Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 17, 2026, 11:17 AM (IST)
How IMD Is Using AI to Make Monsoon Forecasts More Local (Image: AI Generated)
India Meteorological Department (IMD) ने अब मानसून की भविष्यवाणी को और ज्यादा सटीक बनाने के लिए एक नया AI आधारित प्लेटफॉर्म पेश किया है। अब तक मौसम की जानकारी ज्यादातर राज्य या बड़े क्षेत्रों के हिसाब से दी जाती थी, जैसे कहां भारी बारिश होगी, कहां तूफान आ सकता है या किस इलाके में मानसून पहुंचेगा, हालांकि यह जानकारी आम लोगों के लिए यूजफुल होती थी, लेकिन किसानों और स्थानीय प्रशासन को कई बार ज्यादा सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी। अब IMD का नया AI प्लेटफॉर्म इस समस्या को कम करने की कोशिश करेगा। यह सिस्टम केवल मानसून आने की जानकारी नहीं देगा, बल्कि यह भी बताएगा कि आने वाले हफ्तों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश किस तरह आगे बढ़ सकती है, बदलते मौसम और अनियमित बारिश के दौर में यह टेक्नोलॉजी काफी अहम मानी जा रही है।
इस नए सिस्टम को IMD ने Indian Institute of Tropical Meteorology और National Centre for Medium Range Weather Forecasting के साथ मिलकर तैयार किया है। खास बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म सिर्फ पुराने मौसम मॉडल पर निर्भर नहीं रहेगा। इसमें AI आधारित Forecasting Models, Statistical Methods, Extended-Range Prediction Systems और Real-Time Weather Observation Data को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म हर बुधवार को अगले चार हफ्तों तक के लिए संभावित मानसून और बारिश का अनुमान जारी करेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिल सकता है क्योंकि वे समय रहते बुवाई, सिंचाई, फसल कटाई और फसल सुरक्षा से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले पाएंगे। इससे अचानक होने वाले मौसम बदलाव से नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।
भारत जैसे बड़े देश में मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कई बार एक शहर में भारी बारिश होती है जबकि कुछ किलोमीटर दूर सूखा जैसा हाल रहता है। यही वजह है कि हाइपर-लोकल यानी बेहद स्थानीय स्तर की मौसम जानकारी अब जरूरी बन गई है। सरकार का कहना है कि यह नया AI सिस्टम 16 राज्यों और 3000 से ज्यादा सब-डिस्ट्रिक्ट्स के किसानों की मदद करेगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन वाला एक पायलट रेनफॉल फोरकास्ट सिस्टम भी शुरू किया गया है, जो 10 दिन पहले तक बारिश का अनुमान दे सकता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में मौसम की जानकारी सिर्फ शहर या जिले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मोहल्ले और गांव स्तर तक पहुंच सकती है। इससे किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी यात्रा, काम और डेली एक्टिविटी की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
अब AI केवल चैटबॉट या फोटो बनाने वाली टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रह गया है। मौसम विभाग भी AI का इस्तेमाल करके सैटेलाइट डेटा, रडार ऑब्जर्वेशन, बारिश के रिकॉर्ड और पुराने मौसम पैटर्न का तेजी से एनालिसिस कर रहा है। इससे मौसम का अनुमान पहले की तुलना में ज्यादा तेज और सटीक बनने की उम्मीद है। भारत का Weather Monitoring System भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बेहतर हुआ है। सरकार के मुताबिक पहले देश में केवल 16 से 17 डॉप्लर वेदर रडार थे, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर करीब 50 हो चुकी है और Mission Mausam के तहत आगे और रडार लगाए जाएंगे।