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US-Israel-Iran War: क्या होती GPS Jamming, कैसे काम करती है और युद्ध में कहां किया जा रहा इसका यूज?

GPS Jamming एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो सैटेलाइट से आने वाले लोकेशन सिग्नल को बाधित कर देती है। इसका यूज आज के युद्ध में तेजी से बढ़ रहा है। इससे ड्रोन, मिसाइल और समुद्री जहाज अपनी सही दिशा से भटक जाते हैं। आइए जानते हैं इस टेक्नोलॉजी के बारे में सब कुछ...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Mar 24, 2026, 06:36 PM (IST)

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ईरान, इजराइल और USA के बीच चल रहे युद्ध में एक हथियार ‘GPS Jamming’ की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। GPS जैमिंग एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी है, जो सैटेलाइट से आने वाले लोकेशन सिग्नल को बाधित या ब्लॉक कर देती है। आज के समय में GPS सिर्फ गूगल मैप या मोबाइल लोकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ड्रोन, मिसाइल, जहाज और विमानों की दिशा तय करने का एक बेहद अहम सिस्टम बन चुका है। ऐसे में अगर इस सिस्टम को ही कन्फ्यूज कर दिया जाए, तो दुश्मन के हथियार अपने लक्ष्य तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाते। यही वजह है कि मौजूदा समय में GPS जैमिंग की इतनी चर्चा हो रही है।

कैसे काम करता है GPS Jamming?

GPS सिग्नल बहुत ही कमजोर होते हैं, जो सैटेलाइट से धरती तक आते हैं। जैमर डिवाइस इन सिग्नल्स से ज्यादा ताकतवर रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल छोड़ता है, जिससे असली GPS सिग्नल दब जाता है। जब ऐसा होता है तो मोबाइल, ड्रोन या मिसाइल को सही लोकेशन की जानकारी नहीं मिल पाती और वह गलत दिशा में जाने लगती है। कई बार जैमिंग के साथ ‘Spoofing’ टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल होता है, जिसमें डिवाइस को नकली लोकेशन दिखाकर पूरी तरह भ्रमित कर दिया जाता है। इसका सीधा असर यह होता है कि कोई ड्रोन अपने टारगेट से कई किलोमीटर दूर गिर सकता है या कोई मिसाइल गलत जगह जाकर नुकसान कर सकती है। यही कारण है कि आधुनिक युद्ध में GPS जैमिंग को एक सस्ता लेकिन बेहद प्रभावी हथियार माना जाता है।

युद्ध में GPS जैमिंग का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है?

इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा असर समुद्री जहाजों और हवाई जहाजों पर पड़ता है। बड़े जहाज अपना रास्ता तय करने के लिए GPS और AIS (Automatic Identification System) पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जब GPS सही काम नहीं करता तो AIS भी गलत जानकारी देने लगता है, खासकर Strait of Hormuz जैसे समुद्री रास्तों में यह बहुत खतरनाक हो सकता है। यह जगह बहुत ज्यादा बिजी रहती है, जहां हर समय कई समुद्री जहाज चलते हैं। अगर यहां थोड़ी सी भी गलती हो जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसी डर से कई शिपिंग कंपनियां अपनी स्पीड कम कर देती हैं या काम रोक देती हैं। हवाई जहाजों पर भी इसका असर पड़ता है, हवाई जहाज GPS के जरिए अपनी लोकेशन और रास्ता तय करते हैं, खासकर जब मौसम खराब हो या लैंडिंग करनी हो, अगर GPS में गड़बड़ी हो जाए तो पायलट को सही जानकारी नहीं मिलती और वह कन्फ्यूज हो सकता है, हालांकि हवाई जहाजों में INS (Inertial Navigation System) जैसे बैकअप सिस्टम होते हैं, जो बिना GPS के भी दिशा बता सकते हैं।

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क्या GPS Jamming से आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ता है असर?

GPS जैमिंग का असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। अगर किसी क्षेत्र में GPS सिग्नल को जानबूझकर बाधित किया जाता है, तो वहां मोबाइल फोन में गलत लोकेशन दिख सकती है, कैब सर्विस और मैप्स ठीक से काम नहीं करेंगे और यहां तक कि हवाई जहाज या जहाजों के नेविगेशन सिस्टम में भी दिक्कत आ सकती है। यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर तब जब सुरक्षा और परिवहन पूरी तरह GPS पर निर्भर हों। इसलिए जहां एक तरफ यह टेक्नोलॉजी सैन्य दृष्टि से यूजफुल है, वहीं दूसरी तरफ इसके गलत इस्तेमाल से बड़े स्तर पर अव्यवस्था भी फैल सकती है।