Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 29, 2026, 09:57 AM (IST)
Ethanol Stove
देश में लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अब यही एथेनॉल रसोई गैस का ऑप्शन भी बन सकता है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल बेस्ड स्टोव टेक्नोलॉजी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में यह टेक्नोलॉजी LPG सिलेंडर पर लोगों की निर्भरता कम कर सकती है। अगर यह बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो इससे रसोई का खर्च घटाने के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एथेनॉल स्टोव क्या है और यह LPG चूल्हे से कितना अलग और बेहतर हो सकता है।
दरअसल, एथेनॉल स्टोव एक आधुनिक कुकिंग सिस्टम है, जो गन्ने, मक्के और दूसरे बायोमास से तैयार किए गए एथेनॉल ईंधन पर काम करता है। इस स्टोव में लिक्विड या जेल फॉर्म में एथेनॉल डाला जाता है, जिसे खास बर्नर टेक्नोलॉजी की मदद से जलाया जाता है। दावा किया जा रहा है कि यह बिना धुएं, बदबू और कालिख के तेज आंच देता है। इसके कारण खाना पकाने के बाद बर्तन काले नहीं होते और रसोई भी साफ रहती है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, एथेनॉल जलने पर 700 से 800 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पैदा कर सकता है, जिससे खाना जल्दी पकाने में मदद मिलती है।
अगर LPG और एथेनॉल स्टोव की तुलना करें, तो एथेनॉल स्टोव को कई मामलों में बेहतर ऑप्शन माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें गैस लीक होने जैसी समस्या नहीं होती, जिससे यह सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित हो सकता है। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सिर्फ 1 लीटर एथेनॉल से करीब 15 घंटे तक तेज आंच मिल सकती है, जिससे ईंधन का खर्च भी कम हो सकता है। हालांकि, यह अवधि स्टोव की डिजाइन, बर्नर की क्षमता और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगी। दूसरी ओर LPG सिलेंडर की कीमतें समय-समय पर बदलती रहती हैं, जबकि एथेनॉल का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन होने पर इसकी लागत और कम हो सकती है।
फिलहाल एथेनॉल स्टोव नई टेक्नोलॉजी है और अभी इसे हर घर तक पहुंचने में समय लगेगा। इसके लिए एथेनॉल ईंधन की आसान उपलब्धता, स्टोव की सही कीमत और अच्छा सप्लाई नेटवर्क जरूरी होगा। अगर ये सभी चीजें सही तरीके से तैयार हो जाती हैं, तो आने वाले समय में एथेनॉल स्टोव LPG सिलेंडर का अच्छा ऑप्शन बन सकता है। इससे रसोई का खर्च कम हो सकता है, खाना साफ तरीके से बनेगा और पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा।