Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Feb 24, 2026, 11:40 AM (IST)
Bharat Taxi
केंद्र सरकार ने कैब और ऑटो ड्राइवरों के लिए एक नया सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ‘Bharat Taxi’ शुरू किया है। इस योजना के तहत ड्राइवर सिर्फ 500 रुपये देकर इसके मेंबर और Co-Owner बन सकते हैं। सरकार का कहना है कि अब तक प्राइवेट कंपनियां जैसे Ola, Uber और Rapido तेजी से बड़ी कंपनियां बनीं लेकिन ड्राइवरों की आमदनी तय और सुरक्षित नहीं रही। Bharat Taxi मॉडल का मकसद यही स्थिति बदलना है, ताकि प्लेटफॉर्म की कमाई का सीधा फायदा ड्राइवरों को मिले सके। और पढें: Bharat Taxi में Paytm से झटपट UPI पेमेंट शुरू, Uber-Ola को मिलेगी कड़ी टक्कर
इस प्लेटफॉर्म को लॉन्च करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने Delhi-NCR और गुजरात के ड्राइवरों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि Bharat Taxi का मूल विचार यह है कि जब प्लेटफॉर्म कमाए, तो उसका फायदा सीधे ड्राइवरों तक पहुंचे। योजना के अनुसार कुल मुनाफे का 80% हिस्सा ड्राइवरों में बांटा जाएगा, जो उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर होगा। बाकी 20% राशि ऑर्गनाइजेशन रखेगी। सरकार का कहना है कि यह मॉडल प्राइवेट कंपनियों से अलग होगा, जहां मुनाफा कंपनी के पास जाता है और ड्राइवरों की आय अनिश्चित रहती है। और पढें: Bharat Taxi: ये App आज हो गई लॉन्च, Uber-Ola को मिलेगी कड़ी टक्कर
अमित शाह ने यह भी बताया कि सरकार ड्राइवरों की न्यूनतम कमाई सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा कंपनियों से पूछा गया था कि क्या उन्होंने ड्राइवरों के लिए कोई न्यूनतम बेस रेट तय किया है, लेकिन ऐसा नहीं है। Bharat Taxi में ड्राइवर 500 रुपये देकर एक शेयर खरीद सकते हैं और सहकारी संस्था के मेंबर बन सकते हैं। मेंबर बनने के बाद ड्राइवरों को बोर्ड में अपनी बात रखने का हक मिलेगा, जिससे वे नीतियों पर सवाल उठा सकेंगे और अपने हितों की रक्षा कर सकेंगे। उदाहरण देते हुए शाह ने Amul का जिक्र किया, जो छोटे निवेश से शुरू होकर आज एक बड़ी सहकारी संस्था बन चुकी है। उनका कहना था कि Bharat Taxi भी उसी तर्ज पर काम करेगा। और पढें: सरकार ने लॉन्च की Bharat Taxi, जानिए कैसे ये Ola-Uber से अलग है?
Bharat Taxi को फिलहाल Delhi-NCR और राजकोट में शुरू किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में 15 करोड़ ड्राइवरों को जोड़ा जाए और तीन साल के भीतर देश के सभी नगर निगम वाले शहरों तक सेवा पहुंचाई जाए। हालांकि सरकार ने माना है कि इस मॉडल को पूरी तरह सफल होने में करीब तीन साल लग सकते हैं। 5 फरवरी को दो महीने के पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया है और इसे आठ सहकारी संगठनों का समर्थन प्राप्त है।