Written By Ajay Verma
Published By: Ajay Verma | Published: Mar 29, 2023, 07:40 PM (IST)
दिग्गज टेक ब्रांड Microsoft ने साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित चैटबॉट को रिलीज किया है, जिसका नाम Security Copilot है। इस स्पेशल चैटबॉट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह यूजर्स को महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने और ठीक करने में मदद करता है। कंपनी का मानना है कि इस चैटबॉट के आने से साइबर सिक्योरिटी अलग स्तर पर पहुंच जाएगी। और पढें: Windows 10 और 11 यूज करने वालों के लिए चेतावनी, CERT-In ने जारी किया अलर्ट, तुरंत करना होगा ये काम
नया चैटबॉट Security Copilot ओपन एआई के लेटेस्ट GPT-4 से लैस है। यह चैटबॉट कंपनी के सिक्योरिटी एनवायरनमेंट की पहचान करके सहायता प्रदान करता है। इतना ही नहीं माइक्रोसॉफ्ट का चैटबॉट पावरप्वाइंट स्लाइड बनाने में सक्षम है। वहीं, यह चैटबॉट साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के लिए मूल्यवान टूल बन सकता है। और पढें: Microsoft CEO Satya Nadella का बड़ा बयान, सिर्फ पढ़ाई से नौकरी नहीं बचेगी, ये क्वालिटी भी सीखना है जरूरी
कंपनी के मुताबिक, इंजीनियरों के लिए नया चैटबॉट गेम-चेंजर साबित हुआ है। इस चैटबॉट ने 1000 अर्ल्ट और महत्वपूर्ण खामियों का पता कुछ सेकेंड्स में लगाया है। यही नहीं चैटबॉट ने मैलिशियस कोड्स की भी पहचान की है। इसके आने से गूगल जैसी टेक कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलेगी। और पढें: Windows 11 यूजर्स के लिए बड़ी खबर, लॉक स्क्रीन पर पासवर्ड ऑप्शन नहीं दिख रहा, Microsoft ने बताई वजह
मीडिया रिपोर्ट की मानें, तो सिक्योरिटी कोपायलट चैटबॉट को टेस्टिंग के तौर पर चुनिंदा क्लाइंट के लिए रोलआउट किया गया है। आने वाले महीनों में इस चैटबॉट को सभी के लिए रिलीज किया जाएगा।
कोपायलट चैटबॉट रिलीज करने से पहले कंपनी ने Bing और Edge सर्च इंजन के लिए इमेज-क्रिएशन टूल Bing Image Creator को पेश किया था। इसकी खूबी है कि यूजर्स इस टूल की मदद से टेक्स्ट से पिक्चर बना सकते हैं। इसमें भी DALL-E में उपयोग किए जाने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कंपनी ने पिछले महीने Azure Operator Nexus को ग्लोबली लॉन्च किया था। इस प्लेटफॉर्म को खासतौर पर कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर्स और टेक कंपनियों के लिए बनाया गया है। कंपनी ने कहा कि लेटेस्ट क्लाउड सर्विस के इस्तेमाल से कंपनियां अपने खर्चे को कम कर सकेंगी और इससे उनके बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।