Written By Manisha
Published By: Manisha | Published: Jul 15, 2026, 07:44 PM (IST)
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सरकार भारत को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पहले India Production Linked Incentive (PLI) स्कीम पेश की गई थी, जो कि इसी साल मार्च में खत्म हुई है। वहीं, अब भारतीय सरकार ने Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम के तहत मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने के लिए सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इस स्कीम का उद्देश्य भारत को मोबाइल फोन प्रोडक्शन में बढ़ावा देना है। आइए जानते हैं सभी डिटेल्स।
Ministry of Information Technology and Electronics (MeitY) ने लेटेस्ट ब्लॉग पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को मंजूरी दे दी है। जैसे कि हमने बताया इस स्कीम के लिए सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इस स्कीम का सीधा फायदा देश के युवाओं को होने वाला है। देश में प्रोडक्शन बढ़ेगी, तो रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। इन सब के अलावा, स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को भारत सरकार अन्य शानदार इंसेंटिव ऑफर्स भी दे रही है।
A massive boost to ‘Make in India’ and our electronics manufacturing ecosystem!
The Cabinet’s approval of the Mobile Phone Manufacturing Scheme, with an outlay of Rs. 62,500 crore will scale up production, deepen domestic value addition, strengthen supply chains and create a…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 15, 2026
Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन के प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है। इसके लिए मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप होगी और डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सप्लाई चेन भी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
इन सब के साथ इस स्कीम के तहत सरकार की योजना है कि भारत स्मार्टफोन ब्रांड्स बना सके। इसके अलावा, स्मार्टफोन डिजाइन व रिसर्च डेवलपमेंट में अपना पेटेंट हासिल कर सके।
आपको बता दें, यह स्कीम 5 साल के लिए लागू होगी, जिसमें यह साल 2026-2027 से लेकर 2030 से 2031 तक जारी रहेगी।
ऑफर्स की बात करें, तो सरकार ने फोन बनाने वाली कंपनियों के लिए कई शानदार इंसेंटिव ऑफर्स निकाले हैं। ऑफर्स के तहत इस स्कीम के जरिए भारत में फोन बनाने वाली कंपनियों को उनकी बिक्री पर 2.25 से लेकर 5 प्रतिशत तक का इंसेंटिव भी दिया जाएगा।
इसके अलावा, जो कंपनियां फोन में इस्तेमाल होने वाले कॉम्पोनेंट्स को भारत के अंदर से ही सोर्स करेंगी, उन्हें अलग से 1.5 प्रतिशत तक का इंसेंटिव मिलेगा।
सरकार का दावा है कि यह स्कीम देश में 60,000 से ज्यादा डायरेक्ट जॉब भी जनरेट करेगी।
आपको बता दें, भारत सरकार ने साल 2020 में PLI (Production Linked Incentive) स्कीम शुरू की थी। इस स्कीम का उद्देश्य भारत में विदेशी आयात को कम से कम करना और देश में ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन बढ़ाकर रोजगार बढ़ाना है। इस स्कीम के तहत कोई भी कंपनी प्रोडक्शन बढ़ाकर अपने लक्ष्यों को पूरा करती है, तो सरकार उसे इंसेंटिव प्रोवाइड करती थी। मोबाइल प्रोडक्शन के लिए PLI स्कीम का फर्स्ट स्टेज 31 मार्च 2026 को खत्म हो गया है। इसी क्रम में अब सरकार ने MPMS को मंजूरी दी है।