Written By Ashutosh Ojha
Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jul 16, 2026, 10:30 AM (IST)
How Do Rockets Fly in Space
कभी आपने सोचा है रॉकेट अंतरिक्ष में कैसे उड़ते हैं, बल्कि वहां तो हवा भी नहीं होती। हालांकि कई लोगों को लगता हैं ये भी हवाई जहाज वाले कॉन्सेप्ट पर उड़ते होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हैं। दरअसल, हवाई जहाज अपने पंखों के ऊपर और नीचे बहने वाली हवा की वजह से उड़ान भरते हैं। वहीं रॉकेट अपने इंजन की जबरदस्त ताकत से आगे बढ़ते हैं। इसी ताकत को थ्रस्ट कहा जाता है। यही वजह है कि ज्यादातर रॉकेट में एरोप्लेन की तरह पंख नहीं होते। उनका मकसद हवा में उड़ना नहीं, बल्कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंचना होता है।
रॉकेट का साइंस न्यूटन के तीसरे नियम पर काम करता है। जिसमें कहा गया है कि हर क्रिया की बराबर और उलटी प्रतिक्रिया होती है। जब रॉकेट का इंजन बहुत तेजी से गर्म गैसों को नीचे की ओर बाहर फेंकता है, तो उसी ताकत से रॉकेट ऊपर की ओर उठता है। इस धक्के को थ्रस्ट कहा जाता है। यही थ्रस्ट रॉकेट को आसमान की ओर ले जाता है। बता दें रॉकेट अपने इंजन का नोजल को घूमाकर दिशा भी बदल सकता है। इस टेक्नोलॉजी को गिम्बलिंग (Gimbaling) कहते हैं। अंतरिक्ष में सही कक्षा (Orbit) तक पहुंचने के लिए रॉकेट को करीब 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल करनी पड़ती है।
जब रॉकेट अंतरिक्ष में जाता है तो उसे पृथ्वी के अंदर हवा काफी रोकती है। इस एयर रेजिस्टेंस को Drag कहा जाता है। इसकी वजह से इसे ऊपर जाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। इसलिए वैज्ञानिक इसका आकार ऐसा बनाते हैं कि हवा का असर उस पर कम से कम हो और ये तेजी से उड़े। वहीं रॉकेट ऊपर जाता है, हवा पतली होती जाती है और यह रुकावट भी कम होने लगती है। अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद तो हवा बिल्कुल नहीं होती। ऐसे में रॉकेट का इंजन और बेहतर तरीके से काम करता है और पहले से ज्यादा थ्रस्ट पैदा कर सकता है।
जब कोई अंतरिक्ष यान, जैसे स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल, अंतरिक्ष में पहुंच जाता है, तो उसे दिशा बदलने के लिए हवा की जरूरत नहीं होती। इसके लिए उसमें रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS) लगाया जाता है। इसमें कई छोटे-छोटे इंजन (थ्रस्टर) लगे होते हैं। जब इसे को दाएं-बाएं घुमाना हो, उसकी दिशा बदलनी हो या उसकी स्पीड को थोड़ा नियंत्रित करना हो, तो ये छोटे इंजन कुछ सेकंड में चालू हो जाते हैं।