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हिंद महासागर की गहराई में मिला रहस्यमयी कब्रिस्तान, वैज्ञानिक भी हुए हैरान

हिंद महासागर की गहराइयों में वैज्ञानिकों को एक ऐसी रहस्यमयी जगह मिली है, जहां बड़ी संख्या में व्हेलों के अवशेष और लाखों साल पुराने Fossils मौजूद हैं। इस इलाके को 'Whale Necropolis' कहा जा रहा है। यह खोज समुद्र की गहराइयों में मौजूद अनोखे जीवों, व्हेलों के इतिहास और पृथ्वी के प्राचीन समुद्री जीवन को समझने में अहम साबित हो सकती है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 15, 2026, 10:42 AM (IST)

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पृथ्वी की लगभग 70% सतह महासागरों से ढकी हुई है, लेकिन समुद्र की तलहटी का बड़ा हिस्सा आज भी रहस्यों से भरा हुआ है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर की गहराइयों में एक ऐसी जगह की खोज की है, जिसे उन्होंने ‘Whale Necropolis’ यानी व्हेलों का कब्रिस्तान नाम दिया है। यह खोज Southeastern Indian Ocean के डायमंटिना जोन में हुई है। यहां समुद्र की गहराई में बड़ी संख्या में मृत व्हेलों के अवशेष मिले हैं, जिनके आसपास एक अनोखा समुद्री Ecosystem डेवलप हो चुका है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दुनिया के सबसे गहरे व्हेल-फॉल इकोसिस्टम में से एक है, जहां मृत व्हेलों के शरीर कई समुद्री जीवों के लिए भोजन का स्रोत बनते हैं।

मृत व्हेलों के आसपास कौन-कौन से जीव रहते हैं?

वैज्ञानिकों के मुताबिक जब कोई व्हेल समुद्र की गहराई में मरकर नीचे डूब जाती है, तो उसका शव कई दशकों तक दूसरे समुद्री जीवों के लिए भोजन का बड़ा स्रोत बना रहता है। इस इलाके में व्हेलों की हड्डियों और अवशेषों पर बड़ी संख्या में ब्रिटल स्टार, हड्डियां खाने वाले कीड़े और क्लैम जैसे जीव मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यहां कुछ ऐसे जीव भी हो सकते हैं, जिन्हें विज्ञान ने पहले कभी नहीं देखा या दर्ज किया है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई जीव शायद खासतौर पर व्हेलों के शवों के आसपास रहने और भोजन पाने के लिए ही डेवलप हुए हैं। यह खोज वैज्ञानिकों को समुद्र की गहराइयों में जीवन कैसे डेवलप होता है, इसे बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी।

करोड़ों साल पुराने Whale Fossil क्यों हैं खास?

इस खोज की सबसे खास बात सिर्फ हाल में मरी हुई व्हेलों के अवशेष नहीं हैं, बल्कि यहां बड़ी संख्या में बेहद पुराने व्हेल Fossils भी मिले हैं। वैज्ञानिक अब तक 476 व्हेल Fossils की पहचान कर चुके हैं, जिनमें से कुछ करीब 53 लाख साल पुराने हैं। हैरानी की बात यह है कि इन Fossils को खोजने के लिए ज्यादा खुदाई नहीं करनी पड़ी, क्योंकि ये समुद्र की तलहटी पर पत्थरों जैसी आकृतियों में दिखाई दे रहे थे। इसी खोज के दौरान वैज्ञानिकों को व्हेल की एक नई और पहले कभी न देखी गई प्रजाति का Fossils भी मिला, जिसे Pterocetus Diamantinae नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज उन्हें करोड़ों साल पहले समुद्र में रहने वाले जीवों और उनके विकास को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी।

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यह रहस्यमयी व्हेल कब्रिस्तान कैसे बना होगा?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज अभी केवल शुरुआत है। अब तक केवल 0.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का ही सर्वे किया गया है, जबकि डायमंटिना जोन लगभग 1200 किलोमीटर तक फैला हुआ है। ऐसे में यहां सैकड़ों या हजारों और Fossils छिपे हो सकते हैं। शोधकर्ता अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में व्हेलों के अवशेष एक ही इलाके में कैसे जमा हुए। एक सिद्धांत के अनुसार समुद्री धाराओं और समुद्र की विशेष भौगोलिक बनावट ने व्हेलों के शवों को इस क्षेत्र में पहुंचाकर जमा कर दिया होगा। अगर यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो भविष्य में वैज्ञानिक दुनिया के बाकी हिस्सों में भी ऐसे प्राचीन व्हेल कब्रिस्तानों की खोज कर सकते हैं। यह खोज समुद्री जीवन, व्हेलों के विकास और पृथ्वी के प्राचीन इतिहास को समझने में नई जानकारी दे सकती है।