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भारत ने बना ली सुपरफास्ट हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी, DRDO ने की सफल टेस्टिंग

भारत ने रक्षा टेक्नोलॉजी में बड़ी कामयाबी हासिल की है। DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल से जुड़े खास इंजन का सफल टेस्ट किया है। यह टेस्ट 1200 सेकंड से ज्यादा चला, इस सफलता से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी तेज और आधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी मौजूद है। आइए जानते हैं...

Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 11, 2026, 12:09 PM (IST)

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भारत ने रक्षा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation यानी DRDO ने हैदराबाद में हाइपरसोनिक मिसाइल इंजन से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 9 मई को किया गया और खास बात यह रही कि यह 1200 सेकंड से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक चला, माना जा रहा है कि यह भारत के Hypersonic Missile Program के लिए अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। दुनिया के बहुत कम देशों के पास ऐसी टेक्नोलॉजी मौजूद है ।

हाइपरसोनिक मिसाइल आखिर इतनी खास क्यों मानी जाती है?

हाइपरसोनिक मिसाइल को आज की सबसे आधुनिक और ताकतवर सैन्य टेक्नोलॉजी में माना जाता है। ये मिसाइलें आवाज की रफ्तार से पांच गुना ज्यादा तेज उड़ सकती हैं। इतनी तेज स्पीड होने की वजह से दुश्मन के लिए इन्हें पकड़ना या रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस टेक्नोलॉजी में स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजन हवा से ही ऑक्सीजन लेकर मिसाइल को काफी तेज रफ्तार देता है। आसान शब्दों में कहें तो यह इंजन मिसाइल को बहुत कम समय में बहुत लंबी दूरी तय करने में मदद करता है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े देश इस टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में लगे हुए हैं।

नए स्क्रैमजेट टेस्ट में क्या खास उपलब्धि मिली?

DRDO के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह नया टेस्ट पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सफल रहा। इससे पहले जनवरी 2026 में भी इसी टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया गया था, लेकिन तब इंजन करीब 700 सेकंड तक ही चल पाया था। इस बार यह टेस्ट 1200 सेकंड से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक चला, जिसे भारत की रक्षा टेक्नोलॉजी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस इंजन में इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी पूरी तरह भारत में तैयार की गई है। इसे खास मजबूत मटेरियल और नई टेक्नोलॉजी से बनाया गया है, ताकि यह बहुत ज्यादा गर्मी और तेज दबाव को आसानी से झेल सके।

भारत के लिए यह टेक्नोलॉजी कितनी महत्वपूर्ण साबित होगी?

भारत के लिए यह सफलता केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं बल्कि आत्मनिर्भर रक्षा टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी स्पीड और दिशा बदलने की क्षमता होती है। ये मिसाइलें उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम इन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाते। यही कारण है कि रूस, चीन और अमेरिका जैसे देश पहले से इस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहे हैं। अब भारत भी इस रेस में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

रक्षा मंत्री और DRDO प्रमुख ने क्या कहा?

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता पर DRDO के वैज्ञानिकों और रिसर्च टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और भविष्य में देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगी। वहीं DRDO के चेयरमैन Samir V Kamat ने भी वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री पार्टनर्स की सराहना की, उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रक्षा अनुसंधान की ताकत और क्षमता को दर्शाती है। हाल के वर्षों में भारत ने कई नई मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम तेज किया है। इससे पहले भारत ने अग्नि मिसाइल की MIRV टेक्नोलॉजी का भी सफल परीक्षण किया था, जिसमें एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर वार कर सकती है।

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भारत की इस सफलता से भविष्य में क्या बदल सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदल सकती है। भारत की यह सफलता देश को रक्षा और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में नई पहचान दिला सकती है। इसके जरिए भारत विदेशी टेक्नोलॉजी पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और भविष्य में अत्याधुनिक हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बन पाएगा।