comscore

ISRO लॉन्च करेगा Anvesha सैटेलाइट, बनेगा भारत की तीसरी आंख, आसमान से होगी जासूसी

ISRO कल 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 के जरिए Anvesha सैटेलाइट को लॉन्च करने वाला है। यह एक ताकतवर सैटेलाइट है, जिसे भारत की तीसरी आंख कहा जा रहा है। यहां जानें क्यों?

Published By: Manisha | Published: Jan 11, 2026, 01:50 PM (IST)

  • whatsapp
  • twitter
  • facebook
  • whatsapp
  • twitter
  • facebook

ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) सोमवार 12 जनवरी 2026 को एक बार फिर आसमान में इतिहास रचने को तैयार है। सोमवार यानी कल इसरो अपनी सबसे ताकतवर सैटेलाइट की लॉन्चिंग करने वाला है, जिसका नाम अन्वेषा (Anvesha) है। इस सैटेलाइट को PSLV-C62 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। कहा जा रहा है कि यह सैटेलाइट आसमान में भारत की तीसरी आंख के तौर पर काम करने वाला है। खास बात यह है कि यह सैटेलाइट ऊपर से वो सब देख सकती है, जो एक आम इंसानी आंखों से देखना नामुमकिन है। दरअसल, यह Hyperspectral remote sensing (HRS) है, जो कि एक समान्य सैटेलाइट फोटो को हाई-टेक स्कैनर के तौर पर बदल देता है। news और पढें: तूफान आने से पहले मिलेगी सटीक चेतावनी, AI के दम पर बदल रहा भारत का भविष्य

When ISRO will launch Anvesha satellite

जैसे कि हमने बताया Anvesha सैटेलाइट एक हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट है, जिसे Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा डेवलप किया गया है। इस सैटेलाइट को ISRO द्वारा कल यानी 12 जनवरी 2026 को तकरीबन 10 बजकर 17 मिनट पर PSLV-C62 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। यह लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर होगी। news और पढें: ISRO Roadmap: इंडिया स्पेस स्टेशन से लेकर गगनयान तक, बताया भविष्य का रोडमैप

What is Hyperspectral (हाइपरस्पेक्ट्रल क्या है)

Hyperspectral एक खास किस्म की गेम-चेंजर टेक्नोलॉजी है। यह उस रोशनी के उन रंगो को देख लेती है, जिसे एक आम इंसान अपनी आंखों से नहीं देख पाता। यह टेक्नोलॉजी रोशनी के छोटे से छोटे हिस्से को पहचानने में सक्षम हैं। ऐसे में इस टेक्नोलॉजी से ली गई तस्वीरों में रोशनी की सभी चमक दिखाई देती है। news और पढें: ISRO का PSLV-C62 मिशन हुआ फेल, जानें अचानक ऐसा क्या हुआ?

Add Techlusive as a Preferred SourceAddTechlusiveasaPreferredSource

डिफेंस सेक्टर में इस तकनीक काफी मददगार साबित होगी। सेना इसे अपनी तीसरी आंख व आसमान में भेजे अपने जासूस के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। उदाहरण के तौर पर बताएं, तो यह टेक्नोलॉजी एक स्कैनर के तौर पर काम करेगी। अक्सर दुश्मन नकली पेड़ पौधे पहनकर छिपते हुए हमारी सीमा में घुस जाते हैं, लेकिन यह सैटेलाइट इतनी पावरफुल है कि यह असली और नकली पौधों में अंतर समझकर सेना को आगाह कर सकती है।