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क्या चांद पर नहीं उतरेगा NASA का Artemis III? Mission के नए प्लान हुआ खुलासा

NASA का Artemis III मिशन अब सीधे चांद पर लैंडिंग नहीं करेगा। इस बार NASA पहले अंतरिक्ष में जरूरी टेक्नोलॉजी और सिस्टम्स की टेस्टिंग पर फोकस करेगा। मिशन के जरिए स्पेसक्राफ्ट, लैंडर, स्पेससूट और सेफ्टी सिस्टम्स को जांचा जाएगा, ताकि भविष्य में इंसानों को सुरक्षित तरीके से चंद्रमा पर उतारा जा सके। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 14, 2026, 05:37 PM (IST)

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने Artemis III मिशन को लेकर नई योजना तैयार की है, पहले माना जा रहा था कि यह मिशन सीधे इंसानों को चांद की सतह पर उतारेगा लेकिन अब NASA ने फैसला किया है कि Artemis III फिलहाल चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेगा। इसके बजाय यह मिशन पृथ्वी की कक्षा में रहकर कई जरूरी टेक्नोलॉजी और सिस्टम्स की टेस्टिंग करेगा। NASA का मानना है कि भविष्य में ‘Safe Moon Mission’ के लिए पहले सभी जरूरी सिस्टम्स को सही तरह से जांचना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि Artemis III को अब एक बड़े ‘Orbital Test Mission’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। news और पढें: Artemis II की सफलता के Artemis III की तैयारी शुरू, एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा इंसान!

Artemis III मिशन में कौन-से रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल होगा?

इस मिशन में NASA का ताकतवर Space Launch System (SLS) रॉकेट और Orion स्पेसक्राफ्ट सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। चार अंतरिक्ष यात्रियों को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, लेकिन इस बार रॉकेट में पहले इस्तेमाल होने वाला खास क्रायोजेनिक इंजन वाला हिस्सा नहीं लगाया जाएगा। उसकी जगह एक खास ढांचा लगाया जाएगा, जो आकार और वजन में वैसा ही होगा, लेकिन रॉकेट को आगे बढ़ाने का काम नहीं करेगा। NASA के वैज्ञानिक इस सिस्टम पर अलबामा के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर में काम कर रहे हैं। जब Orion पृथ्वी की कक्षा में पहुंचेगा, तब उसका यूरोप में बना सर्विस मॉड्यूल उसकी गति और दिशा को संभालने में मदद करेगा।

Artemis III मिशन का सबसे बड़ा मकसद क्या होगा?

Artemis III मिशन का सबसे बड़ा मकसद अलग-अलग स्पेसक्राफ्ट और चंद्रमा पर उतरने वाले लैंडर सिस्टम्स की जांच करना होगा। NASA इस मिशन में SpaceX और Blue Origin के बनाए जा रहे खास लैंडर्स का भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। मिशन के दौरान Orion स्पेसक्राफ्ट और लैंडर्स को अंतरिक्ष में आपस में जोड़कर टेस्ट किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अंतरिक्ष यात्री एक स्पेसक्राफ्ट से दूसरे में सुरक्षित तरीके से कैसे जा सकते हैं। खबरों के मुताबिक अंतरिक्ष यात्री टेस्ट लैंडर के अंदर जाकर वहां रहने और काम करने की सुविधाओं को भी परख सकते हैं, ताकि भविष्य के Moon Mission और ज्यादा सुरक्षित बन सकें।

मिशन में कौन-कौन सी नई टेक्नोलॉजी की जांच की जाएगी?

NASA इस मिशन के जरिए कई नई टेक्नोलॉजी की भी जांच करेगा। Artemis III के अंतरिक्ष यात्री Orion में पहले के मुकाबले ज्यादा समय बिताएंगे। इस दौरान लाइफ सपोर्ट सिस्टम, डॉकिंग टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन सिस्टम्स की टेस्टिंग की जाएगी। सबसे खास बात यह है कि NASA Orion के नए हीट शील्ड को भी टेस्ट करेगा, जो पृथ्वी पर वापसी के दौरान अत्यधिक गर्मी से स्पेसक्राफ्ट की सुरक्षा करेगा। इसके अलावा एजेंसी Axiom Space के नए AxEMU स्पेससूट से जुड़े सिस्टम्स की भी जांच करने की योजना बना रही है। यह स्पेससूट भविष्य में चंद्रमा पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

NASA अभी किन मिशन तैयारियों पर काम कर रहा है?

NASA अभी भी मिशन के कई हिस्सों पर काम कर रहा है। एजेंसी ने अभी तक अंतरिक्ष यात्रियों के नाम, मिशन की अवधि और वैज्ञानिक उद्देश्यों की पूरी जानकारी शेयर नहीं की है, हालांकि यह मिशन पृथ्वी की निचली कक्षा में रहेगा, इसलिए NASA इस बार Deep Space Network का यूज नहीं करेगा। इसकी जगह नई कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम किया जा रहा है। NASA घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स को CubeSats भेजने का मौका देने पर भी विचार कर रहा है। इससे दूसरे देशों और निजी कंपनियों को भी इस मिशन का हिस्सा बनने का अवसर मिल सकता है।

Artemis प्रोग्राम का अब तक का सफर कितना खास रहा है?

  • NASA का Artemis प्रोग्राम पहले ही दो बड़े मिशन पूरे कर चुका है। Artemis I साल 2022 में बिना क्रू वाला मिशन था, जिसने Orion को चंद्रमा के चारों ओर भेजा था।
  • Artemis II हाल ही में सफलतापूर्वक पूरा हुआ, जिसमें 50 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास भेजा गया।
  • अब Artemis III को भविष्य के चंद्र मिशनों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। NASA का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों की मौजूदगी स्थापित करना और आगे चलकर मंगल ग्रह तक इंसान भेजना है।

यही कारण है कि एजेंसी जल्दबाजी की बजाय हर टेक्नोलॉजी को सुरक्षित और सफल बनाने पर फोकस कर रही है।

FAQ

क्या NASA का Artemis III मिशन अब चांद पर नहीं उतरेगा?

फिलहाल NASA ने Artemis III मिशन को सीधे चंद्रमा पर लैंडिंग मिशन की बजाय एक बड़े Orbital Test Mission के रूप में तैयार करने की योजना बनाई है। इस मिशन में अंतरिक्ष में जरूरी सिस्टम्स और टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग की जाएगी।

Artemis III मिशन का सबसे बड़ा मकसद क्या है?

इस मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट, लैंडर, डॉकिंग सिस्टम, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और स्पेससूट जैसी जरूरी टेक्नोलॉजी की जांच करना है, ताकि भविष्य में इंसानों को सुरक्षित तरीके से चांद पर भेजा जा सके।

Artemis III में कौन-सा रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट इस्तेमाल होगा?

NASA इस मिशन में अपने शक्तिशाली Space Launch System (SLS) रॉकेट और Orion स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल करेगा। इसके जरिए चार अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में भेजा जाएगा।

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मिशन में कौन-कौन सी नई टेक्नोलॉजी टेस्ट होगी?

इस मिशन में नए Heat Shield, Docking Technology, Communication Systems, Life Support Systems और Axiom Space के AxEMU स्पेससूट से जुड़े सिस्टम्स की जांच की जाएगी।