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NASA ने बनाई खास टेक्नोलॉजी, क्या अब चांद पर बसने का सपना होगा सच?

NASA ने एक खास टेक्नोलॉजी की सफल टेस्टिंग शुरू कर दी है, जो चांद और मंगल पर बिजली, पानी और एनर्जी की समस्या को हल करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 02, 2026, 10:06 AM (IST)

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NASA ने हाल ही में एक नई टेक्नोलॉजी पर प्रयोग किया है जिसे ‘Regenerative Fuel Cell’ कहा जाता है। यह टेक्नोलॉजी भविष्य में चांद और मंगल पर लंबे समय तक इंसानी बस्तियां बसाने में बहुत मदद कर सकती है। यह सिस्टम एक तरह की रिचार्जेबल बैटरी की तरह काम करता है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली, गर्मी और पानी बनाया जाता है, फिर इस प्रक्रिया को उलटकर पानी से दोबारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तैयार किया जा सकता है, जिससे इसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। NASA का मानना है कि यह टेक्नोलॉजी अंतरिक्ष मिशनों के लिए बहुत यूदफुल साबित हो सकती है।

यह टेक्नोलॉजी कहां और कैसे टेस्ट की जा रही है?

NASA का यह प्रयोग अमेरिका के Ohio स्थित Glenn Research Center के Fuel Cell Testing Laboratory में किया जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिस्टम काफी बड़ा है, लगभग एक छोटी कार के आकार जितना और इसमें सैकड़ों सेंसर और हजारों हिस्से लगे हैं, फिर भी यह समान क्षमता वाली बैटरियों की तुलना में हल्का है, जो अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक बड़ा फायदा है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से चांद पर उन जगहों पर भी एनर्जी उपलब्ध कराई जा सकती है जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती, जैसे चांद का अंधेरा हिस्सा, जहां 14 दिन लंबी रात होती है।

यह फ्यूल सेल कैसे काम करता है और इसमें क्या चुनौतियां हैं?

इस सिस्टम को चार्ज करने के लिए सोलर पैनल या किसी बाहरी एनर्जी स्रोत की जरूरत होती है, जो पानी को वापस हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बदल देता है। हालांकि अभी इसकी Efficiency में कुछ कमी है, लेकिन वैज्ञानिक लगातार इसे बेहतर बनाने में लगे हुए हैं। NASA के इंजीनियर Dr. Kerrigan Cain के अनुसार यह टेक्नोलॉजी भविष्य के चंद्र मिशनों, रोवरों और अंतरिक्ष आवासों (habitats) के लिए बहुत जरूरी हो सकती है। NASA ने इसके डेवलपमेंट के लिए कुछ निजी कंपनियों जैसे Giner Inc. और Infinity Fuel Cell and Hydrogen Inc. के साथ भी पार्टनरशिप की है।

यह टेक्नोलॉजी भविष्य के Moon Mission में कैसे मदद करेगी?

यह टेक्नोलॉजी NASA के Artemis Mission का एक जरूरी हिस्सा बन सकती है, जिसका लक्ष्य 2028 तक फिर से इंसानों को चांद पर उतारना है और आगे चलकर 2030 तक एक स्थायी चंद्र आधार (Lunar Base) बनाना है। चांद पर तापमान बहुत ज्यादा बदलता है और वहां एनर्जी की स्थायी व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह फ्यूल सेल सिस्टम लंबे समय तक Energy Storage और Supply का समाधान दे सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह टेक्नोलॉजी सफल होती है, तो यह भविष्य में चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

FAQ

NASA की नई Regenerative Fuel Cell टेक्नोलॉजी क्या है?

यह एक खास Energy System है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली, गर्मी और पानी बनाती है। बाद में पानी को फिर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बदलकर इस प्रक्रिया को दोहराया जा सकता है।

यह टेक्नोलॉजी चांद और मंगल पर क्यों जरूरी मानी जा रही है?

चांद और मंगल पर लगातार बिजली और पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है। यह सिस्टम लंबे समय तक एनर्जी स्टोर और सप्लाई करने में मदद कर सकता है।

NASA इस टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग कहां कर रहा है?

NASA इस टेक्नोलॉजी का टेस्टिंग अमेरिका के Ohio स्थित Glenn Research Center की Fuel Cell Testing Laboratory में कर रहा है।

क्या यह टेक्नोलॉजी चांद के अंधेरे हिस्सों में भी काम कर सकती है?

इसका एक बड़ा फायदा यह है कि यह एनर्जी को स्टोर कर सकती है, जिससे चांद के उन क्षेत्रों में भी बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है जहां लंबे समय तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती।

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क्या यह टेक्नोलॉजी भविष्य में चांद पर इंसानी बस्ती बसाने में मदद करेगी?

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह टेक्नोलॉजी पूरी तरह सफल रहती है, तो यह चांद पर स्थायी बेस, रोवर और अंतरिक्ष आवासों को एनर्जी देने में जरूरी भूमिका निभा सकती है, जिससे इंसानी बस्ती बसाने का सपना हकीकत के करीब पहुंच सकता है।