Written By Ashutosh Ojha
Edited By: Ashutosh Ojha | Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 05, 2026, 11:22 AM (IST)
NASA Astronomers Discover 27 Potential Tatooine-Like Circumbinary Planets
(AI Image)
हाल ही में एस्ट्रोनॉमी की दुनिया में एक बड़ी और दिलचस्प खोज सामने आई है, जिसने साइंस फिक्शन को हकीकत के और करीब ला दिया है। वैज्ञानिकों ने ऐसे 27 संभावित ग्रहों की पहचान की है, जो एक नहीं बल्कि दो तारों (सूरज जैसे सितारों) के चारों ओर घूमते हैं। ये ग्रह बिल्कुल Tatooine जैसे हो सकते हैं, जहां आसमान में दो सूरज दिखाई देते हैं। यह खोज NASA के स्पेस टेलीस्कोप Transiting Exoplanet Survey Satellite (TESS) के डेटा से की गई है। इस खोज से यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारे सौरमंडल के बाहर ग्रह किस तरह बनते और विकसित होते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इन ग्रहों को ‘Circumbinary Planet’ कहा जाता है, यानी ऐसे ग्रह जो दो सितारों के चारों ओर घूमते हैं। अब तक केवल करीब 18 ऐसे ग्रहों की पुष्टि हो पाई है, जबकि 6000 से ज्यादा ग्रह ऐसे मिले हैं जो सिर्फ एक तारे के चारों ओर घूमते हैं, जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। इस नई खोज में जो 27 संभावित ग्रह मिले हैं, वे पृथ्वी से लगभग 650 से लेकर 18,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं। खास बात यह है कि इस खोज की घोषणा 4 मई के आसपास की गई, जिसे दुनियाभर में Star Wars Day के रूप में मनाया जाता है, इसलिए यह खबर और भी रोमांचक बन गई।
इस रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिक Ben Montet ने बताया कि एस्ट्रोनॉमी में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें समझना आसान नहीं होता, लेकिन Star Wars की वजह से लोग अब यह आसानी से कल्पना कर सकते हैं कि दो सूरज वाला ग्रह कैसा दिख सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रह्मांड में आधे से ज्यादा तारे जोड़े (binary) या मल्टीपल सिस्टम में होते हैं, इसलिए ऐसे ग्रहों का होना संभव है। पहले वैज्ञानिक ग्रहों को खोजने के लिए ‘Transit Method’ का इस्तेमाल करते थे, जिसमें ग्रह के तारे के सामने से गुजरने पर उसकी रोशनी में कमी देखी जाती है, लेकिन यह तरीका हर बार काम नहीं करता।
इस बार वैज्ञानिकों ने एक नई टेक्नोलॉजी ‘Apsidal precession’ का इस्तेमाल किया, जिसमें दो तारों के बीच होने वाले हल्के डगमगाने (wobble) को ध्यान से देखा जाता है। इस शोध की लीड लेखक Margo Thornton ने बताया कि उन्होंने 1,590 स्टार सिस्टम्स का अध्ययन किया, जिनमें से 36 सिस्टम ऐसे पाए गए जहां तीसरे ऑब्जेक्ट की मौजूदगी के संकेत मिले। इनमें से 27 ऑब्जेक्ट्स ऐसे हैं जो ग्रह के आकार के हो सकते हैं, हालांकि अभी यह पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है कि ये वास्तव में ग्रह हैं या फिर ब्राउन ड्वार्फ (छोटे तारे) या कोई और खगोलीय पिंड।
इस खोज पर प्रतिक्रिया देते हुए Sara Webb ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी भविष्य में और भी ग्रहों की खोज में मदद कर सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे ग्रहों का वातावरण बहुत अलग और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह संभव है कि दो तारों के बीच एक स्थिर क्षेत्र हो, जहां तापमान जीवन के अनुकूल हो सकता है। यह रिसर्च Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुई है। इस खोज से यह साबित होता है कि जो चीजें पहले सिर्फ फिल्मों में दिखाई जाती थीं, वे अब विज्ञान की मदद से हकीकत बनती जा रही हैं।
दो सूरज वाले ग्रहों को Circumbinary Planets कहा जाता है। ये ऐसे ग्रह होते हैं जो एक नहीं बल्कि दो तारों (सूरज जैसे सितारों) के चारों ओर घूमते हैं। यानी वहां आसमान में एक साथ दो सूरज दिख सकते हैं।
इन ग्रहों की पहचान Transiting Exoplanet Survey Satellite (TESS) के डेटा से की गई है। वैज्ञानिकों ने एक नई टेक्नोलॉजी Apsidal Precession का इस्तेमाल किया, जिससे तारों की हल्की-सी हरकत (wobble) को देखकर ग्रहों का अंदाजा लगाया गया।
ये संभावित ग्रह पृथ्वी से लगभग 650 से 18,000 प्रकाश वर्ष दूर हैं। यानी ये हमारे सौरमंडल से बहुत दूर, दूसरी आकाशगंगाओं या तारों के सिस्टम में मौजूद हैं।
फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ ग्रहों पर ऐसा स्थिर क्षेत्र हो सकता है, जहां तापमान जीवन के अनुकूल हो, फिर भी वहां का वातावरण काफी अलग और चुनौतीपूर्ण होगा।
अब तक सिर्फ लगभग 18 ऐसे ग्रह कन्फर्म हुए थे, लेकिन इस खोज में 27 नए संभावित ग्रह मिले हैं। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड में ग्रह कैसे बनते हैं।