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भारत सरकार का बड़ा फैसला, बिना SIM बिल्कुल नहीं चलेगा WhatsApp, जल्द लागू होगा ये सख्त नियम

WhatsApp बिना SIM कार्ड के चल ही नहीं पाएगा, सरकार एक नया सख्त नियम जल्द लागू करने वाली है, जिसके बाद हर यूजर को अपना SIM हमेशा एक्टिव रखना होगा। आखिर क्यों लाया जा रहा है ये बड़ा बदलाव? आइए जानते हैं…

Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Nov 30, 2025, 11:34 AM (IST)

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भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अब मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat और Arattai को नए सुरक्षा निर्देश दिए हैं। Department of Telecommunications (DoT) ने कहा है कि अब इन ऐप्स को तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा जब फोन में active SIM कार्ड मौजूद हो। यह आदेश Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत जारी किया गया है। अब पहली बार ऐप-बेस्ड मैसेजिंग सेवाओं को भी टेलीकॉम की तरह रेगुलेट किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर रोक लगेगी, क्योंकि हर यूजर की ऐप एक्टिविटी सीधे एक वैध SIM कार्ड से जुड़ी होगी।

हर 6 घंटे में WhatsApp Web होगा ऑटोमेटिकली लॉगआउट

नए नियम के अनुसार, मैसेजिंग ऐप्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर का SIM कार्ड लगातार ऐप से लिंक रहे और इसके लिए ऐप्स को 90 दिनों का समय दिया गया है। अगर कोई यूजर WhatsApp या Telegram को वेब ब्राउजर पर चलाता है तो इसमें भी बदलाव किया गया है। अब हर 6 घंटे में वेब से यूजर को ऑटोमेटिकली लॉगआउट किया जाएगा और दोबारा लॉगइन करने के लिए QR कोड स्कैन करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इससे अपराधियों के लिए दूर बैठकर किसी का अकाउंट चलाना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि हर सेशन को एक एक्टिव SIM के साथ वेरिफाई करना जरूरी होगा। पहले ऐप्स सिर्फ इंस्टॉलेशन के समय नंबर वेरिफाई करते थे, जिसके बाद SIM निकाल देने पर भी ऐप चालू रहता था।

सरकार क्यों लाई यह व्यवस्था?

DoT ने बताया कि अभी तक मैसेजिंग ऐप्स SIM कार्ड सिर्फ एक बार वेरिफाई करते हैं, जिससे कई तरह के साइबर अपराधों के रास्ते खुल जाते हैं। कई फ्रॉड करने वाले लोग SIM बंद होने या बदलने के बाद भी वही ऐप इस्तेमाल करते रहते हैं, जिससे उनकी लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड या कैरियर डेटा ट्रेस करना बेहद कठिन हो जाता है। Cellular Operators Association of India (COAI) ने कहा कि लगातार SIM लिंक रहने से यूजर, नंबर और डिवाइस के बीच ट्रेसबिलिटी बनी रहेगी। इससे स्पैम मैसेज, फ्रॉड कॉल, फेक अकाउंट और ऑनलाइन स्कैम को रोकने में मदद मिलेगी, जैसे UPI और बैंकिंग ऐप्स में SIM वेरिफिकेशन की पक्की व्यवस्था है, उसी तरह मैसेजिंग ऐप्स पर भी सख्ती जरूरी है।

क्या कह रहे हैं साइबर विशेषज्ञ और इसकी चुनौतियां?

हालांकि सरकार का दावा है कि यह कदम सुरक्षा के लिए जरूरी है लेकिन कई साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी फर्जी डॉक्यूमेंट देकर नए SIM आसानी से निकाल लेते हैं, इसलिए SIM-बेस्ड वेरिफिकेशन से धोखाधड़ी पूरी तरह नहीं रुकेगी। दूसरी तरफ टेलीकॉम इंडस्ट्री का कहना है कि मोबाइल नंबर भारत में सबसे भरोसेमंद डिजिटल पहचान हैं और इनका यूज करके सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। असली चुनौती अब ऐप कंपनियों के सामने है क्या वे यूजर एक्सपीरियंस या प्राइवेसी को प्रभावित किए बिना इस सिस्टम को लागू कर पाएंगी? लाखों यूजर्स को अब वेब पर बार-बार लॉगइन करना पड़ेगा और अगर SIM बंद या इनएक्टिव हुआ तो ऐप भी बंद हो जाएगा। आने वाले महीनों में पता चलेगा कि यह बदलाव लोगों के लिए कितना आसान या परेशानी भरा साबित होता है।