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#HumFitTohIndiaHit: टेक्नोलॉजी का हमारी लाइफ पर गहरा असर, फायदे भी और नुकसान भी

#HumFitTohIndiaHit: टेक्नोलॉजी ने जहां हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं इसकी असल कीमत सेहत को चुकानी पड़ रही है। यहां जानें सेहत के लिहाज से टेक्नोलॉजी हमारे लिए वरदान है या फिर खतरनाक।

Published By: Manisha | Published: Mar 29, 2026, 05:03 PM (IST)

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डिजिटल दौर में टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात की नींद से पहले तक हर दूसरा इंसान अपना ज्यादातर समय अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप या फिर टीवी पर बीताता है। सुबह उठते ही फोन देखना, ऑफिस जाते हुए फोन देखना, ऑफिस में लैपटॉप पर काम करना, ऑफिस से आते हुए फोन देखना और सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रोल करना… यह कब हमारी डेली लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है, हमें पता ही नहीं चला। टेक्नोलॉजी ने जहां एक तरह हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ यह धीरे-धीरे हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत को नुकसान भी पहुंचा रही है। वो कहते हैं न किसी भी चीज की अति हानिकारक ही होती है। वैसे ही टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

फोन देखते हुए लगातार स्क्रीन पर नजर रखना आपकी आंखों के स्वास्थ्य को खराब कर रहा है। इसके अलावा, कम नींद की वजह से इसका सीधा असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में संतुलन ही जीवन की कुंजी साबित होता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कैसे टेक्नोसॉजी आपकी हेल्थ को बेहतर बनाने के साथ-साथ बिगाड़ भी सकती है।

Screen time impact

डिजिटल दौर में कोई भी स्क्रीन टाइम से अछूता नहीं रह गया है। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन क्लासेस हो, मनोरंजन के लिए मूवी देखना हो या फिर गेम खेलना हो या फिर सोशल मीडिया ट्रेंड फॉलो करना हो… सब कुछ स्क्रीन पर ही निर्भर करता है। सकरात्मक प्रभाव की बात करें, तो घर बैठे आप अपने स्मार्टफोन या फिर लैपटॉप के जरिए किसी भी संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इंटरनेट के जरिए आप ऑनलाइन एजुकेशन प्राप्त कर सकते हैं और अपनी हेल्थ से जुड़ी इंफॉर्मेशन आसानी से पा सकते हैं। फोन में मौजूद फिटनेट ऐप आपकी सेहत पर नजर रखते हैं और किसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत की भी जानकारी आपको इस तरह के ऐप्स से मिल जाती है। टेक्नोलॉजी की वजह से Work From Home का भी ट्रेंड संभव हो पाया है। एक समय था कि ऑफिस के काम के लिए हर किसी को घर से बाहर निकलकर दफ्तर जाना ही पड़ता था, लेकिन कोरोना काल के दौरान टेक्नोलॉजी के सकारात्मक पहलू ने वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी, जिसमें लोग घर बैठे अपने ऑफिस का काम कर सकते थे।

नकारात्मक पहलू की बात करें, तो हर समय फोन या फिर लैपटॉप की स्क्रीन पर लगे रहने से हमारी फिजिकल एक्टिविटी कम हो चुकी है। फिजिकल एक्टिविटी कम होने की वजह से मोटापा, डायबिटीज व हार्ट की समस्या अब आम हो चुकी है। हर दूसरे इंसान को इसमें से कोई न कोई बीमारी होती है। इसके अलावा, स्क्रीन टाइम की अति से सीधे आपकी आंखों को नुकसान पहुंचता है। स्क्रीन से खतरनाक ब्लू रेज निकलती है, जो हमारी आंखों पर बुरा प्रभाव डालती हैं। सीमित स्क्रीन-टाइम व डेली 7 से 8 घंटे की नींद आपको इन खतरनाक प्रभावों से बचा सकती है।

Mental health apps

भागदौड़ भरी जिदंगी में स्ट्रेस, डिप्रेशन व एंग्जायटी जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ती जा रही है। यह बीमारियां व परेशानी ऐसी होती है, जिसे ठीक करने के लिए लोग डॉक्टर के वजाय ऐप्स का सहारा लेते हैं। फायदों की बात करें, तो इन ऐप्स को यूजर्स कभी भी कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ऐप मेंटल हेल्थ डॉक्टर की तुलना में कम खर्चीले होते हैं। इसके अलावा, आप बिना किसी डर में हिचकिचाहट के इन ऐप्स को अपने इमोशन शेयर कर पाते हैं, वहीं कई बार पेशेंट डॉक्टर से सभी बातें शेयर करने में सहज महसूस नहीं करते। इसके अलावा, इस तरह की ऐप्स शुरुआती रूप में कारगार भी साबित होती है।

नकरात्मक प्रभाव की बात करें, तो Google Play Store या फिर App Store पर मौजूद कई ऐु्स मेडिकल रूप से सर्टिफाइड नहीं होते हैं। ऐसे में इन ऐप्स पर मिलने वाली जानकारी जोखिम भरी भी हो सकती है। इसके अलावा, कई ऐप्स आपसे आपका पर्सनल डेटा भी शेयर करने को कहती हैं, जो कि प्राइवेसी के लिहाज से बिल्कुल सेफ नहीं होता। इसके अलावा, इन ऐप्स में आपको गंभीर मानसिक बीमारियों का निदान भी नहीं मिलता है।

AI mindfulness tools

पिछले कुछ समय से हर तरह AI (Artificial Intelligence) के चर्चे हैं। एआई हर सेक्टर में अपनी जगह बना रहा है। वहीं, हेल्थ सेक्टर में भी एआई काफी प्रगति कर चुका है। मार्केट में कई ऐसे एआई टूल्स दस्तक दे चुके हैं, जो कि आदतों व बिहेवियर के आधार पर आपके लिए पर्सनलाइज्ड सुझाव पेश करते हैं। जहां ऐप्स पर डिप्रेशन का एक ही तरह के आंसर मिलते हैं, वहीं एआई आपके आपबिती को सुनकर आपके लिए पर्सनलाइज्ड हेल्थ टिप्स देगा, जो दूसरों से काफी अलग हो सकते हैं। इसके अलावा, एआई टूल आपकी प्रोग्रेस को भी ट्रैक करते हैं।

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हालांकि, ऐप्स की तरह ही एआई पर भी डेटा प्राइवेसी को लेकर खतरा बना रहता है। आप अपनी सभी जानकारी एआई टूल के साथ शेयर करते हैं, ऐसे में आपकी डिटेल्स लीक होने का खतरा बना रहता है।