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सूरज की रोशनी Space में होगी कैद, फिर वैज्ञानिक इस एनर्जी को सीधे धरती पर भेजकर बनाएंगे बिजली

वैज्ञानिक ऐसी नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जिसमें अंतरिक्ष में लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाएंगे और उसे धरती तक भेजेंगे। अगर यह टेक्नोलॉजी सफल हुई, तो दुनिया को लगातार कभी खत्म न होने वाली एनर्जी मिल सकती है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jul 02, 2026, 10:44 AM (IST)

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अगर भविष्य में अंतरिक्ष से सीधे धरती पर बिजली भेजना संभव हो जाए, तो यह ऊर्जा की दुनिया में बड़ी क्रांति ला सकता है। वैज्ञानिक ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जिसमें अंतरिक्ष में लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी से लगातार बिजली बनाएंगे और फिर उसे धरती पर भेजेंगे। अंतरिक्ष में न बादल होते हैं, न बारिश और न ही रात, इसलिए वहां सोलर पैनल लगभग 24 घंटे बिजली बना सकते हैं। इससे ज्यादा सस्ती एनर्जी मिल सकती है और कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधनों पर निर्भरता भी कम होगी, हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अंतरिक्ष में बनी बिजली को सुरक्षित तरीके से और कम नुकसान के साथ धरती तक कैसे पहुंचाया जाए। इसी का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिक दो नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।

क्या है पहली टेक्नोलॉजी?

पहला तरीका माइक्रोवेव टेक्नोलॉजी है। इसमें अंतरिक्ष में लगे सोलर पैनल पहले बिजली बनाएंगे, फिर इस बिजली को माइक्रोवेव सिग्नल में बदलकर धरती पर बने खास रिसीवर तक भेजा जाएगा। यह रिसीवर माइक्रोवेव सिग्नल को दोबारा बिजली में बदल देगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि माइक्रोवेव सिग्नल बादलों और खराब मौसम में भी आसानी से धरती तक पहुंच सकते हैं, जिससे लगातार बिजली मिल सकती है। हालांकि इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत है। इतने बड़े सैटेलाइट बनाना, उन्हें अंतरिक्ष में भेजना और बाद में उनकी मरम्मत करना बेहद मुश्किल और महंगा होगा।

क्या है दूसरी टेक्नोलॉजी?

दूसरा तरीका लेजर टेक्नोलॉजी है। इसमें अंतरिक्ष में बनी बिजली को इंफ्रारेड लेजर बीम की मदद से धरती पर भेजा जाएगा। इसके शुरुआती टेस्ट भी सफल रहे हैं। साल 2025 में अमेरिकी कंपनी Overview Energy ने विमान से लेजर के जरिए सोलर एनर्जी को जमीन पर मौजूद रिसीवर तक सफलतापूर्वक पहुंचाकर इसका प्रदर्शन किया था। इस टेक्नोलॉजी का फायदा यह है कि इसे माइक्रोवेव के मुकाबले ज्यादा सटीक और जरूरत के हिसाब से छोटा या बड़ा बनाया जा सकता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि लेजर की किरणें बादलों को आसानी से पार नहीं कर पातीं। इसलिए खराब मौसम में बिजली भेजना मुश्किल हो सकता है। इस समस्या को दूर करने के लिए अतिरिक्त रिसीवर या दूसरे सिस्टम लगाने पड़ सकते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था और मुश्किल हो जाएगी।

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क्या भविष्य में अंतरिक्ष से मिलने लगेगी कभी खत्म न होने वाली एनर्जी?

फिलहाल ये दोनों टेक्नोलॉजी अभी रिसर्च और टेस्टिंग के दौर में हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इनमें से कोई एक टेक्नोलॉजी बिजली बनाने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है। भविष्य में अंतरिक्ष में बने सोलर पावर स्टेशन धरती को लगातार साफ बिजली दे सकते हैं। इतना ही नहीं, इनसे चंद्रमा और दूसरे अंतरिक्ष मिशनों को भी एनर्जी मिल सकती है। अंतरिक्ष से भेजी गई एनर्जी को पहले धरती पर बने खास रिसीवर में बिजली में बदला जाएगा, फिर उसे घरों, फैक्ट्रियों और बिजली ग्रिड तक पहुंचाया जाएगा। अगर यह सफल रही, तो दुनिया को साफ, लगातार और लगभग कभी खत्म न होने वाली एनर्जी का नया स्रोत मिल सकता है।