Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 13, 2026, 10:11 AM (IST)
China Flying Wind Turbine
चीन ने एक बार फिर Renewable Energy के क्षेत्र में दुनिया को चौंका दिया है, हाल ही में चीन ने एक ‘उड़ने वाली विंड टरबाइन’ (Flying Wind Turbine) का सफल टेस्ट किया है। यह टेक्नोलॉजी बहुत अलग है क्योंकि आम विंड टरबाइन जमीन पर लगती है, लेकिन यह हवा में उड़कर बिजली बनाती है। इसका मतलब है कि यह ऊंचाई पर तेज हवा का इस्तेमाल करके ज्यादा बिजली पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टेक्नोलॉजी आगे चलकर बड़े स्तर पर सफल हो जाती है, तो बिजली बनाने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इससे दूर-दराज के इलाकों में, जहां बिजली पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां भी आसानी से बिजली मिल सकती है। यह भविष्य में एनर्जी की कमी को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती है। और पढें: चीन कर रहा असंभव को संभव! 12000 शीशों वाला ये Solar Plant रात में भी बनाएगा बिजली
इस प्रोजेक्ट को बीजिंग की एक कंपनी Beijing Linyi Yunchuan Energy Technology ने बनाया है। इस सिस्टम का नाम S2000 Airborne Wind Energy System (AWES) रखा गया है। यह सिस्टम एक बड़े एयरशिप (हवा में उड़ने वाले गुब्बारे) जैसा होता है, जो हीलियम गैस से भरा रहता है। इसी वजह से यह हवा में आसानी से तैर सकता है और एक जगह स्थिर भी रह सकता है। इसके अंदर 12 छोटे-छोटे विंड टरबाइन लगाए गए हैं। ये टरबाइन तेज हवा का इस्तेमाल करके बिजली बनाते हैं। यह सिस्टम जमीन से बहुत ऊपर, हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ता है। वहां हवा ज्यादा तेज और लगातार चलती है, इसलिए ज्यादा बिजली आसानी से बनाई जा सकती है।
इस टेक्नोलॉजी का टेस्ट चीन के सिचुआन प्रांत में किया गया। इस दौरान S2000 एयरशिप को लगभग 2000 मीटर (करीब 6560 फीट) की ऊंचाई तक सफलतापूर्वक उड़ाया गया। टेस्ट में इस सिस्टम ने करीब 385 किलोवॉट-घंटा (kWh) बिजली बनाई। कंपनी का कहना है कि इतनी बिजली एक सामान्य घर को लगभग 2 हफ्ते तक चलाने के लिए काफी होती है। यह परीक्षण दिखाता है कि आने वाले समय में यह टेक्नोलॉजी छोटे स्तर पर बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है।
इस एयरशिप की बनावट भी काफी खास है। यह लगभग 60 मीटर लंबी और 40 मीटर चौड़ी और ऊंची है। इसका आकार एक बड़े हवाई जहाज या बड़े गुब्बारे जैसा दिखता है। इसके साथ एक लंबी केबल जुड़ी होती है। इसी के जरिए जो बिजली हवा में बनती है, उसे नीचे जमीन तक भेजा जाता है। फिर इस बिजली को पावर ग्रिड से जोड़ दिया जाता है ताकि घरों और शहरों में इस्तेमाल हो सके। इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बहुत ऊंचाई पर मौजूद तेज और लगातार चलने वाली हवाओं का इस्तेमाल करता है। वहां की हवा जमीन की तुलना में ज्यादा तेज होती है, इसलिए ज्यादा बिजली आसानी से बनाई जा सकती है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह टेक्नोलॉजी आने वाले समय में उन जगहों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है, जहां बिजली के तार (ग्रिड) पहुंचाना मुश्किल होता है।
जैसे कि पहाड़ी इलाके, सीमा चौकियां और दूर-दराज के गांव, जहां बिजली पहुंचाना बहुत महंगा और कठिन होता है। इसके अलावा इस टेक्नोलॉजी को पुराने विंड फार्म (जमीन पर लगे पवन टरबाइन) के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक तरह का ‘3D Energy System’ बन सकता है, जो और भी ज्यादा बिजली पैदा करेगा। इस तरह भविष्य में एनर्जी प्रोडक्शन ज्यादा आसान, सस्ता और प्रभावी हो सकता है।
हालांकि इस टेक्नोलॉजी के साथ कुछ समस्याएं भी हैं। सबसे बड़ी चिंता 2000 मीटर लंबी केबल को लेकर है क्योंकि यह हवाई जहाजों की उड़ान के लिए खतरा बन सकती है। इसके अलावा इस सिस्टम की देखभाल और मरम्मत भी आसान नहीं है। अगर कोई तकनीकी खराबी आती है, तो पूरे एयरशिप को वापस जमीन पर लाना पड़ेगा, जो मुश्किल काम है, फिर भी वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इन समस्याओं का हल मिल गया, तो यह उड़ने वाली विंड टरबाइन भविष्य में सस्ती और Renewable Energy का बहुत बड़ा स्रोत बन सकती है। इससे दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ सकती है।
यह एक नई टेक्नोलॉजी है जिसमें टरबाइन जमीन पर नहीं बल्कि हवा में एक एयरशिप की तरह उड़ती है और तेज हवाओं से बिजली बनाती है।
एयरशिप के अंदर लगे छोटे विंड टरबाइन ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा से बिजली प्रोडक्शन करते हैं, जिसे केबल के जरिए नीचे भेजा जाता है।
चीन में इसका सफल टेस्ट किया गया है और इसने लगभग 385 kWh बिजली भी बनाई है, जो छोटे घर के लिए कुछ दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है।
यह दूर-दराज के इलाके, पहाड़ी क्षेत्र और ऐसे स्थानों के लिए यूजफुल होगी जहां बिजली ग्रिड पहुंचाना मुश्किल होता है।
इसकी सबसे बड़ी चुनौती लंबी केबल, हवाई जहाजों सुरक्षा का खतरा और तकनीकी खराबी होने पर पूरे सिस्टम को नीचे लाने की कठिनाई है।