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PSLV-C62 Mission: इस हफ्ते EOS-N1 के साथ 15 सैटेलाइट्स को लॉन्च करेगा ISRO, जानें तारीख

ISRO इस हफ्ते भारत की अंतरिक्ष ताकत दिखाने जा रहा है, PSLV-C62 रॉकेट के जरिए EOS-N1 सैटेलाइट और 15 अन्य छोटे सैटेलाइट्स लॉन्च किए जाएंगे। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jan 09, 2026, 06:28 PM (IST)

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Indian Space Research Organization(ISRO) इस हफ्ते अपने रॉकेट PSLV-C62 के जरिए एक अहम मिशन लॉन्च करने की तैयारी में है। यह मिशन 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन Space Center के फर्स्ट लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक मुख्य Earth Observation Satellite EOS-N1 के साथ 15 बाकी Co-passenger satellites भी भेजे जाएंगे। एक ही मिशन में इतने सैटेलाइट्स को लॉन्च करना ISRO की टेक्नोलॉजी क्षमता को दिखाता है। news और पढें: ISRO के LVM3 बाहुबली रॉकेट से BlueBird Block-2 सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग, जानें खासियत

क्या है EOS-N1 सैटेलाइट और यह किन कामों में मदद करेगी

इस मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1 है, जो एक Earth Observation Satellite है। यह सैटेलाइट पृथ्वी की निगरानी से जुड़े कई अहम कामों में मदद करेगा। EOS-N1 का यूज पर्यावरण पर नजर रखने, खेती की योजना बनाने, शहरों के विकास, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। आज के समय में Earth Observation Satellite सिर्फ वैज्ञानिक रिसर्च तक सीमित नहीं हैं बल्कि सरकार और निजी कंपनियां भी इनसे मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल रोजमर्रा के फैसलों में करती हैं। इसी वजह से ऐसे सैटेलाइट्स की मांग दुनियाभर में लगातार बढ़ रही है। news और पढें: Gaganyaan Mission में इंसान से पहले ‘हाफ-ह्यूमनॉइड Vyommitra’ जाएगा अंतरिक्ष में, क्या है इसके पीछे ISRO का मास्टरप्लान?

PSLV की सबसे बड़ी ताकत

EOS-N1 के अलावा PSLV-C62 मिशन में 15 बाकी छोटे सैटेलाइट्स भी शामिल हैं। एक ही रॉकेट से कई सैटेलाइट्स को उनकी तय कक्षा में पहुंचाना PSLV की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। यही वजह है कि भारत आज कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च के क्षेत्र में काफी बेहतर काम कर रहा है और कई देशों की कंपनियां ISRO की लॉन्च सेवाओं पर भरोसा करती हैं। news और पढें: ISRO का बड़ा कारनामा, GSLV-F15 के साथ NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट की लॉन्च

इस मिशन में ISRO PSLV-DL वेरिएंट का होगा इस्तेमाल

इस मिशन में ISRO PSLV-DL वेरिएंट का इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें अतिरिक्त ताकत के लिए दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स लगे होते हैं। रॉकेट और सभी सैटेलाइट्स का इंटीग्रेशन पूरा हो चुका है और फिलहाल प्री-लॉन्च जांच जारी है। PSLV को ISRO का ‘वर्कहॉर्स’ कहा जाता है, जिसने अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी की हैं। Chandrayaan-1, Mangalyaan, Aditya-L1 और AstroSat जैसे ऐतिहासिक मिशन इसी रॉकेट से लॉन्च हुए हैं। साल 2017 में PSLV ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था। PSLV-C62 मिशन के साथ ISRO एक बार फिर भारत की अंतरिक्ष क्षमता को दुनिया के सामने मजबूती से पेश करने जा रहा है।