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आखिर अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट समुद्र में क्यों उतरते हैं, जबकि रूसी यान जमीन पर लैंड करते हैं?

अंतरिक्ष से वापस लौटना किसी भी मिशन का सबसे मुश्किल और अहम हिस्सा होता है। आपने अक्सर देखा होगा कि अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट समुद्र में उतरते हैं, जबकि रूस के Soyuz कैप्सूल जमीन पर लैंड करते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह...

Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 18, 2026, 10:56 AM (IST)

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अंतरिक्ष मिशन में रॉकेट का लॉन्च जितना रोमांचक होता है, उतना ही जरूरी उसका सुरक्षित वापस लौटना भी होता है। आपने कई बार देखा होगा कि अमेरिका के स्पेसक्राफ्ट समुद्र में उतरते हैं, जबकि रूस के Soyuz कैप्सूल खुले मैदानों में लैंड करते हैं। असल में इसके पीछे कोई टेक्नोलॉजी की लड़ाई या दुश्मनी नहीं है, बल्कि दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति वजह है। अमेरिका के पास अटलांटिक और प्रशांत महासागर आसानी से मौजूद हैं, इसलिए NASA समुद्र में लैंडिंग को ज्यादा सुरक्षित मानता है। वहीं रूस में बड़े-बड़े खुले मैदान ज्यादा हैं, लेकिन समुद्र तक पहुंच आसान नहीं है। इसी कारण रूस अपने कैप्सूल जमीन पर उतारना ज्यादा बेहतर और आसान मानता है। news और पढें: पृथ्वी के बाहर मिला जीवन का नया सुराग, वैज्ञानिकों की इस नई खोज ने बढ़ाई उम्मीदें

अमेरिका के स्पेसक्राफ्ट पानी पर ही क्यों लैंड करते हैं?

अमेरिका ने 1961 से ही अपने अंतरिक्ष यानों को पैराशूट की मदद से समुद्र में उतारने की टेक्नोलॉजी अपनाई हुई है। स्पेसक्राफ्ट जब पृथ्वी के वातावरण में लौटता है, तो पैराशूट उसकी रफ्तार कम करते हैं और फिर समुद्र का पानी, झटके को काफी हद तक सोख लेता है। इसके बाद NASA और अमेरिकी नौसेना मिलकर अंतरिक्ष यात्रियों और कैप्सूल को सुरक्षित बाहर निकालते हैं। यही वजह है कि Apollo, Mercury और हाल के SpaceX मिशन भी समुद्र में स्प्लैशडाउन करते हैं। पानी में उतरने से अंतरिक्ष यात्रियों को कम झटका लगता है और सुरक्षा भी बेहतर मानी जाती है। news और पढें: अब चांद पर बनेगा इंसानों का बेस, NASA का बड़ा ऐलान

रूस के Soyuz कैप्सूल जमीन पर ही क्यों लैंड करते हैं?

दूसरी तरफ रूस के Soyuz कैप्सूल को जमीन पर उतरने के लिए बनाया गया है। रूस के ज्यादातर मिशन कजाखस्तान के Baikonur Cosmodrome से लॉन्च होते हैं, जो समुद्र से बहुत दूर है। इसलिए वहां समुद्र में लैंडिंग करना आसान नहीं होता। Soyuz कैप्सूल में खास RetroRockets लगे होते हैं। ये जमीन पर उतरने से ठीक पहले चालू हो जाते हैं और कैप्सूल की स्पीड कम कर देते हैं, ताकि लैंडिंग सुरक्षित हो सके, फिर भी इसकी लैंडिंग काफी जोरदार झटके वाली होती है। कई अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया है कि Soyuz में उतरना किसी बड़े सड़क हादसे जैसा महसूस होता है। इटली के अंतरिक्ष यात्री Paolo Nespoli ने इसे ‘ट्रक और छोटी कार की सीधी टक्कर’ जैसा बताया था। news और पढें: 2023 में Chandrayaan-3 मिशन के Vikram Lander ने लगाया था छोटा Jump, अब ISRO को मिली ये बड़ी सफलता

क्या रूसी ने कभी स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग पानी पर की है?

रूस के इतिहास में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ जब Soyuz कैप्सूल पानी में उतरा। साल 1976 के Soyuz 23 मिशन की इमरजेंसी लैंडिंग एक जमी हुई झील में हुई थी, जहां दो अंतरिक्ष यात्री करीब 9 घंटे तक फंसे रहे थे। यह हादसा इतना खतरनाक था कि उसके बाद रूस ने फिर कभी पानी में लैंडिंग की कोशिश नहीं की। वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री समुद्र में उतरने के अनुभव को ज्यादा आरामदायक बताते हैं। हाल के Artemis मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने इसे रोमांचक और बेहतरीन रोलर-कोस्टर राइड जैसा अनुभव बताया। यही कारण है कि अमेरिका और रूस आज भी अपनी भौगोलिक जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग लैंडिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं।

FAQ

अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट समुद्र में ही क्यों उतरते हैं?

अमेरिका के पास अटलांटिक और प्रशांत महासागर हैं। समुद्र का पानी लैंडिंग के झटके को काफी हद तक कम कर देता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा बढ़ जाती है। इसी वजह से NASA लंबे समय से स्प्लैशडाउन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।

रूस के Soyuz कैप्सूल जमीन पर क्यों लैंड करते हैं?

रूस के ज्यादातर मिशन कजाखस्तान के Baikonur Cosmodrome से लॉन्च होते हैं, जो समुद्र से काफी दूर है। वहां बड़े खुले मैदान मौजूद हैं, इसलिए Soyuz कैप्सूल को जमीन पर उतरने के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

Soyuz कैप्सूल की लैंडिंग ज्यादा खतरनाक मानी जाती है क्या?

Soyuz की लैंडिंग पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इसमें झटका ज्यादा महसूस होता है। हालांकि RetroRockets इसकी स्पीड कम कर देते हैं, फिर भी कई अंतरिक्ष यात्रियों ने इसे ‘कार एक्सीडेंट जैसा अनुभव’ बताया है।

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क्या रूस ने कभी पानी में स्पेसक्राफ्ट उतारा है?

1976 के Soyuz 23 मिशन में इमरजेंसी के दौरान कैप्सूल एक जमी हुई झील में उतर गया था। इस हादसे में अंतरिक्ष यात्री कई घंटों तक फंसे रहे थे। इसके बाद रूस ने दोबारा पानी में लैंडिंग की कोशिश नहीं की।