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रात को दिन में बदलने वाली टेक्नोलॉजी आई सामने, जानें ये क्या है, कैसे काम करेगी और कितना देना होगा पैसा

कैलिफोर्निया की स्टार्टअप कंपनी Reflect Orbital एक ऐसी टेक्नोलॉजी बना रही है जो सैटेलाइट के जरिए रात में भी धरती पर नेचुरल सूरज की रोशनी पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Mar 24, 2026, 03:36 PM (IST)

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कल्पना कीजिए, रात के समय भी सूरज की रोशनी आपके ऊपर चमक रही हो, सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है लेकिन कैलिफोर्निया की एक स्टार्टअप कंपनी, Reflect Orbital, इसे सच करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह रात में भी धरती के किसी खास हिस्से पर सूरज की रोशनी भेज सके। इस टेक्नोलॉजी को ‘Artificial Daylight on Demand’ कहा जा रहा है। इसका मतलब है कि आप जरूरत पड़ने पर रात के समय भी नेचुरल सूरज की रोशनी का अनुभव कर सकते हैं, हालांकि यह सुविधा इतनी आसान नहीं होगी और इसके लिए ग्राहक को काफी पैसा भी देना होगा। कंपनी ने बताया है कि यह सुविधा प्रति घंटे $5000 (लगभग ₹4.6 लाख) की कीमत पर उपलब्ध होगी।

यह टेक्नोलॉजी कैसे काम करेगी?

Reflect Orbital के अनुसार, इस आइडिया को पूरा करने के लिए उन्होंने Satellite-Based टेक्नोलॉजी डेवलप की है। ये सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे और हर सैटेलाइट में बड़े-बड़े Reflective Mirrors लगे होंगे। दिन के समय ये Mirrors सूरज की रोशनी को कैप्चर करेंगे और रात के समय इसे धरती पर किसी विशेष स्थान की ओर Reflect करेंगे। इसके लिए कंपनी ने पहले अपने प्रोटोटाइप सैटेलाइट के लिए अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन्स कमीशन (FCC) से अनुमति मांगी है। कंपनी का कहना है कि शुरुआती सैटेलाइट लगभग एक छोटे रेफ्रिचरेटर के आकार का होगा। इसे पृथ्वी की सतह से लगभग 400 मील ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा और सैटेलाइट पर लगे Mirrors का आकार लगभग 60 फीट चौड़ा होगा।

सैटेलाइट की रोशनी कितनी दूर तक पहुंचेगी?

इन उपग्रहों को पृथ्वी की उस सीमा पर भेजा जाएगा जो दिन और रात के बीच होती है, जिसे ‘Terminator Line’ कहा जाता है। सैटेलाइट की गति इतनी तेज होगी कि यह लगभग चार मिनट के लिए किसी स्थान पर रोशनी दे सकेगा। सैटेलाइट के Reflected लाइट का प्रभाव लगभग तीन मील चौड़े क्षेत्र में महसूस किया जा सकेगा। कंपनी ने यह भी बताया कि यह सैटेलाइट आसमान में एक चमकदार बिंदु की तरह दिखाई देगा और इसकी चमक चंद्रमा की पूर्णिमा के समान होगी। यह मतलब है कि सैटेलाइट से आने वाली रोशनी इतनी नेचुरल लगेगी कि इसे आसानी से दिन के समय की रोशनी समझा जा सकता है। सैटेलाइट की यह टेक्नोलॉजी खासकर उन जगहों के लिए यूजफुल हो सकती है जहां रात के समय काम करना या रोशनी की जरूरत अधिक होती है, जैसे निर्माण स्थल, खेल के मैदान, या विशेष इवेंट।

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इसे कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है?

कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐप और वेबसाइट भी तैयार की है। ग्राहक अपने स्थान का चयन GPS के माध्यम से कर सकते हैं और सैटेलाइट अपने Mirrors को उस स्थान की ओर मोड़ देगा। ग्राहक को एक सालाना कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करना होगा और कम से कम 1000 घंटे की रोशनी का यूज करना होगा। यानी ग्राहक अपने अनुसार किसी भी रात को सूरज की रोशनी के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले से तय शर्तों और शुल्क को मानना होगा। Reflect Orbital का कहना है कि भविष्य में इस टेक्नोलॉजी से रात को खेती, निर्माण, खेल के मैदान और बाकी एक्टिविटी में काफी मदद मिल सकती है, लेकिन फिलहाल यह प्रोटोटाइप यानी परीक्षण स्तर पर है और सरकारी अनुमति मिलने के बाद ही इसे पूरी तरह टेस्ट किया जाएगा।