Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Apr 09, 2026, 01:40 PM (IST)
PFBR First Criticality Explained
भारत के तमिलनाडु में बने Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) ने पहली बार ‘First Criticality’ हासिल कर ली है। इसका मतलब है कि अब यह रिएक्टर अपने आप लगातार न्यूक्लियर एनर्जी पैदा कर सकता है। आसान भाषा में समझें तो, यह रिएक्टर जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा नया ईंधन भी बना सकता है, यही इसकी सबसे खास बात है। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि अब देश अपने Thorium (एक तरह का Nuclear Fuel) का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा, जो भारत में काफी मात्रा में मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे देश के न्यूक्लियर प्रोग्राम में एक बड़ा और अहम कदम बताया और इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सराहना की।
भारत का Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित है। यह एक ऐसा न्यूक्लियर रिएक्टर है जो जितना Fissile material (जैसे Plutonium) इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा नया Fissile material Generate करता है, मतलब यह रिएक्टर अपनी जरूरत से ज्यादा ईंधन बना सकता है। यह सामान्य थर्मल रिएक्टर से अलग है क्योंकि यह Fast Neutrons का इस्तेमाल करता है, जो फिशन रिएक्शन को तेज और असरदार बनाते हैं।
न्यूक्लियर रिएक्टर में फर्स्ट क्रिटिकलिटी वह पहला कदम है जब रिएक्टर अपने आप लगातार एनर्जी बनाने लगता है। इसका मतलब है कि रिएक्टर में जो न्यूट्रॉन्स निकलते हैं और जो न्यूट्रॉन्स खो जाते हैं, उनकी संख्या बराबर हो जाती है। यह स्टेज दिखाती है कि रिएक्टर सुरक्षित तरीके से चलने के लिए तैयार है और अब अगले ऑपरेशन स्टेप्स शुरू किए जा सकते हैं।
PFBR को इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR) ने डेवलप किया है। यह रिएक्टर Uranium-Plutonium Mixed Oxide (MOX) ईंधन का इस्तेमाल करता है। इसमें लिक्विड सोडियम कूलेंट के रूप में प्रयोग होता है, जो हाई टेंपरेचर पर भी रिएक्टर को सुरक्षित रखता है। इसे क्लोज्ड फ्यूल साइकिल रिएक्टर कहा जाता है क्योंकि इसमें इस्तेमाल हो चुका ईंधन फिर से रीसाइकिल और रिफाइन किया जाता है।
Federal Budget 2025-26 में सरकार ने बताया कि 2047 तक भारत का लक्ष्य 100GW न्यूक्लियर पावर जनरेशन का है। इसके लिए न्यूक्लियर एनर्जी मिशन ने Rs. 20,000 करोड़ का बजट रखा है ताकि Small Modular Reactors (SMRs) को डिजाइन, डेवलप और ऑपरेशनल किया जा सके। उम्मीद है कि 2033 तक कम से कम 5 SMRs चालू हो जाएंगे।
भारत का न्यूक्लियर प्रोग्राम धीरे-धीरे देश की बिजली की जरूरत पूरी करने में मदद कर रहा है। अभी यह लगभग 8.78GW बिजली पैदा कर रहा है। पिछले साल भारतीय न्यूक्लियर पावर प्लांट्स ने 56,681 मिलियन यूनिट बिजली बनाई, जो देश की कुल बिजली का 3.1% है। अगर नए 700MW और 1000MW रिएक्टर बनते हैं, तो 2032 तक न्यूक्लियर बिजली 22.38GW तक पहुंच सकती है।