IST)
ISRO ने बताया कि उसका PSLV-C62 मिशन रॉकेट के तीसरे स्टेज (PS3) के अंत में कुछ तकनीकी दिक्कत का सामना कर रहा था। ISRO के प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि मिशन तीसरे स्टेज तक ठीक चला, लेकिन आखिरी समय में रॉकेट में कुछ अजीब एक्टिविटी दिखीं, जिससे इसका पाथ थोड़ा बदल गया, उन्होंने बताया कि टीम अब इस डेटा की जांच कर रही है और जल्द ही सही जानकारी शेयर करेगी, यह ISRO का 2026 में पहला मिशन था। और पढें: ISRO लॉन्च करेगा Anvesha सैटेलाइट, बनेगा भारत की तीसरी आंख, आसमान से होगी जासूसी
PSLV-C62 Mission के साथ EOS-N1 Satellites और 14 Co-passenger Satellites लॉन्च किए गए थे। EOS-N1 एक खास तरह की पृथ्वी देखने वाली Satellites है, जिसे जमीन की निगरानी और रणनीतिक जांच के लिए बनाया गया है। मिशन में कुछ छोटे भारतीय और विदेशी Satellites भी थे, जो अलग-अलग टेक्नोलॉजी का टेस्ट कर रहे थे। इनमें AI Processing, Communication System, IoT Service, Radiation Measurement और खेती से जुड़ा डेटा इकट्ठा करना शामिल था, साथ ही इसमें KID Re-Entry Capsule भी था, जिसे स्पेनिश स्टार्टअप के साथ मिलकर बनाया गया। इसका काम था नियंत्रित तरीके से पृथ्वी पर लौटने की टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग करना। इसे दक्षिण प्रशांत महासागर में गिराया जाना था।
The PSLV-C62 mission encountered an anomaly during end of the PS3 stage. A detailed analysis has been initiated.
— ISRO (@isro) January 12, 2026
इस मिशन में Bengaluru की स्टार्टअप OrbitAID Aerospace का बनाया हुआ AayulSAT भी था। यह भारत का पहला ऐसा Satellite है जो अंतरिक्ष में सैटेलाइट रिफ्यूलिंग यानी ईंधन भरने की टेस्टिंग करता है, इसका मकसद अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स के काम को आसान बनाना है। मिशन में इसके अलावा CubeSat और छोटे सैटेलाइट भी थे, जिन्हें विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स ने बनाया था। ये Satellite Communication, IoT और पृथ्वी देखने जैसे कामों के लिए यूज किए जाते हैं और नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग में मदद करते हैं।
PSLV-C62 मिशन, PSLV-C61 मिशन की विफलता के बाद लॉन्च किया गया था। मई 2025 में PSLV-C61 मिशन में तीसरे स्टेज में तकनीकी दिक्कत के कारण EOS-09 सैटेलाइट सही कक्षा में नहीं पहुंच पाया था। ISRO ने उस मिशन की पूरी जांच की थी और सुधार किए थे। PSLV-C62 मिशन 44.4 मीटर लंबा था और इसे Satish Dhawan Space Centre, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया। यह PSLV का 64th Missiom और PSLV-DL वैरिएंट का 5th Mission था। ISRO अब इस मिशन का डेटा ध्यान से देख रही है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोका जा सके।