Written By Swati Jha
Published By: Swati Jha | Published: Feb 09, 2023, 02:17 PM (IST)
Microsoft Edge दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले Web Browsers में से एक है। वेब ब्राउजर सेगमेंट में Google Chrome के बाद इसका मार्केट में दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। पिछले कुछ सालों में, टेक दिग्गज विंडोज यूजर्स को क्रिएटिव पॉप-अप, नए डिजाइन और फीचर्स के साथ पहले से इंस्टॉल किए गए ब्राउजर पर बने रहने के लिए लुभा रहे हैं। और पढें: नए स्मार्टफोन में पहले से नहीं मिलेगा Aadhaar App, सरकार ने वापस लिया प्रस्ताव
जैसा कि इंटरनेट पर हमारी निर्भरता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। हम अपनी अधिक से अधिक पर्सनल डिटेल शेयर करने के लिए मजबूर हैं। इसमें बैंकिंग डिटेल, बर्थ डेट, लोकेशन और दूसरी जानकारियां शामिल हैं। यूजर्स को सेफ रखने के लिए माइक्रोसॉफ्ट समय-समय पर एज ब्राउजर के लिए सिक्योरिटी अपडेट रोल आउट करता है। और पढें: e-PAN कार्ड के नाम पर आ रहा खतरनाक फर्जी ईमेल, सरकार ने जारी किया बड़ा अलर्ट, जानें क्या करें
हालांकि टेक कंपनियां यूजर्स को अपने ब्राउजर के लेटेस्ट वर्जन को चलाने की सलाह देती हैं, कुछ यूजर आसानी की वजह से पुराने वर्जन को चलाने का ऑप्शन चुनते हैं, जो भविष्य में यूजर्स को खतरे में डाल सकता है। दरअसल ब्राउजर के पुराने वर्जन का फायदा उठाना अटैकर्स के लिए आसान है। Microsoft Edge ब्राउजर में भी ऐसी कुछ खामियां देखी गई हैं। भारत सरकार ने 109.0.1518.78 से पहले के Edge ब्राउजर वर्जन के लिए चेतावनी जारी की है। और पढें: AI जनरेटेड फोटो और वीडियो पर लगेगी लगाम, आज से नए नियम लागू
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पोंस टीम (CERT-In) ने खुलासा किया है कि Microsoft Edge में एक बग की सूचना दी गई है। इससे अटैकर रिमोटली टारगेट सिस्टम पर डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) स्थितियों को ट्रिगर कर कर सकता है।
CERT-In के मुताबिक, डेटा में हेरफेर की वजह से Microsoft Edge में बग मौजूद है। अटैकर किसी यूजर को खास तौर से बनाए गए कंटेंट को ओपन करने के लिए राजी करके इस बग का फायदा उठा सकता है। इस बग से अटैकर टारगेट सिस्टम पर डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) शर्तों को ट्रिगर कर सकता है। किसी भी धोखाधड़ी से बचने के लिए, यूजर्स को Microsoft Edge के लेटेस्ट वर्जन का इस्तेमाल करना चाहिए।