Written By Ajay Verma
Published By: Ajay Verma | Published: Jul 17, 2026, 11:55 AM (IST)
भारत में पहली बार हाइड्रोजन ट्रेन चलने का सपना आखिरकार साकार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी है, जो हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलेगी। यह ट्रेन कुल 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इसमें 10 कोच को जोड़ा गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत चीन, अमेरिका, जापान और जर्मनी के साथ उस सूची में शुमार हो गया है, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली रेल गाड़ी चलती हैं।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा की जींद सिटी से पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांबेवा, इशापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, गोहाना, रबड़ा, लाठ, मोहन हरियाणा, बरवासनी कवर करके सोनीपत तक जाएगी। इसमें सफर करने के लिए 5 से 25 रुपये तक का किराया देना होगा। इसमें एक बार में 2600 यात्री यात्रा कर सकेंगे, जिन्हें बैठाने के लिए 682 सीट लगाई गई हैं।
हाइड्रोजन ट्रेन में प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। इसकी छत पर सिलेंडर लगे हैं। इसमें हाइड्रोजन गैस भरी है, जिसे बाहर हवा में मौजूद ऑक्सीजन से मिलाया जाता है। इससे ट्रेन को चलने में मदद मिलती है। इस दौरान सिर्फ पानी की भाप निकलती है। कार्बन न निकलने से प्रदूषण नहीं होता है और पर्यावरण बचा रहता है।
विशेज्ञों की मानें, तो हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन आम डीजल व बिजली से चलने वाली ट्रेन की तुलना में ज्यादा बेहतर है। इसे चलाने के लिए न बिजली और न डीजल की जरूरत पड़ती है। इससे फ्यूल सेव होता है। अच्छी बात यह है कि इसकी मेंटेनेंस भी बहुत कम है। इसका मतलब है कि ज्यादा खर्च नहीं आता है।
भारतीय रेलवे ने इस ट्रेन के लिए जींद में हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया है। यहां 3000 किलोग्राम गैस को स्टोर किया जा सकता है। सुरक्षा को ध्यान में रखकर गैस लीक डिटेक्टर, फ्लेम और स्मोक डिटेक्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा, एडवांस तकनीक वाले सिस्टम भी इंस्टॉल किए गए हैं, जो गैस लीक होने पर स्प्लाई को रोक देंगे।
इस ट्रेन ने दुनियाभर में पैसेंजर कैपेसिटी के मामले में नया गोल सेट किया है। चीन और जर्मनी की ज्यादातर हाइड्रोजन ट्रेन में 2 से 3 डिब्बे होते हैं, लेकिन भारत में चलने वाली ट्रेन में 10 कोच को शामिल किया गया है, जिसमें 2000 से ज्यादा पैसेंजर बैठ सकते हैं। यह 1200 किलोवॉट के फ्यूल सेल सिस्टम की मदद से चलती है, जो इसे अन्य देशों में चलने वाली ट्रेन से अधिक पावरफुल बनाती है।
इस ट्रेन की ओरिजनल स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालांकि, इसे 75 किलोमीटर की रफ्तार से चलाने की मंजूरी मिली है।