Written By Ajay Verma
Published By: Ajay Verma | Published: Feb 20, 2026, 10:27 AM (IST)
India-AI Impact Summit 2026
AI जनरेटेड फोटो, ऑडियो और डीपफेक वीडियो पर लगाम लगाने के लिए आज से नए नियम को लागू कर दिया गया है। इन गाइडलाइन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक द्वारा तैयार किए गए कंटेंट को लेबल किया जाएगा, जिससे लोगों के लिए उसकी पहचान करना आसान हो जाएगा। इसके साथ गलत व गैरकानूनी कंटेंट को भी प्लेटफॉर्म से 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सिक्योर हो जाएंगे और फर्जी इमेज एवं वीडियो के कारण धोखाड़ी और बदनामी के मामलों में भी तेजी से गिरावट आएगी। और पढें: Google Gemini में आ सकता है बड़ा अपडेट, फिर आसानी से कर पाएंगे ChatGPT की पूरी हिस्ट्री ट्रांसफर
भारत सरकार के नए नियम के तहत अब 3 घंटे के अंदर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गैरकानूनी और गलत जानकारी देने वाली वीडियो, फोटो या फिर ऑडियो को हटाना होगा, जिसे AI के माध्यम से बनाया गया है। इससे पहले इस तरह के कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था। और पढें: क्या है Elon Musk का सबसे खास और बड़ा प्रोजेक्ट Terafab? जानें सब कुछ
सरकार का कहना है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स को हर तीन महीने में नियमों की जानकारी प्रदान करनी होगी। साथ ही, यह भी बताना होगा कि यदि वे गलत वीडियो शेयर करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्थ कार्रवाई की जा सकती है। और पढें: अब बिना इंसान की इजाजत AI लेगा फैसले! Anthropic के Claude Code में आया ये खास फीचर
नए नियम के लागू होने पर कंपनियों को ऐसे टूल लाने का सुझाव दिया गया है। इससे प्लेटफॉर्म पर मौजूद AI कंटेंट को लेबल किया जा सकेगा, जिससे लोगों के लिए यह पहचानना आसान हो जाएगा कि कंटेंट असली या फिर नकली।
यदि कोई गलत एआई जनरेटेड कंटेंट प्लेटफॉर्म पर शेयर करता है, उसकी पहचान करना सबसे पहले प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है। इससे कंटेंट पर रोक लगेगी और लोगों तक गलत जानकारी नहीं पहुंचेगी। इसके साथ मेटा डेटा भी एंटर करने के लिए कहा गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मेटा डेटा एक फाइल की तरह होता है। इसे डिजिटल डीएनए कहा जाता है। यह फाइल की कोडिंग में छिपा होता है। इसके जरिए पता लगाया जा सकता है कि फोटो को किस तारीख, किस एआई टूल से बनाया गया और इसे सबसे पहले किस प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया।