Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jul 13, 2026, 01:12 PM (IST)
ISRO Gaganyaan Crew Module Passes 3 Key Safety Tests
भारत के पहले Human Space Mission Gaganyaan की तैयारी तेजी से चल रही है। ISRO ने 12 जुलाई को बताया कि उसने गगनयान के Crew Module से जुड़े तीन अहम टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। जिसमें आते है… और पढें: दो बार फेल होने के बाद फिर उड़ान भरेगा PSLV, ISRO ने किया बड़ा ऐलान
आपको बता दें यह वही कैप्सूल है जिसमें भारतीय एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष जाएंगे और मिशन पूरा होने के बाद सुरक्षित वापस धरती पर आएंगे। इन टेस्ट को इसलिए किया गया है ताकि यह पता चल सके कि यह कैप्सूल किसी भी मुश्किल स्थिति में काम कर रहा है कि नहीं। और पढें: 2023 में Chandrayaan-3 मिशन के Vikram Lander ने लगाया था छोटा Jump, अब ISRO को मिली ये बड़ी सफलता
मिशन पूरा होने के बाद Gaganyaan का क्रू मॉड्यूल पैराशूट की मदद से समुद्र में उतरेगा। लेकिन समुद्र की ऊंची लहरों की वजह से कैप्सूल पलट भी सकता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर निकालना और रेस्क्यू टीम के लिए उन्हें सुरक्षित निकालना मुश्किल हो सकता है। इसी समस्या से बचने के लिए ISRO ने Crew Module Uprighting System (CMUS) तैयार किया है। इस सिस्टम में लगे खास एयर बैग दबाव वाली गैस की मदद से कुछ ही सेकंड में फूल जाते हैं और अगर कैप्सूल उल्टा हो जाए तो उसे दोबारा सीधा कर देते हैं। टेस्ट के दौरान यह सिस्टम तय समय के भीतर सफलतापूर्वक काम करता पाया गया। और पढें: सूरज की वजह से धरती पर गिर रहे पुराने सैटेलाइट! ISRO ने किया बड़ा खुलासा
Gaganyaan में Crew Module के साथ एक Service Module भी होता है। ये दोनों मॉड्यूल एक साथ जुड़े रहें इसके लिए Umbilical Unit का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जब धरती के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले इस कनेक्शन का सही समय पर अलग होना काफी जरूरी होता है। अगर यह अलग नहीं हुआ तो मिशन खतरे में पड़ सकता है। बता दें इसरो ने इस सिस्टम का भी सफल परीक्षण कर लिया है।
क्रू मॉड्यूल के सबसे ऊपर एक Apex Cover होता है। जो गगनयान में लगे पैराशूट को सुरक्षित रखता है। इसका यूज भी लैगिंग के लिए होता है। जब ये धरती पर वापस आएगा तभी इस कवर को अलग करने के लिए छोटे विस्फोटक थ्रस्टर का इस्तेमाल होगा। इससे कैप्सूल पर काफी दबाव पड़ेगा। इस समस्या को जांचने के लिए ISRO ने करीब 1.75 गुना ज्यादा दबाव डाला। टेस्ट में क्रू मॉड्यूल पूरी तरह सुरक्षित रहा और उसके किसी भी हिस्से को कुछ नहीं हुआ।