comscore

2026 में Starlink सभी सैटेलाइट्स को निचली कक्षा में ले जाएगा, भारत लॉन्च से पहले बढ़ाई जा रही है अंतरिक्ष सुरक्षा

2026 में Starlink अपनी सभी सैटेलाइट्स को निचली कक्षा में भेजेगा ताकि अंतरिक्ष में सुरक्षा बढ़े और टकराव का खतरा कम हो। यह कदम भारत में सेवा शुरू करने से पहले लिया गया है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jan 02, 2026, 06:50 PM (IST)

  • whatsapp
  • twitter
  • facebook
  • whatsapp
  • twitter
  • facebook

Starlink कंपनी ने 2026 में अपने सभी सैटेलाइट्स को धरती के पास निचली कक्षा में भेजने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि ये सैटेलाइट्स अब 500 किलोमीटर से नीचे उड़ेंगे। इसका मुख्य मकसद है अंतरिक्ष में सुरक्षा बढ़ाना और सैटेलाइट्स के टकराने का खतरा कम करना। कंपनी के अनुसार, निचली कक्षा में अब तक बहुत कम अंतरिक्ष मलबा है और वहां ज्यादा सैटेलाइट्स नहीं हैं। इससे Starlink की बड़ी सैटेलाइट फ्लीट सुरक्षित रूप से काम कर पाएगी। यह फैसला उस समय आया है जब कंपनी भारत में अपनी इंटरनेट सेवाएं शुरू करने वाली है। news और पढें: Starlink ने दी सफाई, इंडिया वेबसाइट पर दिखाई गई कीमतें थीं ‘Glitch’, लॉन्च की मंजूरी अभी बाकी

Starlink की सैटेलाइट अचानक खराब हो गई

पिछले महीने Starlink ने बताया कि एक सैटेलाइट 418 किलोमीटर ऊपर अचानक खराब हो गई। इसके साथ ही थोड़ी मात्रा में मलबा निकल गया और सैटेलाइट का पूरी तरह से कम्युनिकेशन टूट गया। रिपोर्ट के अनुसार यह सैटेलाइट कुछ ही समय में लगभग चार किलोमीटर नीचे गिर गई। ऐसा लगता है कि यह किसी अंदरूनी खराबी या छोटे विस्फोट की वजह से हुआ। ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं लेकिन इससे पता चलता है कि अंतरिक्ष में बड़ी सैटेलाइट फ्लीट को सुरक्षित तरीके से चलाना बहुत जरूरी है। news और पढें: Starlink ने भारत में सब्सक्रिप्शन प्राइस किया रिवील, कितनी होगी कीमत और ये मिलेंगे फीचर्स

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने क्या कहा

Starlink की यह सुरक्षा वाली योजना भारत में सेवा शुरू होने के समय और भी जरूरी हो जाती है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा तभी दी जाएगी, जब कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा के नियम मानें। इसके लिए डेटा कैसे भेजा जाएगा, अंतरराष्ट्रीय गेटवे का इस्तेमाल और संवेदनशील डेटा देश के अंदर ही रहना जरूरी है। इसके अलावा कंपनियों को सुरक्षा एजेंसियों के साथ सभी जरूरी प्रमाण-पत्र पूरे करने होंगे। news और पढें: Starlink भारत में लॉन्च से पहले हुई एक्टिव, 30-31 अक्टूबर को इस शहर में होगा डेमो

भारत में Starlink और बाकी सैटेलाइट सेवाएं कब शुरू होंगी

अब Starlink दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट ऑपरेटर बन गया है और इसके लगभग 10,000 सैटेलाइट्स हैं। भारत में Starlink के अलावा Eutelsat, OneWeb और Jio Satellite जैसी कंपनियां भी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। मंत्रालय ने कंपनियों को अस्थायी स्पेक्ट्रम दिया है ताकि वे दिखा सकें कि वे सुरक्षा नियमों का पालन कर रही हैं जैसे ही ये नियम पूरी तरह मान्य होंगे, भारत में इनकी सेवाएं शुरू हो जाएंगी।